सीबीएसई 12वीं परिणाम जारी : 85.20 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा में हुए सफल, अंकों में गिरावट, लेकिन बेटियों ने बढ़ाया गौरव

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार देशभर के लाखों विद्यार्थियों का इंतजार खत्म हुआ, लेकिन परिणाम ने कई मायनों में मिश्रित तस्वीर पेश की है। एक तरफ जहां कुल सफलता प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। बोर्ड के अनुसार इस वर्ष कुल 85.20 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा में सफल घोषित किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में यह आंकड़ा करीब 3 प्रतिशत कम रहा है। हालांकि, कम सफलता प्रतिशत के बावजूद मेधावी विद्यार्थियों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। करीब 94 हजार विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं, जबकि 17 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से ऊपर अंक प्राप्त कर विशेष उपलब्धि हासिल की है। 

इस बार 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 9 अप्रैल तक आयोजित की गई थीं। बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन प्रणाली का उपयोग किया, जिसके तहत कॉपियों की जांच डिजिटल माध्यम से की गई। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की गई। विद्यार्थी अपना परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। जिन छात्रों के पास इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है या वेबसाइट पर अधिक दबाव के कारण दिक्कत आ रही है, उनके लिए संदेश सेवा के जरिए भी अंक प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन प्राप्त अंकपत्र केवल अस्थायी होंगे। विद्यार्थियों को अपने विद्यालय से मूल अंकपत्र लेना अनिवार्य होगा। इस बार भी बोर्ड ने परंपरा के अनुसार किसी प्रकार की मेरिट सूची जारी नहीं की है। साथ ही किसी विद्यार्थी को राष्ट्रीय या जिला स्तर का टॉपर घोषित नहीं किया गया है। बोर्ड ने सभी विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी छात्र को आधिकारिक रूप से टॉपर घोषित करने से बचें। बोर्ड का मानना है कि इससे विद्यार्थियों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव बढ़ता है। परिणाम में सबसे अधिक चर्चा बेटियों के प्रदर्शन की रही। लड़कियों ने एक बार फिर लड़कों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। 

लड़कियों का सफलता प्रतिशत 88.86 रहा, जबकि लड़कों का परिणाम 82.23 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस तरह लड़कियां लड़कों से 6.73 प्रतिशत आगे रहीं। वहीं ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों का परिणाम शत-प्रतिशत रहा, जिसे सामाजिक बदलाव और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।क्षेत्रवार परिणामों की बात करें तो त्रिवेंद्रम क्षेत्र ने लगातार एक बार फिर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। यहां 95.62 प्रतिशत विद्यार्थी सफल रहे। वहीं प्रयागराज क्षेत्र का परिणाम सबसे कमजोर रहा, जहां केवल 72.43 प्रतिशत विद्यार्थी ही परीक्षा पास कर सके। खास बात यह रही कि पिछले वर्ष भी यही स्थिति देखने को मिली थी। सीबीएसई के नियमों के अनुसार विद्यार्थियों को परीक्षा पास करने के लिए प्रत्येक विषय में कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी है। यदि कोई छात्र किसी एक विषय में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाता है तो उसे उस विषय में अनुत्तीर्ण माना जाएगा।

कम अंकों वालों के लिए राहत, कंपार्टमेंट परीक्षा से बचेगा एक साल

बोर्ड ने उन विद्यार्थियों को भी राहत दी है जो किसी कारणवश सभी विषयों में सफल नहीं हो सके। यदि कोई छात्र केवल एक विषय में अनुत्तीर्ण हुआ है, तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों का पूरा साल खराब नहीं होगा और वे दोबारा उसी विषय की परीक्षा देकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। हालांकि जिन विद्यार्थियों के दो या उससे अधिक विषयों में कम अंक आए हैं, उन्हें अगली बार फिर से 12वीं की परीक्षा देनी होगी। बोर्ड जल्द ही कंपार्टमेंट परीक्षा की तारीखों की घोषणा करेगा। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि विद्यार्थी समय रहते तैयारी कर सकें। इस बार सफलता प्रतिशत में आई गिरावट कई कारणों से जुड़ी हो सकती है। 

परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव और पढ़ाई के स्तर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल प्रतिशत को सफलता का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। इस वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों द्वारा 90 और 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करना यह साबित करता है कि मेहनत और निरंतर अभ्यास से उत्कृष्ट प्रदर्शन संभव है। वहीं जिन छात्रों के अपेक्षा से कम अंक आए हैं, उनके लिए भी यह अंत नहीं बल्कि आगे बढ़ने का अवसर है। परिणाम के बाद विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की तुलना दूसरे छात्रों से न करें और उन्हें आगे की पढ़ाई तथा करियर को लेकर सकारात्मक माहौल दें। 

पिछले वर्षों की तुलना करें तो वर्ष 2025 में 88.39 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए थे, जो उससे पहले के वर्ष के मुकाबले थोड़ा अधिक था। लेकिन इस बार परिणाम में गिरावट दर्ज होने के बावजूद कई क्षेत्रों और वर्गों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन कर उम्मीद जगाई है। अब विद्यार्थियों की नजर आगे की पढ़ाई, प्रवेश परीक्षाओं और करियर विकल्पों पर रहेगी। कई छात्र उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों में आवेदन करेंगे, जबकि कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाएंगे। ऐसे में यह परिणाम उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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