भारत निर्वाचन आयोग ने लोकतंत्र को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस अभियान के तहत अब 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों को अपडेट किया जाएगा। आयोग का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का राष्ट्रीय अभियान है, जिसमें आम नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी। इस नए चरण के शुरू होने के साथ ही अब हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया लागू हो गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन तीन क्षेत्रों में मौसम की परिस्थितियों और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
चुनाव आयोग के अनुसार इस विशेष अभियान का मकसद हर पात्र नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र या दोहराव वाले नामों को हटाना है ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष बनी रहे। आयोग ने इस बार अभियान को ज्यादा व्यापक और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ जमीनी स्तर पर बड़ी प्रशासनिक तैयारी भी की है। लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए करीब 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। खास बात यह है कि राजनीतिक दलों के 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी इस प्रक्रिया में शामिल रहेंगे, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
चुनाव आयोग का मानना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ होती है। यदि सूची त्रुटिहीन होगी तो चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा। पिछले कुछ वर्षों में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी, डुप्लीकेट नाम और मृत मतदाताओं के नाम बने रहने जैसे मुद्दों पर कई राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में आयोग इस बार पूरी प्रक्रिया को अधिक सहभागी और निगरानी आधारित बना रहा है। आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर भरें और सत्यापन प्रक्रिया में पूरा सहयोग दें। अधिकारियों का कहना है कि यदि नागरिक स्वयं जागरूक होकर जानकारी अपडेट कराएंगे तो भविष्य में मतदान के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। आयोग इस अभियान को लोकतंत्र की सफाई और मजबूती का राष्ट्रीय कार्यक्रम मान रहा है।
घर-घर पहुंचेगी चुनाव आयोग की टीम, राजनीतिक दलों की भी रहेगी निगरानी
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का तीसरा चरण कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने इस बार पूरी रणनीति जनगणना की ‘हाउस लिस्टिंग’ प्रक्रिया को ध्यान में रखकर तैयार की है। दरअसल दोनों कार्यों के लिए लगभग एक जैसी फील्ड मशीनरी और प्रशासनिक ढांचे का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से आयोग ने दोनों अभियानों के बीच तालमेल बनाते हुए संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने का फैसला लिया है। इस अभियान में बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहने वाली है। ये अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे, नए मतदाताओं का पंजीकरण करेंगे और मृत, स्थानांतरित या दोहराव वाले नामों की पहचान करेंगे। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए यह प्रक्रिया बेहद जरूरी है। इससे फर्जी मतदान और चुनावी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। चुनाव आयोग ने इस बार राजनीतिक दलों की भागीदारी भी पहले से अधिक बढ़ाई है।
आयोग का मानना है कि यदि सभी दलों के प्रतिनिधि सत्यापन प्रक्रिया में मौजूद रहेंगे तो पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवाल काफी हद तक खत्म हो जाएंगे। यही वजह है कि लाखों बूथ लेवल एजेंटों को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। आयोग का दावा है कि सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों की संयुक्त निगरानी से मतदाता सूची ज्यादा विश्वसनीय बनेगी। इससे पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं की सूचियों का पुनरीक्षण किया जा चुका है। उस दौरान 6.3 लाख से अधिक बीएलओ और करीब 9.2 लाख राजनीतिक एजेंटों ने काम किया था। आयोग का कहना है कि पहले चरणों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तीसरे चरण को और ज्यादा व्यवस्थित बनाया गया है। राज्यों की अंतिम मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम भी तय कर दिया गया है।
उड़ीसा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर की अंतिम सूची 6 सितंबर 2026 को प्रकाशित होगी। इसके बाद हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों की सूचियां सितंबर और अक्टूबर में जारी की जाएंगी। सबसे अंत में त्रिपुरा की अंतिम मतदाता सूची 23 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि सही मतदाता सूची भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपने विवरण अपडेट कराने और अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है ताकि देश की चुनावी व्यवस्था और अधिक मजबूत बन सके।

















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