केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में किए जाने वाले इक्विटी निवेश पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स को समाप्त करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हाल के दिनों में यह चर्चा तेज थी कि सरकार निवेशकों को राहत देने के लिए इस टैक्स को खत्म कर सकती है, लेकिन सरकार ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूंजीगत लाभ कर समेत सभी कर नीतियों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, लेकिन किसी भी बदलाव का फैसला देश की आर्थिक स्थिति, निवेश माहौल और सरकारी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है। सरकार का यह बयान निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे फिलहाल कर व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में कहा कि सरकार समय-समय पर कर व्यवस्था की समीक्षा करती है। यह प्रक्रिया आम तौर पर केंद्रीय बजट और उससे जुड़े विधायी संशोधनों के दौरान होती है। समीक्षा के समय देश की व्यापक आर्थिक स्थिति, राजस्व की जरूरत, निवेश को बढ़ावा देने की संभावनाएं और वित्तीय संतुलन जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। हालांकि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस समय एलटीसीजी टैक्स को समाप्त करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से होने वाली आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि शेयर बाजार में निवेश बढ़ा है और सरकार को इस मद से अच्छा राजस्व प्राप्त हो रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान इक्विटी निवेश पर एलटीसीजी टैक्स से कुल लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये का संग्रह हुआ। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 79 प्रतिशत अधिक है। सरकार के मुताबिक असेसमेंट ईयर 2025-26 में एलटीसीजी टैक्स के रूप में 1.29 लाख करोड़ रुपये का संग्रह किया गया, जबकि असेसमेंट ईयर 2024-25 में यह आंकड़ा 72,249 करोड़ रुपये था। वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ये आंकड़े असेसमेंट ईयर के आधार पर जारी किए गए हैं। यानी असेसमेंट ईयर 2025-26 का संबंध वित्त वर्ष 2024-25 में अर्जित आय से है, जबकि असेसमेंट ईयर 2024-25 का संबंध वित्त वर्ष 2023-24 में हुई आय से है। इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य आंकड़ों को लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति को दूर करना है। सरकार का मानना है कि शेयर बाजार में लगातार बढ़ रही निवेशकों की भागीदारी और बाजार में आई तेजी का असर एलटीसीजी टैक्स संग्रह पर भी दिखाई दिया है। इससे सरकार के कर राजस्व में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है।
एलटीसीजी टैक्स की मौजूदा व्यवस्था और विदेशी निवेशकों के लिए नई राहत
सरकार ने संसद में यह भी बताया कि सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों और इक्विटी आधारित निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की दर 12.5 प्रतिशत है। यह दर घरेलू खुदरा निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, दोनों पर समान रूप से लागू होती है। यानी शेयर बाजार में लंबे समय के निवेश से होने वाले लाभ पर दोनों श्रेणियों के निवेशकों के लिए एक जैसी कर व्यवस्था लागू है।हालांकि सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों यानी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को ब्याज से होने वाली आय और पूंजीगत लाभ, दोनों पर आयकर से छूट मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य भारत की कर व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है, ताकि वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय बाजार और अधिक आकर्षक बन सके। विशेष रूप से पेंशन फंड, बीमा कंपनियां और सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे बड़े और दीर्घकालिक निवेशकों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
सरकारी प्रतिभूतियों पर कर छूट से विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और भारत के बॉन्ड बाजार में अधिक विदेशी निवेश आने की संभावना बनेगी। इससे सरकार को भी दीर्घकालिक पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी।
फिलहाल सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इक्विटी निवेश पर लागू लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में किसी तरह की राहत या इसे समाप्त करने की कोई योजना नहीं है। आने वाले समय में यदि आर्थिक परिस्थितियों या बजट की जरूरतों के अनुसार कोई बदलाव आवश्यक हुआ, तो उस पर केंद्रीय बजट और संबंधित विधायी प्रक्रिया के दौरान विचार किया जाएगा। तब तक मौजूदा कर व्यवस्था ही लागू रहेगी।

















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