अग्निवीरों के सम्मान में धामी सरकार का बड़ा फैसला उत्तराखंड में बनेगा देश का पहला “अग्निवीर सेल”

उत्तराखंड सरकार ने अग्निवीरों के सम्मान, पुनर्वास और उज्ज्वल भविष्य को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून के कुआंवाला स्थित यूथ फाउंडेशन ट्रेनिंग एरिया में आयोजित ‘युवा अग्निवीर संवाद’ कार्यक्रम में कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनेगा, जहां सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए विशेष ‘अग्निवीर सेल’ स्थापित किया जाएगा। यह सेल उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निवीरों के सम्मान और उनके सुरक्षित भविष्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है और सेना में सेवा देने वाले प्रत्येक युवा को सम्मानजनक भविष्य देना सरकार की प्राथमिकता है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग की होमस्टे योजना के तहत पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान दिया जाएगा। 

इसके अलावा सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार से जुड़ी अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने के लिए भी विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उनका कहना था कि सरकार चाहती है कि सेना से लौटने वाले युवा अपने अनुभव और अनुशासन के बल पर समाज और राज्य के विकास में नई भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि सैनिकों, शहीदों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। उन्होंने बताया कि शहीद परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजन की व्यवस्था की गई है। साथ ही सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है, ताकि परिवारों को पर्याप्त अवसर मिल सके। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। युद्ध विधवाओं, दिव्यांग सैनिकों तथा पूर्व सैनिकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था राज्य सरकार ने सुनिश्चित की है। अग्निवीरों से सीधे संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निवीर बनना केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च अवसर है। 

सेना में बिताए गए चार वर्ष युवाओं के पूरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बनते हैं। इसी अनुभव, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था भी कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य की सरकारी सेवाओं में भी विशेष अवसर दिए जाएंगे। पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न विभागों में भर्ती के दौरान उन्हें 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही अधिकतम आयु सीमा में छूट और भर्ती प्रक्रियाओं में आवश्यक प्राथमिकता भी सुनिश्चित की गई है। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सेना में सेवा देने वाला कोई भी युवा भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस न करे। मुख्यमंत्री धामी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं एक सैनिक के बेटे हैं। उन्होंने बचपन से सैनिकों का अनुशासन, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण देखा है। अपने पिता से मिले संस्कारों ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में सेवा और अनुशासन का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के बीच पहुंचकर उन्हें हमेशा अपने परिवार जैसा अपनापन महसूस होता है और यही भावना उन्हें सैनिकों तथा अग्निवीरों के हित में लगातार निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है।

पारदर्शी भर्ती, युवा सशक्तिकरण और विकास के संकल्प को दोहराया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास और सुशासन की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था और राज्य सरकार उसी संकल्प को साकार करने में जुटी है। वर्ष 2022 में जनता ने विकास और सुशासन के पक्ष में अपना विश्वास जताया, जिसके बाद डबल इंजन की सरकार तेज गति से विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती घोटालों को गंभीरता से लेते हुए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया, जिसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस कानून के तहत 100 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा गया। इसका परिणाम यह रहा कि उत्तराखंड में पूरी पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड स्तर पर सरकारी भर्तियां हुईं और पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली। 

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पात्र और मेहनती युवाओं को निष्पक्ष अवसर देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई। इसके अलावा राज्य में मदरसा बोर्ड को भी समाप्त किया गया है, जिससे सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित हुए हैं। उनका कहना था कि हर बच्चे को शिक्षा और आगे बढ़ने का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने राज्य में कृषि, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए कीवी, सेब और तिमरू मिशन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उत्तराखंड ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की राष्ट्रीय रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य को फिल्म फ्रेंडली स्टेट का सम्मान भी मिल चुका है और निर्यात सूचकांक में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि अब राज्य के युवा अपने गांव और घर में रहकर ही स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि चारधाम यात्रा, आदि कैलाश यात्रा और शीतकालीन यात्रा जैसी धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के कारण पिछले चार वर्षों में 24 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखंड पहुंचे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है। कार्यक्रम में विधायक बृजभूषण गैरोला, यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कौठियाल (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत (सेवानिवृत्त), जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, अग्निवीर, युवा और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के अंत में अग्निवीरों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और भविष्य को मजबूत बनाने के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *