दुबई का रियल एस्टेट बाजार एक बार फिर भारतीय निवेशकों के लिए बड़े अवसरों का केंद्र बनता दिख रहा है। अमीरात सरकार की ओर से रेजीडेंसी वीजा से जुड़े नियमों में किए गए ताजा बदलाव ने खासकर भारतीय मध्यम वर्ग, युवा पेशेवरों और पहली बार विदेशी संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे निवेशकों के बीच नई उम्मीद जगा दी है। अब दुबई में छोटा स्टूडियो अपार्टमेंट खरीदने वाला निवेशक भी दो साल के रेजीडेंसी वीजा का पात्र बन सकेगा। दरअसल, दुबई लैंड डिपार्टमेंट (डीएलडी) ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म “क्यूब” पर निवेशक वीजा और रियल एस्टेट सेवाओं से जुड़ा एक अहम अपडेट जारी किया है। इसके तहत एकल खरीदारों के लिए पहले लागू 7,50,000 दिरहम की न्यूनतम प्रॉपर्टी मूल्य सीमा को समाप्त कर दिया गया है।
यानी अब कम कीमत की संपत्ति खरीदने वाले निवेशकों के लिए भी दुबई में रेजीडेंसी वीजा का रास्ता खुल गया है। इस बदलाव को दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में “गेम चेंजर” माना जा रहा है। खासकर भारत जैसे देशों के उन निवेशकों के लिए, जो लंबे समय से दुबई में घर खरीदने का सपना देखते थे लेकिन ऊंची निवेश सीमा के कारण पीछे हट जाते थे। अब जुमेराह विलेज सर्कल (जेवीसी), इंटरनेशनल सिटी, अर्जन और दुबई के दूसरे मिड-मार्केट इलाकों में स्टूडियो और एक बेडरूम अपार्टमेंट की मांग तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
दुबई का यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित और स्थिर विकल्प तलाश रहे हैं। दुबई पहले से ही टैक्स फ्रेंडली व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत किराया आय के कारण भारतीय निवेशकों की पसंद रहा है। अब वीजा नियम आसान होने से यह आकर्षण और बढ़ सकता है। दिलचस्प बात यह भी है कि एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर थे और अब दुबई से आई यह खबर भारतीय निवेशकों के लिए नए आर्थिक अवसर की तरह देखी जा रही है। भारत और यूएई के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी तेजी से मजबूत हुई है।
इसका असर अब रियल एस्टेट सेक्टर में भी साफ दिखाई दे रहा है। दुबई के रियल एस्टेट रणनीतिकार और प्रोएक्ट लग्जरी रियल एस्टेट के सीईओ रितु कांत ओझा के मुताबिक, पहले जेवीसी में 4,50,000 दिरहम का स्टूडियो खरीदने वाला निवेशक वीजा योजना के दायरे से बाहर रह जाता था। लेकिन अब वही प्रॉपर्टी खरीदकर निवेशक दो साल की रेजीडेंसी हासिल कर सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मध्यम आय वर्ग को मिलेगा, जो कम बजट में विदेश में निवेश और रेजीडेंसी दोनों का विकल्प चाहता है। भारतीय पहले ही दुबई के सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में दुबई के कुल रिहायशी प्रॉपर्टी सौदों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा बताता है कि दुबई का बाजार भारतीयों के लिए सिर्फ निवेश नहीं बल्कि सुरक्षित भविष्य और वैश्विक जीवनशैली का प्रतीक बन चुका है।
दुबई ने खोला ‘मिडिल क्लास इन्वेस्टमेंट मॉडल’, भारतीय खरीदारों के लिए बड़ा मौका
मौजूदा समय में दुबई की रणनीति केवल लक्जरी बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहती। अब फोकस मिडिल-इनकम निवेशकों को जोड़ने पर है। यही वजह है कि छोटे अपार्टमेंट, स्टूडियो यूनिट और किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को नई नीति से सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावना है। दुबई के कई डेवलपर्स पहले ही भारतीय बाजार पर विशेष फोकस कर रहे हैं। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में दुबई प्रॉपर्टी एक्सपो और निवेश सेमिनार लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। आसान भुगतान योजना, कम डाउन पेमेंट और रेजीडेंसी लाभ जैसे ऑफर भारतीय खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। आने वाले महीनों में जेवीसी, इंटरनेशनल सिटी और अर्जन जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में हल्की तेजी भी देखी जा सकती है, क्योंकि नई नीति के बाद मांग बढ़ने की पूरी संभावना है।
खासकर वे भारतीय परिवार जो बच्चों की पढ़ाई, बिजनेस विस्तार या अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर के लिए दुबई को विकल्प मान रहे हैं, वे अब छोटे निवेश से शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि केवल वीजा लाभ देखकर निवेश नहीं करना चाहिए। प्रॉपर्टी का स्थान, डेवलपर की विश्वसनीयता, किराया आय की स्थिरता और बाजार की दीर्घकालिक स्थिति को समझना जरूरी है। इसके बावजूद यह साफ है कि दुबई ने अपने रियल एस्टेट बाजार को अब केवल अरबपतियों का बाजार नहीं रहने दिया है। नई नीति ने मध्यम वर्गीय निवेशकों के लिए भी दरवाजे खोल दिए हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह बदलाव सिर्फ विदेश में घर खरीदने का मौका नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश और रेजीडेंसी के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

















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