निर्णायक मोड़ : तमिलनाडु में विजय को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस का मिला साथ ! डीएमके को यह रिश्ता मंजूर नहीं

तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहां सत्ता गठन को लेकर तेजी से बदलते समीकरण नए संकेत दे रहे हैं। कांग्रेस अब तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेता विजय को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की तैयारी में है। इस पर अंतिम फैसला आज लिया जा सकता है, जिससे राज्य की सत्ता का पूरा गणित बदल सकता है। मंगलवार रात तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में यह सहमति बनी कि राज्य में धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए विजय का समर्थन करना एक रणनीतिक और वैचारिक रूप से उचित कदम होगा। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस सरकार में शामिल होगी या बाहर से समर्थन देगी। 

इस पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में लिया जाएगा। विजय ने स्वयं कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर समर्थन का आग्रह किया था। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर के बीच विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद राज्य इकाई को निर्देश दिया गया कि वह स्थानीय परिस्थितियों और जनता की भावना को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय ले। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि तमिलनाडु का जनादेश धर्मनिरपेक्ष सरकार के पक्ष में है और वह किसी भी स्थिति में भाजपा और उसके सहयोगी समूहों को सत्ता से दूर रखना चाहती है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विजय ने अपने राजनीतिक विचारों में पेरुमथलाईवर कामराज से प्रेरणा लेने की बात कही है, जो कांग्रेस की सोच के अनुरूप है। ऐसे में दोनों के बीच सहयोग स्वाभाविक माना जा रहा है। यदि विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो 234 सदस्यीय सदन में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं। 

सरकार बनाने के लिए उसे 118 सीटों की आवश्यकता है, यानी उसे अभी 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पास 5 विधायक हैं, जबकि पीएमके के 4 और भाकपा तथा माकपा के 2-2 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन विजय के लिए सत्ता तक पहुंचने का रास्ता आसान बना सकता है। दूसरी ओर, कांग्रेस अभी तक DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा रही है, इसलिए यह फैसला पुराने सहयोगी दलों के साथ उसके रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। डीएमके ने इस संभावित कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। 

पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से गलत और जल्दबाजी में लिया गया कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि AIADMK के 47 विधायक पहले ही विजय को समर्थन देने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस की भूमिका उतनी महत्वपूर्ण नहीं रह जाती। डीएमके का मानना है कि कांग्रेस यह कदम केवल राजनीतिक दबाव में उठा रही है और इसका उसे भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस बीच, टीवीके ने अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को महाबलीपुरम के पास एक स्थान पर ठहराया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। यह कदम राजनीतिक अस्थिरता की आशंका को देखते हुए उठाया गया माना जा रहा है।

तमिलनाडु में कांग्रेस-विजय गठजोड़ से बदल सकती है सत्ता की तस्वीर

तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम केवल समर्थन का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति के नए दौर की शुरुआत का संकेत भी है। यदि कांग्रेस विजय के साथ खुलकर आती है, तो यह पारंपरिक राजनीतिक ढांचे को चुनौती देने वाला बड़ा कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल सत्ता संतुलन बदलेगा, बल्कि क्षेत्रीय दलों के प्रभाव पर भी असर पड़ सकता है। DMK ने कांग्रेस को यह भी याद दिलाया कि पिछले चुनावों में उसकी सफलता में डीएमके के संगठन और समर्थन की बड़ी भूमिका रही थी। 

साथ ही यह भी कहा गया कि जब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे थे, तब डीएमके ने उसका मजबूती से साथ दिया था। ऐसे में कांग्रेस का यह नया रुख पुराने सहयोगी संबंधों पर सवाल खड़ा करता है और राजनीतिक भरोसे को झटका दे सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस आखिर किस रास्ते को चुनती है। यदि वह सरकार में शामिल होती है तो उसे सीधे तौर पर सत्ता में भागीदारी मिलेगी और नीतिगत फैसलों में भूमिका बढ़ेगी। वहीं, यदि बाहर से समर्थन देती है तो वह संतुलन की राजनीति करते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की कोशिश करेगी। 

तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद निर्णायक दौर में है। कांग्रेस और विजय का संभावित गठजोड़ न केवल सरकार गठन को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों, गठबंधनों और जनता के रुझान पर भी गहरा असर डाल सकता है। आने वाले कुछ घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं, जहां हर राजनीतिक कदम दूरगामी परिणाम तय करेगा।

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