मोदी सरकार का बड़ा आर्थिक कदम : सोना-चांदी पर बढ़ाया आयात शुल्क, विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता दबाव अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और रुपये की लगातार कमजोरी के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए सोना और चांदी के आयात पर शुल्क बढ़ा दिया। सरकार ने दोनों की आयात शुल्क दर को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से अनावश्यक आयात पर रोक लगेगी, व्यापार घाटा कम होगा और रुपये को मजबूती देने में मदद मिलेगी। मोदी सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब सोना और चांदी पर 10 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क लगाया जाएगा, जबकि इसके साथ 5 प्रतिशत कृषि आधारभूत संरचना एवं विकास उपकर भी वसूला जाएगा। इससे पहले इन धातुओं पर कुल 6 प्रतिशत शुल्क लिया जा रहा था। नए फैसले के बाद बाजार में हलचल बढ़ गई है और आभूषण कारोबार से लेकर निवेश क्षेत्र तक इसका असर दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। 

हाल ही में रुपया 95.75 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया था। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी के भारी आयात के कारण देश से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जा रही थी, जिससे व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा था। सरकार अब इस पर नियंत्रण करने की कोशिश में जुटी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिन पहले ही देशवासियों से अपील की थी कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अगले एक वर्ष तक अनावश्यक सोना खरीदने से बचें। प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश को इस समय विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है और लोगों को राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए संयम बरतना चाहिए। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद अब सरकार ने शुल्क बढ़ाकर बड़ा संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में आयात नियंत्रण को लेकर और सख्ती हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को बताया था कि सोना और चांदी पर शुल्क बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। लेकिन वैश्विक हालात तेजी से बदलने और आर्थिक दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने अचानक यह बड़ा कदम उठा लिया। 

भारत दुनिया में सोना खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है, जबकि चांदी की खपत में भी देश अग्रणी माना जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। ऐसे में जब भी सोने और चांदी का आयात बढ़ता है, तब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क बढ़ने के बाद अब घरेलू बाजार में सोना और चांदी और महंगे हो सकते हैं, जिससे आम लोगों की खरीद क्षमता प्रभावित होगी। बीते कुछ महीनों में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण लोगों का भरोसा फिर से सोने की ओर बढ़ा है। यही वजह है कि निवेश के रूप में भी सोने की मांग तेजी से बढ़ रही है। जानकारों का कहना है कि लोग जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीद रहे हैं।

बढ़ती कीमतों और आयात पर सरकार की सख्ती, बाजार में बढ़ी चिंता

विश्व स्वर्ण परिषद की हालिया रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मार्च तिमाही में भारत में स्वर्ण आधारित निवेश योजनाओं में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले वर्ष की तुलना में निवेश में लगभग 186 प्रतिशत की वृद्धि हुई और निवेश का स्तर रिकॉर्ड 20 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इससे साफ है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में लोग तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि सरकार को चिंता इस बात की है कि यदि सोने और चांदी का आयात लगातार बढ़ता रहा तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर और दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि पिछले कुछ सप्ताहों से सरकार लगातार सख्ती के संकेत दे रही थी। इससे पहले सोना और चांदी के आयात पर 3 प्रतिशत समेकित वस्तु एवं सेवा कर लगाए जाने के बाद कई बैंकों ने करीब एक महीने तक आयात रोक दिया था। 

इसका असर यह हुआ कि अप्रैल महीने में सोने का आयात लगभग 30 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। आभूषण कारोबार से जुड़े व्यापारी मानते हैं कि नए शुल्क का असर शादी-विवाह के मौसम पर भी पड़ सकता है। सोना पहले से ही आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा था और अब शुल्क बढ़ने के बाद कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। कई व्यापारिक संगठनों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी शुरू कर दी है। दूसरी ओर आर्थिक विशेषज्ञ सरकार के फैसले को जरूरी कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना होगा। 

यदि आयात पर नियंत्रण नहीं किया गया तो व्यापार घाटा और बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर रुपये और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। सरकार की कोशिश अब केवल आयात कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को भी बचत और संयम का संदेश देने की है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील और उसके बाद लिए गए फैसलों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में देश आर्थिक अनुशासन और संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में और कठोर कदम उठा सकता है। ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच भारत फिलहाल आर्थिक मोर्चे पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सोना और चांदी पर बढ़ाया गया शुल्क केवल कर संबंधी फैसला नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *