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चक्रवात अर्नब का कई राज्यों में असर, आंध्र प्रदेश में 5 की मौत, दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में बारिश जारी 

बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्नब ने पूर्वी भारत में भारी तबाही मचाने के बाद अब उत्तर भारत के मौसम को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आंध्र प्रदेश में तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि ओडिशा के 17 जिले प्रभावित हुए हैं। तेज हवाओं ने पेड़ों और बिजली के खंभों को उखाड़ दिया, खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया और रेल तथा हवाई यातायात को बाधित कर दिया। हालांकि, चक्रवात की ताकत लगातार कम हो रही है, लेकिन इससे पैदा हुई नमी और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, गुरुवार 29 अक्टूबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की संभावना है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में चक्रवात का असर केवल समुद्र तटीय राज्यों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तर भारत के मौसम पर भी इसकी अप्रत्यक्ष भूमिका दिखाई दे रही है। हालांकि, हर राज्य में बारिश की तीव्रता और समय अलग-अलग हो सकता है।

चक्रवात अर्नब का सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिला। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पांच लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। शुरुआती आकलन के अनुसार, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश से राज्य के कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। विशाखापत्तनम, विजयनगरम, अनाकापल्ली, कोनासीमा और गोदावरी क्षेत्र के जिलों में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। कोनासीमा जिले में बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में राहत और बहाली का काम शुरू किया गया है।

तूफान के कारण कृषि क्षेत्र पर भी बड़ा असर पड़ा है। खेतों में पानी भरने और तेज हवाओं के चलते धान समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचा है। शुरुआती सरकारी आकलन में राज्य के 14 जिलों में लगभग 2.24 लाख हेक्टेयर कृषि और बागवानी क्षेत्र प्रभावित होने की बात सामने आई है। इससे किसानों की आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है। नुकसान का वास्तविक आकलन होने के बाद राहत सहायता की जरूरत और बढ़ सकती है।

तूफान के आने से पहले तटीय इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान चलाया गया था। आपदा प्रबंधन दलों और प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया। बिजली के तारों और खंभों के गिरने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए भी सावधानी बरती जा रही है। प्रशासन के सामने अब बिजली, सड़क और अन्य आवश्यक सेवाओं को जल्द बहाल करने की चुनौती है।

ओडिशा के 17 जिले प्रभावित, रेल और हवाई सेवाओं पर असर

आंध्र प्रदेश के पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी चक्रवात के प्रभाव से व्यापक बारिश हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के 17 जिलों के प्रभावित होने की जानकारी दी है। दक्षिणी ओडिशा के गजपति, गंजाम, कोरापुट और रायगड़ा समेत कई क्षेत्रों में तेज बारिश और हवाओं के कारण पेड़ गिरने तथा बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर नजर रखने और नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। राहत दलों को रास्तों से गिरे पेड़ों को हटाने और जरूरी सेवाएं बहाल करने के काम में लगाया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सामान्य जनजीवन बहाल करना है। चक्रवात और भारी बारिश का असर रेल तथा हवाई यातायात पर भी पड़ा। विभिन्न सेवाओं से जुड़ी खबरों के अनुसार, 50 से अधिक ट्रेनें और 20 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन या उड़ान की स्थिति की जानकारी जरूर लें। मौसम में सुधार के साथ परिवहन सेवाओं को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।

मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्नब तटीय क्षेत्र से आगे बढ़ने के बाद कमजोर होकर गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो गया है। इसके गुरुवार को और कमजोर होकर निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने का अनुमान है। इसके बावजूद कुछ राज्यों में भारी बारिश का खतरा तत्काल खत्म नहीं हुआ है। मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल में कैसा रहेगा मौसम?

चक्रवात के कमजोर पड़ने के बावजूद उससे जुड़ी नमी और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत में मौसम बदलने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 29 और 30 अक्टूबर को बादल छाए रहने, बारिश और गरज-चमक की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में गुरुवार को हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। उत्तर प्रदेश में पूर्वी हिस्सों में बारिश की संभावना अधिक बताई गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी 29 से 31 अक्टूबर के बीच मौसम बदल सकता है। कहीं-कहीं तेज बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। किसानों और यात्रियों को स्थानीय मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी मौसम में बदलाव की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन, दृश्यता में कमी और यात्रा में परेशानी हो सकती है। हालांकि, दोनों राज्यों के सभी जिलों में भारी बारिश की एक समान चेतावनी नहीं है। लोगों को अपने जिले के लिए जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा जताया गया है। ओडिशा में भी कुछ जिलों के लिए सतर्कता बरतने की जरूरत है।

मौसम में इस बदलाव का असर खेती, सड़क यातायात और दैनिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। तेज हवाओं के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। जलभराव वाले रास्तों और टूटे बिजली के तारों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर नजर रख रही हैं।

चक्रवात अर्नब की तीव्रता कम होने से तटीय क्षेत्रों में तत्काल खतरा घटने की उम्मीद है, लेकिन बारिश का प्रभाव अभी बना रह सकता है। आंध्र प्रदेश में नुकसान के बाद राहत और बहाली का काम महत्वपूर्ण है, जबकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश समेत उत्तर भारत के लोगों को अगले कुछ दिनों के मौसम पर नजर रखनी होगी। मौसम विभाग की जिला-स्तरीय चेतावनियों और प्रशासन की सलाह का पालन करना ही इस दौरान सबसे सुरक्षित कदम होगा।

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