Advertisement

आखिरकार कांग्रेस ने केरल में नए चेहरे पर लगाई मुहर, वीडी सतीशन होंगे मुख्यमंत्री, 10 दिन की माथापच्ची के बाद खत्म हुआ सस्पेंस

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के दस दिन बाद आखिरकार कांग्रेस ने राज्य की सत्ता की कमान किसे सौंपी जाएगी, इस पर चल रहा लंबा सस्पेंस खत्म कर दिया। गुरुवार को पार्टी हाईकमान ने वरिष्ठ नेता और पारावूर से विधायक वीडी सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी। लंबे मंथन, कई दौर की बैठकों और गुटबाजी के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसे चेहरे को चुना है, जिसे संगठन और जनता के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। 61 वर्षीय वीडी सतीशन लंबे समय से केरल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्हें कांग्रेस का आक्रामक लेकिन संतुलित चेहरा माना जाता है। विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने कई मुद्दों पर वाम सरकार को घेरा था और यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी। 

कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी यह महसूस किया कि राज्य में पार्टी को नई ऊर्जा और मजबूत जनसंपर्क वाले नेतृत्व की जरूरत है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की चर्चा के बाद सतीशन के नाम पर सहमति बनी। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर काफी खींचतान चल रही थी। केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला भी इस दौड़ में मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। लेकिन अंततः संगठनात्मक पकड़, जनता में स्वीकार्यता और युवा नेतृत्व की छवि ने सतीशन को आगे कर दिया। वीडी सतीशन के नाम की घोषणा होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। कई जगहों पर समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और जश्न मनाया। 

खास बात यह रही कि केरल कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी के बीच भी सतीशन को एक ऐसे नेता के रूप में देखा गया, जो अलग-अलग धड़ों को साथ लेकर चल सकते हैं।मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद सतीशन ने बेहद भावुक अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पद उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। सतीशन ने केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और अन्य नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि सभी के अनुभव का लाभ सरकार और संगठन को मिलेगा। कांग्रेस ने इस फैसले के जरिए केरल में नई पीढ़ी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। 

पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आक्रामक और जमीन से जुड़े नेताओं को आगे लाने के लिए तैयार है। यही वजह रही कि लंबे इंतजार के बाद भी हाईकमान ने जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया। सतीशन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की अंदरूनी खींचतान को खत्म कर सरकार को स्थिर दिशा देना होगी। केरल कांग्रेस लंबे समय से गुटीय राजनीति से जूझती रही है और यही वजह है कि मुख्यमंत्री चयन में देरी हुई। हालांकि पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि सतीशन सभी गुटों को साथ लेकर चलेंगे और कांग्रेस को एकजुट बनाए रखेंगे।

वेणुगोपाल-चेन्निथला की दावेदारी के बीच सतीशन कैसे बने हाईकमान की पहली पसंद

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे ज्यादा चर्चा तीन नामों की थी। वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस विधायक दल के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हो गए थे। एक तरफ सतीशन समर्थक थे, जो उन्हें नई सोच और मजबूत विपक्षी चेहरा बताते थे, वहीं दूसरा धड़ा वेणुगोपाल और चेन्निथला के समर्थन में लामबंद था। केसी वेणुगोपाल को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ भी रही है। कई विधायकों का समर्थन भी उनके साथ बताया जा रहा था। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने अंततः सतीशन को प्राथमिकता दी। राजनीतिक हलकों में इसकी सबसे बड़ी वजह उनका जनाधार और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता मानी जा रही है। मुख्यमंत्री चयन को लेकर राज्य में माहौल इतना गर्म हो गया था कि समर्थकों ने पोस्टरबाजी तक शुरू कर दी थी। 

वायनाड समेत कई इलाकों में सतीशन के समर्थन में पोस्टर लगाए गए। कुछ पोस्टरों में यह तक लिखा गया कि अगर केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया गया तो पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इन पोस्टरों ने कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने का काम किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी। दोनों नेताओं ने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की राय जानने के बाद अंतिम निर्णय लिया। पार्टी यह नहीं चाहती थी कि मुख्यमंत्री चयन के बाद किसी तरह की नाराजगी खुलकर सामने आए। इसी वजह से अंतिम फैसले में काफी समय लगा। दिलचस्प बात यह रही कि फैसले के बाद केसी वेणुगोपाल ने भी पार्टी लाइन का समर्थन किया। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और अंतिम निर्णय हाईकमान का होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक सच्चे कांग्रेसी के तौर पर वे पार्टी के फैसले के साथ खड़े हैं। वेणुगोपाल ने विधायकों और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें जो समर्थन मिला, उसके लिए वे आभारी हैं। रमेश चेन्निथला ने भी सार्वजनिक तौर पर किसी तरह की नाराजगी जाहिर नहीं की। कांग्रेस नेतृत्व अब यह कोशिश करेगा कि सभी वरिष्ठ नेताओं को सरकार और संगठन में उचित भूमिका दी जाए, ताकि कोई गुट अलग-थलग महसूस न करे। वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही केरल कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हो गया है। पार्टी अब इस फैसले को आगामी राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देख रही है। 

कांग्रेस को उम्मीद है कि सतीशन के नेतृत्व में सरकार जनता के बीच मजबूत संदेश दे पाएगी और संगठन को नई दिशा मिलेगी। अब नजर इस बात पर होगी कि सतीशन अपनी पहली कैबिनेट में किन चेहरों को जगह देते हैं और किस तरह पार्टी के भीतर संतुलन बनाते हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की लड़ाई भले खत्म हो गई हो, लेकिन असली चुनौती अब सरकार चलाने और कांग्रेस को एकजुट रखने की होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *