हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार को तीन दिवसीय दिल्ली दौरे पर रवाना हुए। मुख्यमंत्री के आधिकारिक दौरा कार्यक्रम के अनुसार वह 7 से 9 सितंबर तक दिल्ली में रहेंगे। उनके इस दौरे को प्रशासनिक और राजनीतिक, दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र सरकार के अन्य मंत्रियों से मुलाकात करने की संभावना है। इन बैठकों में हिमाचल प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित मामलों को केंद्र के समक्ष उठाया जा सकता है। मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रदेश के वित्तीय और आर्थिक मुद्दे रह सकते हैं। हिमाचल सरकार लंबे समय से केंद्र से विभिन्न मदों में लंबित सहायता और प्रदेश के आर्थिक हितों से जुड़े मामलों को उठाती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री की केंद्रीय मंत्रियों के साथ संभावित बैठकों में राज्य की वित्तीय स्थिति, केंद्र से मिलने वाली सहायता और अन्य लंबित मामलों पर चर्चा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम में 8 सितंबर का पूरा दिन आधिकारिक बैठकों के लिए आरक्षित रखा गया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि इस दिन केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रियों और अधिकारियों के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठकें हो सकती हैं। हालांकि, किन-किन मंत्रियों से मुलाकात होगी और बैठकों का एजेंडा क्या रहेगा, इसकी पूरी तस्वीर आधिकारिक स्तर पर सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री केंद्र के सामने हिमाचल प्रदेश से जुड़े उन मामलों को भी प्रमुखता से रख सकते हैं, जिन पर राज्य सरकार लंबे समय से समाधान की मांग कर रही है। इनमें वित्तीय सहायता, केंद्र से लंबित आर्थिक सहयोग और प्रदेश के हिस्से से जुड़े विभिन्न दावे शामिल हैं। बीबीएमबी के पास हिमाचल प्रदेश के करीब 4,000 करोड़ रुपये के एरियर का मामला भी इस दौरे के दौरान चर्चा में आ सकता है। राज्य सरकार इस राशि को लेकर अपना पक्ष केंद्र के सामने रख सकती है। मुख्यमंत्री की कोशिश हो सकती है कि प्रदेश के आर्थिक हितों से जुड़े ऐसे मामलों में केंद्र स्तर पर जल्द निर्णय हो और हिमाचल को उसका लंबित हिस्सा मिल सके। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को देखते हुए राज्य सरकार लगातार केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की मांग करती रही है। प्राकृतिक आपदाओं, बुनियादी ढांचे, विकास योजनाओं और अन्य जरूरतों को लेकर भी प्रदेश को केंद्र की सहायता की आवश्यकता रहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा इन विषयों पर केंद्र के साथ बातचीत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के दौरे का एक राजनीतिक पक्ष भी है। दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से उनकी मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। यदि कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठक होती है तो प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और संगठन से जुड़े विषयों के साथ मंत्रिमंडल विस्तार पर भी चर्चा हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही हैं। प्रदेश मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद अभी रिक्त है। ऐसे में मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली प्रवास को इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वह कांग्रेस नेतृत्व के साथ संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विचार-विमर्श कर सकते हैं। मंत्रिमंडल में रिक्त पद को भरने को लेकर पार्टी के भीतर भी चर्चाएं होती रही हैं। मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व के बीच यदि इस विषय पर बैठक होती है तो संभावित नामों और क्षेत्रीय तथा राजनीतिक संतुलन को लेकर भी विचार हो सकता है। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम निर्णय कब होगा, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
केंद्र के सामने आर्थिक मुद्दे, बीबीएमबी के 4,000 करोड़ और लंबित सहायता पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री सुक्खू का दिल्ली दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य की वित्तीय चुनौतियों के बीच केंद्र से अधिक सहयोग की अपेक्षा कर रही है। इसलिए इस दौरे को केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश के कई ऐसे विषय हैं, जिन पर केंद्र के स्तर से सहयोग या निर्णय की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्रियों के साथ संभावित बैठकों में मुख्यमंत्री प्रदेश के वित्तीय मामलों को प्रमुखता से उठा सकते हैं। इसके साथ ही केंद्र से मिलने वाली विभिन्न प्रकार की सहायता और लंबित आर्थिक मामलों पर भी बातचीत हो सकती है। हिमाचल की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है। बीबीएमबी से संबंधित करीब 4,000 करोड़ रुपये के एरियर का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। यह राशि हिमाचल के आर्थिक हितों से जुड़ी है और राज्य सरकार इस मामले को केंद्र के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने की कोशिश कर सकती है। मुख्यमंत्री की ओर से इस राशि के भुगतान और प्रदेश के हितों से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है।
इसके अलावा प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों को भी मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्रियों के सामने रख सकते हैं। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए सड़क, आधारभूत ढांचा, वित्तीय संसाधन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाना लगातार महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की बैठकों में राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप केंद्र से सहयोग मांगने की कोशिश हो सकती है। मुख्यमंत्री का 8 सितंबर का पूरा दिन आधिकारिक बैठकों के लिए रखा गया है। इसलिए यह दिन उनके दिल्ली दौरे का सबसे व्यस्त दिन रहने की संभावना है। इस दौरान केंद्र सरकार के मंत्रियों और अन्य संबंधित लोगों से मुलाकात के जरिए हिमाचल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व के साथ संभावित मुलाकात इस दौरे को राजनीतिक रूप से भी अहम बना रही है। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा काफी समय से चल रही है और एक मंत्री पद रिक्त है। ऐसे में मुख्यमंत्री दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं।
यदि हाईकमान के साथ मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सहमति बनती है तो आने वाले समय में प्रदेश मंत्रिमंडल में बदलाव या नए मंत्री की नियुक्ति को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री सुक्खू 9 सितंबर को दिल्ली से शिमला लौटेंगे। उनके तीन दिवसीय दौरे के दौरान होने वाली केंद्रीय और राजनीतिक मुलाकातों पर प्रदेश की नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र के साथ आर्थिक मामलों और लंबित सहायता को लेकर क्या प्रगति होती है तथा कांग्रेस नेतृत्व के साथ मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई सहमति बनती है या नहीं। मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा हिमाचल प्रदेश के लिए आर्थिक और राजनीतिक, दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री केंद्र के समक्ष प्रदेश के वित्तीय हितों और लंबित मामलों को मजबूती से रखने की कोशिश करेंगे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व के साथ संभावित मुलाकात प्रदेश की राजनीति में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


















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