बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब सत्ता के विस्तार का सबसे बड़ा दिन आ गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ लेने के 22 दिन बाद आज उनकी कैबिनेट का बहुप्रतीक्षित विस्तार होने जा रहा है। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित होने वाले इस मेगा समारोह में 31 नए मंत्री शपथ लेंगे। इस कार्यक्रम को बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के तमाम बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे।
कैबिनेट विस्तार को लेकर राजधानी पटना में देर रात तक राजनीतिक हलचल तेज रही।
मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी और कौन बाहर रह जाएगा, इसे लेकर सत्ता के गलियारों में लगातार बैठकों का दौर चलता रहा। सूत्रों के मुताबिक एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीट और विभागों के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बनने के बाद मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दिया गया। नई कैबिनेट में भाजपा और जदयू के बीच संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। तय फॉर्मूले के अनुसार भाजपा से 14, जदयू से 13, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से 2 तथा हम और आरएलएम से एक-एक मंत्री शपथ लेंगे। हालांकि देर रात चली बैठकों में संख्या को लेकर कुछ फेरबदल की चर्चा भी रही, जिसमें भाजपा के 13 और जदयू के 11 मंत्रियों के नाम पर सहमति बनने की बात सामने आई। अंतिम सूची समारोह के ठीक पहले सार्वजनिक होने की संभावना है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले संभावित मंत्रियों को फोन किए जाने का सिलसिला भी तेज हो गया। जदयू की ओर से जिन नेताओं को मंत्री बनने के संकेत मिले हैं, उनमें निशांत कुमार, भगवान सिंह, बुलो मंडल, श्वेता गुप्ता, शीला मंडल, दामोदर रावत और श्रवण कुमार प्रमुख बताए जा रहे हैं।
वहीं भाजपा खेमे से दिलीप जायसवाल, विजय कुमार सिन्हा, प्रमोद चंद्रवंशी, लखेन्द्र पासवान, संजय टाइगर, रमा निषाद, नीतीश मिश्रा, केदार गुप्ता, मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र प्रसाद, नंद किशोर राम और राम कृपाल यादव के नाम चर्चा में हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं को लेकर है जिन्हें अब तक फोन नहीं आया है। मंत्री पद की दौड़ में आगे माने जा रहे वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय और पिछली सरकार में मंत्री रहीं श्रेयसी सिंह अब तक इंतजार में हैं। अंतिम क्षणों में समीकरण बदल सकते हैं और कुछ चौंकाने वाले नाम भी सामने आ सकते हैं।कैबिनेट विस्तार को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि 2029 की राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। भाजपा और जदयू दोनों जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने में जुटे हैं। पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और सवर्ण वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि आगामी चुनावों से पहले NDA का सामाजिक समीकरण मजबूत हो सके।
पटना में शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे रोड शो
शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो इस पूरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री पटना एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक करीब 8 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। इस दौरान राजधानी की सड़कों पर भव्य स्वागत की तैयारी की गई है। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री का काफिला एयरपोर्ट से निकलकर हार्डिंग रोड, भाजपा मुख्यालय, इनकम टैक्स गोलंबर, डाक बंगला चौराहा और जेपी गोलंबर होते हुए गांधी मैदान पहुंचेगा। रास्ते में 16 अलग-अलग स्थानों पर उनका स्वागत किया जाएगा। जगह-जगह मंच बनाए गए हैं, जहां पार्टी कार्यकर्ता फूल बरसाकर प्रधानमंत्री का अभिनंदन करेंगे।
कार्यक्रम को देखते हुए पटना में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। गांधी मैदान और आसपास के इलाकों को हाई सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया है। हजारों पुलिसकर्मियों के अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई है। ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है और कई इलाकों में ट्रैफिक रूट डायवर्ट किए गए हैं। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देर रात पटना पहुंचे और उन्होंने एनडीए नेताओं के साथ लंबी बैठक की। बैठक में जदयू नेता ललन सिंह, संजय झा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसी बैठक में मंत्रियों के नाम और विभागों को लेकर अंतिम सहमति बनी।
अमित शाह की मौजूदगी ने यह साफ संकेत दिया कि भाजपा इस कैबिनेट विस्तार को राजनीतिक रूप से बेहद अहम मान रही है। शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्रियों के अलावा NDA के प्रमुख सहयोगी दलों के नेता भी मौजूद रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री और हम प्रमुख जीतन राम मांझी, लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा समेत कई बड़े नेता गांधी मैदान पहुंचेंगे। इस कार्यक्रम को NDA की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। सम्राट चौधरी सरकार का यह पहला बड़ा विस्तार आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। नई कैबिनेट के जरिए भाजपा और उसके सहयोगी दल बिहार में मजबूत राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर किन चेहरों को सत्ता में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है और कौन नेता अंतिम समय में बाजी मार लेता है।

















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