दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने इलाके में दहशत फैला दी। करीब 40 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। इमारत के मलबे में दबने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हादसे में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाने में जुटे हैं और घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बताया गया है कि हादसे का शिकार हुई इमारत करीब चार दशक पुरानी थी। इसका निर्माण वर्ष 1990 में कराया गया था। खास बात यह है कि दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड में इस इमारत को खतरनाक या जर्जर घोषित नहीं किया गया था। ऐसे में अचानक इमारत के ढहने की घटना ने निर्माण की सुरक्षा और बेसमेंट में चल रहे काम को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक इमारत के बेसमेंट में पिछले करीब सात दिनों से तोड़फोड़ और खुदाई का काम चल रहा था। यहां रहने वाले पीजी के छात्रों ने भी बेसमेंट में लगातार निर्माण संबंधी गतिविधियां होने की बात कही है। स्थानीय लोगों के अनुसार बेसमेंट पहले से ही कमजोर स्थिति में था और उसमें पानी भी भरा हुआ था। इसके बावजूद वहां खुदाई और तोड़फोड़ का काम जारी रहने की बात सामने आई है। रविवार को बेसमेंट में खुदाई के दौरान अचानक एक पिलर खिसक गया। इसके बाद देखते ही देखते ऊपर खड़ी पूरी पांच मंजिला इमारत भरभराकर नीचे आ गिरी। इमारत के गिरते ही आसपास अफरा-तफरी मच गई। उस समय बेसमेंट में काम कर रहे कुछ मजदूर भी मलबे की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और बचाव दल को सूचना दी, जिसके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। भारी मात्रा में मलबा होने के कारण बचाव अभियान में काफी सावधानी बरती जा रही है। मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, वहीं संभावित रूप से किसी व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचावकर्मी कई स्थानों पर हाथ से भी मलबा हटाकर जांच कर रहे हैं। हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 12 लोगों को बचाया गया है। गंभीर रूप से घायल पांच लोगों को एम्स में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। घटनास्थल के ठीक पड़ोस में बनी एक अन्य इमारत को एहतियातन खाली करा लिया गया है। इस इमारत में भी दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। बचाव दल के अधिकारियों के अनुसार मलबा हटाने के दौरान आसपास की कमजोर इमारत पर दबाव पड़ सकता है और उसके गिरने का खतरा बना हुआ है। इसलिए राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
पड़ोसी इमारत को सहारा देने के लिए अतिरिक्त पिलर लगाए जा रहे हैं। बचाव दल का प्रयास है कि पहले आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित किया जाए और उसके बाद मलबे को पूरी तरह हटाया जाए। प्रशासन की ओर से इलाके में लोगों की आवाजाही को भी नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए और किसी दूसरे हादसे की स्थिति न बने।इस हादसे ने दिल्ली में पुराने भवनों की सुरक्षा और उनमें होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर बेसमेंट में तोड़फोड़, खुदाई और संरचनात्मक बदलाव के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी जांच अब महत्वपूर्ण हो गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत के बेसमेंट में कई दिनों से काम चल रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस काम के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और निर्माण के दौरान भवन की संरचनात्मक सुरक्षा का ध्यान रखा गया था या नहीं।
हादसे के बाद कार्रवाई तेज, मालिक पर मुकदमा, जर्जर इमारतों पर भी नजर
हादसे के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इमारत के मालिक आनंद बंसल बताए गए हैं, जो गुरुग्राम में रहते हैं। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या और लापरवाही समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बेसमेंट में चल रही तोड़फोड़ और खुदाई किसकी अनुमति से की जा रही थी और इस काम के दौरान सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। घटना के बाद दिल्ली नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है। नगर निगम के रिकॉर्ड में हादसे वाली इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि करीब 40 वर्ष पुरानी इस इमारत की संरचनात्मक स्थिति का समय-समय पर निरीक्षण किया गया था या नहीं। साथ ही बेसमेंट में चल रहे काम की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। दिल्ली की महापौर प्रवेश वाही ने हादसे के बाद बड़ा कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि चार मंजिल से अधिक ऊंचाई वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा। इससे साफ है कि हादसे के बाद राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की तैयारी है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हादसे के कारणों के साथ-साथ इमारत की स्थिति, बेसमेंट में चल रहे काम, निर्माण संबंधी अनुमति और संबंधित विभागों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य हादसे के पीछे जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाना है। वहीं, छह सितंबर को जारी नगर निगम के आदेश में सत्य निकेतन में बनी जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर नोटिस लगाए जाने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि इलाके में भवनों की सुरक्षा को लेकर व्यापक कार्रवाई की तैयारी है। हादसे के बाद अब उन इमारतों की भी जांच की जा रही है, जिनकी संरचना कमजोर हो सकती है।
सत्य निकेतन में हुई यह घटना केवल एक इमारत के अचानक ढहने तक सीमित नहीं है। इसने पुराने भवनों में बेसमेंट निर्माण, खुदाई और तोड़फोड़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के दावे सही पाए जाते हैं कि कमजोर बेसमेंट में पानी भरा होने के बावजूद सात दिनों से तोड़फोड़ चल रही थी, तो जांच में यह महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। मलबा पूरी तरह हटाए जाने और घटनास्थल की तकनीकी जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों की तस्वीर स्पष्ट होगी। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों की तलाश के साथ आसपास की इमारतों को सुरक्षित रखना है। हादसे में छह लोगों की मौत के बाद अब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और भवन सुरक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी दबाव बढ़ गया है।


















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