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करवा चौथ आज: पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, रात को चंद्र दर्शन के बाद खुलेगा उपवास

करवा चौथ का पर्व आज देशभर में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रख रही हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद महिलाएं शाम को विधि-विधान से करवा चौथ की पूजा करेंगी और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलेंगी। इस पर्व को लेकर घरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधानों, सोलह शृंगार और पूजा की तैयारियों में जुटी हैं। बाजारों में भी पर्व की रौनक देखने को मिल रही है। करवा चौथ केवल उपवास और पूजा का त्योहार नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और आपसी सहयोग का प्रतीक भी है। समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भी बदल रहा है। अब कई परिवारों में पति भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं और इस परंपरा को आपसी साझेदारी तथा समानता के भाव से जोड़कर देखते हैं। उत्तर भारत में इस पर्व का विशेष महत्व है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों में महिलाएं पूरे उत्साह के साथ करवा चौथ मनाती हैं।

करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक चलता है। परंपरागत रूप से व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर अन्न और जल ग्रहण नहीं करतीं। सुबह सरगी खाने के बाद उपवास शुरू किया जाता है। सरगी में परिवार की बुजुर्ग महिलाएं अपनी बहुओं को फल, मिठाई, मेवे और अन्य खाद्य सामग्री देती हैं। हालांकि, सरगी की परंपरा और उसकी तैयारियां अलग-अलग परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा के लिए करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री रखी जाती है। 

कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देती हैं। इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना की जाती है। करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं के लिए पारंपरिक वेशभूषा और शृंगार का भी खास महत्व है। लाल, गुलाबी और अन्य शुभ रंगों के परिधान पहनने के साथ महिलाएं मेहंदी लगाती हैं और चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर सहित सोलह शृंगार करती हैं। नवविवाहित महिलाओं के लिए यह पर्व विशेष उत्साह लेकर आता है। कई परिवारों में पहली बार करवा चौथ मनाने वाली बहुओं के लिए विशेष आयोजन किए जाते हैं। वहीं, लंबे समय से यह व्रत रखने वाली महिलाएं भी हर वर्ष इस दिन का इंतजार करती हैं।

शाम की पूजा और चंद्र दर्शन के बाद खुलेगा व्रत

करवा चौथ की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रमा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से महिलाएं वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना करते हुए पूजा-अर्चना करती हैं। पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनने की परंपरा भी प्रचलित है। कथा के बाद महिलाएं चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माने जाते हैं। चांद निकलने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। कई परिवारों में पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर और मिठाई खिलाकर उपवास खुलवाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य साथ बैठकर भोजन करते हैं।

करवा चौथ की तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है। हालांकि, चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में पूजा और व्रत खोलने के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को देखना उपयोगी रहता है। मौसम और बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई देने में भी देरी हो सकती है।

इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं। इनमें वीरवती की कथा प्रमुख रूप से सुनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वीरवती ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा था। कथा में छल से चंद्रमा का दर्शन कर व्रत खोलने और बाद में कठिन परिस्थितियों का सामना करने का प्रसंग आता है। इसके बाद सच्ची श्रद्धा और तप के माध्यम से पति के जीवन की रक्षा होने की मान्यता बताई जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में करवा चौथ से जुड़ी कथाओं और परंपराओं के अलग-अलग रूप भी मिलते हैं।

बदलते समय में करवा चौथ का सामाजिक अर्थ भी व्यापक हुआ है। पहले जहां यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं के उपवास और पूजा से जुड़ा माना जाता था, वहीं अब कई दंपती इसे एक-दूसरे के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी व्यक्त करने के अवसर के रूप में मनाते हैं। कुछ पति भी पत्नी के साथ उपवास रखते हैं, जबकि कई परिवार स्वास्थ्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए परंपराओं का पालन अपने तरीके से करते हैं।

करवा चौथ का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह दांपत्य जीवन में विश्वास, सम्मान, संवाद और एक-दूसरे का साथ निभाने की भावना को भी सामने लाता है। आज के दिन महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली की कामना के साथ पूजा-अर्चना कर रही हैं। शाम की पूजा के बाद सभी की निगाहें चंद्रमा के दीदार पर रहेंगी। चांद निकलने के साथ ही व्रत खोलने की परंपरा पूरी होगी और घर-परिवार में पर्व की खुशियां साझा की जाएंगी।

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