दक्षिण भारत के रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां हैदराबाद ने अल्ट्रा-लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में मजबूत पकड़ बना ली है। इंडिया सोथबीज इंटरनेशनल रियल्टी और सीआरई मैट्रिक्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ₹10 करोड़ और उससे अधिक कीमत वाले घरों की कुल बिक्री ₹8,562 करोड़ तक पहुंच गई। इस सेगमेंट में हैदराबाद का प्रदर्शन इतना मजबूत रहा कि उसने बेंगलुरु को चार गुना पीछे छोड़ दिया। हैदराबाद की इस बढ़त के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां मिलने वाला बड़ा और खुला फ्लोर स्पेस है। रिपोर्ट बताती है कि शहर में लगभग 57% बिक्री 8,000 वर्ग फुट से बड़े अपार्टमेंट्स की रही, जो इस बात का संकेत है कि खरीदार यहां बड़े और आलीशान घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसके अलावा विला और रो-हाउस का हिस्सा भी कुल बिक्री का करीब 40% रहा, जो दर्शाता है कि हाई-नेटवर्थ खरीदार स्वतंत्र और विशाल घरों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। हैदराबाद की खासियत सिर्फ बड़े घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां “वैल्यू-फॉर-स्पेस” भी काफी बेहतर है। ₹10 करोड़ के निवेश पर खरीदार को औसतन 6,210 वर्ग फुट का स्पेस मिल रहा है, जो अन्य बड़े शहरों की तुलना में काफी अधिक है। यही कारण है कि यह शहर अल्ट्रा-लग्जरी हाउसिंग में नया बेंचमार्क स्थापित कर रहा है। दूसरी ओर, बेंगलुरु का बाजार भले ही आकार में छोटा है, लेकिन इसकी ग्रोथ रफ्तार काफी तेज है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां कुल ₹1,957 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई, लेकिन सालाना आधार पर 52% की जबरदस्त वृद्धि इसे सबसे तेजी से बढ़ते लग्जरी मार्केट के रूप में स्थापित करती है। बेंगलुरु में नए माइक्रो-मार्केट्स उभर रहे हैं, जो इस ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं। इनमें राजानुकुंटे जैसे इलाकों ने खास पहचान बनाई है, जहां अकेले ₹572 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई। चेन्नई की बात करें तो यह शहर अब भी अपने प्रीमियम और प्रतिष्ठित इलाकों के लिए जाना जाता है।
यहां कुल ₹727 करोड़ की बिक्री हुई है। हालांकि, सीमित ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस और अपेक्षाकृत कम हाई-इनकम खरीदारों की वजह से इसकी ग्रोथ बेंगलुरु और हैदराबाद के मुकाबले धीमी रही है। शहर के अबिरामपुरम और अल्वारपेट जैसे केंद्रीय इलाके ही लग्जरी सेगमेंट को आगे बढ़ा रहे हैं। इस रिपोर्ट से साफ है कि दक्षिण भारत के तीन बड़े शहर हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई तीनों की अपनी अलग पहचान बन चुकी है। जहां हैदराबाद बड़े और भव्य घरों के लिए जाना जा रहा है, वहीं बेंगलुरु तेजी से विस्तार कर रहा है और नए इलाकों में लग्जरी हाउसिंग का दायरा बढ़ा रहा है। वहीं चेन्नई पारंपरिक और प्रतिष्ठित इलाकों पर आधारित बाजार बना हुआ है।
हैदराबाद बनाम बेंगलुरु: कहां बन रहा ज्यादा महंगा घर और कहां मिल रहा ज्यादा स्पेस?
अगर सीधे तौर पर तुलना करें तो हैदराबाद और बेंगलुरु के बीच सबसे बड़ा फर्क “स्पेस बनाम कीमत” का है। हैदराबाद में खरीदारों को कम कीमत में ज्यादा बड़ा घर मिल रहा है, जिससे यह शहर उन लोगों के लिए ज्यादा आकर्षक बनता है जो बड़े और लक्जरी स्पेस की तलाश में हैं। वहीं बेंगलुरु में प्रति वर्ग फुट कीमत अधिक है, जिससे यहां कम स्पेस में ही ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। इंडिया सोथबीज इंटरनेशनल रियल्टी के सीईओ अश्विन चड्ढा के अनुसार, दक्षिण भारत के लग्जरी हाउसिंग मार्केट की तीन स्पष्ट दिशाएं हैं।
हैदराबाद बड़े और भव्य घरों का केंद्र बन चुका है, बेंगलुरु तेजी से विकसित हो रहा है और नए क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, जबकि चेन्नई अपनी पारंपरिक और प्रतिष्ठित पहचान बनाए हुए है। सीआरई मैट्रिक्स के सह-संस्थापक अभिषेक किरण गुप्ता का मानना है कि हैदराबाद की सफलता मजबूत बुनियादी ढांचे और बेहतर स्पेस वैल्यू पर आधारित है। वहीं बेंगलुरु का उभरता हुआ ट्रेंड यह दिखाता है कि अब लग्जरी लिविंग सिर्फ पुराने और पॉश इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही है।
निवेशकों के लिए यह रिपोर्ट एक स्पष्ट संदेश देती है कि सिर्फ प्रॉपर्टी के सेगमेंट को देखकर निर्णय लेना सही नहीं होगा। हर शहर की अपनी अलग ताकत और बाजार की दिशा है, जिसे ध्यान में रखकर ही निवेश रणनीति बनानी चाहिए। जहां हैदराबाद बड़े और किफायती लग्जरी स्पेस के लिए बेहतर विकल्प है, वहीं बेंगलुरु भविष्य की तेज ग्रोथ और निवेश रिटर्न के लिहाज से मजबूत दावेदार बनकर उभर रहा है।

















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