देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट स्नातक’ में पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया है। लगातार उठ रहे सवालों, छात्रों के विरोध और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़े असर के बीच अब सरकार ने अगले वर्ष से परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने का फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि अब समय आ गया है कि प्रवेश परीक्षाओं को तकनीक आधारित और अधिक सुरक्षित बनाया जाए ताकि किसी भी प्रकार की धांधली, प्रश्नपत्र लीक या मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। शिक्षा मंत्री ने साफ कहा कि सरकार “शून्य त्रुटि और शून्य सहनशीलता” की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी मेहनती और योग्य छात्र का भविष्य शिक्षा माफिया या भ्रष्ट तंत्र की वजह से खराब नहीं होने दिया जाएगा। मंत्री ने माना कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है, जिसे सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करती है।
दरअसल, नीट स्नातक 2026 की परीक्षा 3 मई को देशभर में आयोजित की गई थी। परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और तथाकथित “गेस पेपर” के जरिए असली सवाल बाहर आने के आरोप सामने आए। मामला बढ़ने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से जांच शुरू की गई। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 7 मई को एजेंसी को ऐसी जानकारी मिली, जिसमें कथित गेस पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र के कई सवाल एक जैसे पाए गए। प्रारंभिक जांच में प्रश्नपत्र का कुछ हिस्सा लीक होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। इस फैसले के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई थी। कई छात्रों ने महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा दी थी और अब उन्हें दोबारा परीक्षा का सामना करना पड़ेगा। हालांकि सरकार ने राहत देते हुए कहा है कि दोबारा परीक्षा के लिए किसी भी छात्र से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि परीक्षा रद्द होने के दिन ही यह निर्णय ले लिया गया था कि छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि रद्द की गई परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी। इसके लिए छात्रों को परीक्षा शहर दोबारा चुनने का अवसर भी दिया जाएगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी उम्मीदवारों को एक सप्ताह का समय देगी ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार नया परीक्षा केंद्र चुन सकें। मंत्रालय का कहना है कि कई छात्रों ने यात्रा, दूरी और व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं, इसलिए इस बार परीक्षा केंद्र चयन में अधिक लचीलापन दिया जा रहा है। परीक्षा समय में भी बदलाव किया गया है। पहले परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होती थी, लेकिन अब विद्यार्थियों को अतिरिक्त 15 मिनट दिए जाएंगे।
नई समयावधि दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजकर 15 मिनट तक होगी। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार संशोधित प्रवेश पत्र 14 जून तक जारी कर दिए जाएंगे। प्रेस वार्ता के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वर्तमान विवाद ने यह साफ कर दिया है कि पारंपरिक ओएमआर आधारित प्रणाली में कई प्रकार की कमजोरियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र की छपाई, परिवहन, वितरण और उत्तर पुस्तिका प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप अधिक होने के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं। इसी वजह से सरकार ने अगले वर्ष से परीक्षा को पूर्णतः कंप्यूटर आधारित प्रणाली में बदलने का निर्णय लिया है।
तकनीक आधारित परीक्षा ही भविष्य, सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसी सुधार पर सरकार का जोर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने के बाद प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना बेहद कम हो जाएगी। हर छात्र को अलग क्रम में प्रश्न मिलेंगे और परीक्षा केंद्रों की निगरानी भी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता और त्वरित परिणाम प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार केवल परीक्षा प्रणाली बदलने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली में भी सुधार किए जाएंगे। परीक्षा केंद्रों की पहचान, तकनीकी निगरानी, डिजिटल सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष जांच व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का बचाव करते हुए कहा कि एजेंसी सक्षम नेतृत्व के हाथों में है और बड़ी संख्या में परीक्षाओं का सफल संचालन करती रही है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस बार जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने व्यवस्था की कुछ कमजोरियों को उजागर किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार इन कमियों को छिपाने के बजाय उन्हें दूर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “देश के युवाओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठता है तो यह केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि करोड़ों विद्यार्थियों के सपनों से जुड़ा मामला बन जाता है। इसलिए सरकार हर स्तर पर कठोर कदम उठाने जा रही है।” प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में अन्य बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में भी तकनीक आधारित प्रणाली लागू करने पर विचार किया जा सकता है। सरकार विशेषज्ञ समितियों की रिपोर्ट और तकनीकी सुझावों के आधार पर नई परीक्षा नीति तैयार कर रही है।
दूसरी ओर परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों, अभिभावकों में अभी भी चिंता बनी हुई है।
कई छात्रों का कहना है कि दोबारा परीक्षा की तैयारी मानसिक दबाव बढ़ाने वाली है। हालांकि मंत्रालय का दावा है कि नई व्यवस्था में छात्रों की सुविधा और निष्पक्षता दोनों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यदि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली सही तरीके से लागू होती है तो इससे देश की प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे प्रश्नपत्र सुरक्षा, मूल्यांकन प्रक्रिया और परिणामों की विश्वसनीयता मजबूत होगी। लेकिन इसके साथ ही ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में तकनीकी ढांचे को मजबूत करना भी बड़ी चुनौती रहेगा। फिलहाल सरकार का पूरा फोकस 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और विवाद मुक्त तरीके से संपन्न कराने पर है। मंत्रालय ने साफ किया है कि इस बार किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जाएगी।

















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