फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू आध्यात्मिक परंपरा के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। पेरिस से करीब 30 किलोमीटर दूर पूर्वी उपनगर बुसी-सेंट-जॉर्ज में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ। करीब 5,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बना यह मंदिर फ्रांस का पहला ऐसा हिंदू मंदिर है, जिसे पारंपरिक हिंदू स्थापत्य शैली में विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसे यूरोप में पारंपरिक शैली में निर्मित सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में भी गिना जा रहा है। मंदिर परिसर में पूजा स्थल के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी स्थान तैयार किया गया है। मंदिर के निर्माण में भारत और फ्रांस की तकनीकी तथा कारीगरी की साझेदारी साफ दिखाई देती है। करीब 10 हजार पत्थर के खंड भारत से फ्रांस लाए गए। इन्हें भारतीय कारीगरों ने तराशा, जबकि फ्रांसीसी अभियंताओं ने उन्हें निर्धारित वास्तु योजना के अनुसार जोड़ा। पूरे निर्माण पर कई करोड़ यूरो खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इस परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें भारत की सदियों पुरानी शिल्प परंपरा और फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग का मेल देखने को मिलता है।
मंदिर का उद्घाटन 13 दिवसीय सांस्कृतिक समारोह के बीच हुआ, जो 2 से 14 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें विभिन्न समुदायों और देशों से लोग भाग ले रहे हैं। मंदिर को केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, शिक्षा और सेवा के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। बीएपीएस के अनुसार यह मंदिर सभी धर्मों और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला रहेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समारोह को संबोधित किया। उन्होंने मंदिर के उद्घाटन को भारत और फ्रांस के बीच पुराने सांस्कृतिक संबंधों में एक नया अध्याय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भव्य मंदिर दोनों देशों के बीच सहयोग और संभावनाओं का ऐसा प्रतीक बनेगा, जो आने वाली पीढ़ियों तक भारत-फ्रांस संबंधों की मजबूती का संदेश देगा। भारत और फ्रांस के बीच संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर भारत एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है। यह साझेदारी केवल राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश तेजी से साथ आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस इस वर्ष को भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के रूप में मना रहे हैं। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे समय में पेरिस के पास स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करने वाला अवसर है। पीएम मोदी ने भारत-फ्रांस संबंधों की विशेषता बताते हुए कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी केवल वर्तमान परिस्थितियों पर आधारित नहीं है। इसकी नींव लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों पर टिकी है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच आधुनिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने के साथ-साथ लोगों के बीच आपसी जुड़ाव भी मजबूत हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने इतिहास के उन अध्यायों का भी उल्लेख किया, जिनमें भारत और फ्रांस के लोगों का संपर्क दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदानों का इतिहास दोनों देशों की साझा स्मृति का हिस्सा है। भारतीय सैनिकों ने विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर अपनी भूमिका निभाई और उनके बलिदान आज भी याद किए जाते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति फ्रांसीसी विद्वानों की रुचि का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि संस्कृत को बढ़ावा देने और उसे लोकप्रिय बनाने में फ्रांसीसी विद्वानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे दोनों देशों के बीच संबंध केवल राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर नहीं रहे, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के स्तर पर भी गहरे हुए। प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध फ्रांसीसी लेखक रोमेन रोलां का उल्लेख करते हुए कहा कि रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर उनके लेखन ने भारतीय और फ्रांसीसी समाजों को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पेरिस से लेकर पुडुचेरी स्थित श्री अरविंद आश्रम तक की आध्यात्मिक यात्रा का भी जिक्र किया और कहा कि इससे भारत और फ्रांस के अनेक साधकों को प्रेरणा मिली। पीएम मोदी ने कहा कि कई दशक पहले श्रील प्रभुपाद भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के माध्यम से उन्होंने दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक संबंधों को एक नया आयाम दिया। आज योग भी भारत और फ्रांस के बीच आपसी जुड़ाव का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
मंदिर उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी- भारत-फ्रांस साझेदारी को मिलेगी नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दिनों भारत और फ्रांस के बीच संयुक्त उद्यमों और साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर काफी चर्चा हो रही है। स्वामीनारायण मंदिर इस संभावना को भी एक नया आयाम देता है। मंदिर के निर्माण में भारतीय पत्थरों और कारीगरों के साथ फ्रांसीसी इंजीनियरिंग का इस्तेमाल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मंदिर में इस्तेमाल किए गए पत्थरों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन शिल्पकारी और प्रतिभा का फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ मिलना अपने आप में दोनों देशों के सहयोग की सुंदर तस्वीर पेश करता है। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि मंदिर से निकलने वाला सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश केवल पेरिस या फ्रांस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे यूरोप तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि यह मंदिर यूरोप के लोगों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विचारों को समझने का अवसर देगा।
मोदी ने कहा कि स्वामीनारायण मंदिर फ्रांस की विविधता को और समृद्ध करेगा तथा भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वामीनारायण मंदिरों की परंपरा में भक्ति के साथ सेवा का भाव भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यह मंदिर आने वाले समय में आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ मानवीय सेवा का केंद्र भी बन सकता है। पेरिस के पास बने इस मंदिर की यात्रा पांच दशक से अधिक पुरानी आध्यात्मिक आकांक्षा का परिणाम है। बीएपीएस के अनुसार फ्रांस में मंदिर की कल्पना की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी और वर्ष 2026 में यह सपना साकार हुआ। वर्ष 2024 में मंदिर के निर्माण की आधारभूत प्रक्रिया शुरू हुई थी।
मंदिर के उद्घाटन से पहले पेरिस में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। तीन सितंबर को सीन नदी पर आयोजित जल यात्रा में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए 5,500 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। भारतीय और फ्रांसीसी झंडों से सजी 11 नौकाओं की यह यात्रा करीब एक किलोमीटर लंबी थी। इस तरह बुसी-सेंट-जॉर्ज में बना स्वामीनारायण मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन स्थापत्य और शिल्प परंपरा तथा फ्रांस की आधुनिक तकनीकी क्षमता के संगम का उदाहरण बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत-फ्रांस की मित्रता, सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताते हुए उम्मीद जताई कि यहां से निकलने वाला भारतीय संस्कृति का संदेश पूरे यूरोप में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करेगा।


















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