संसद का मानसून सत्र आज, सोमवार से शुरू हो गया है । 25 दिनों तक चलने वाला यह सत्र 13 अगस्त तक जारी रहेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने और अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाकर सदन में उतरा है। ऐसे में इस बार का मानसून सत्र केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम मुद्दों पर तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है। सत्र शुरू होने से पहले रविवार को संसद भवन परिसर में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें 40 राजनीतिक दलों के 50 से अधिक नेताओं ने भाग लिया। सरकार ने सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने, महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा करने और संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष से भी सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा रखती है। दूसरी ओर विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दिए कि वह जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सभी दलों से संसदीय परंपराओं का पालन करने और स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद को प्राथमिकता देने की अपील की। बैठक में सरकार और विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने इस सत्र के विधायी कार्यक्रम, प्रस्तावित कार्यों और चर्चा के विषयों पर अपने विचार साझा किए। अध्यक्ष ने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां होने वाली चर्चा का सीधा प्रभाव देश की जनता पर पड़ता है, इसलिए सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें।
संसद परिसर के बाहर भी राजनीतिक हलचल तेज रही। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोज जनता पार्टी के समर्थकों ने संसद मार्च की घोषणा की है। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने कार्यक्रम पर अड़े हुए हैं। इसे देखते हुए जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। सत्र के पहले दिन से ही जिस तरह राजनीतिक माहौल गर्म है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी गतिविधियां तेज रहेंगी। अब देश की नजर इस बात पर होगी कि सरकार और विपक्ष टकराव की राजनीति से आगे बढ़कर जनहित के मुद्दों पर कितनी सार्थक चर्चा कर पाते हैं और संसद से कितने महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो पाते हैं।
सरकार का फोकस नए विधेयकों पर, विपक्ष उठाएगा कई बड़े मुद्दे
सरकार ने इस मानसून सत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों की रूपरेखा तैयार की है। इनमें सबसे प्रमुख जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इस विधेयक के माध्यम से वर्ष 1969 के मूल कानून की धारा 13(3) में संशोधन कर विलंब से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और सख्त बनाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे रिकॉर्ड प्रणाली और नागरिक सेवाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी। दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इसके तहत वर्ष 1971 के अधिनियम में संशोधन कर राष्ट्रीय ध्वज, संविधान, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े मामलों में दंडात्मक प्रावधानों को और कठोर बनाने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपमान को गंभीरता से लिया जाएगा।
तीसरा प्रमुख विधेयक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार करना आसान बनाना, भरोसा आधारित नियामक व्यवस्था विकसित करना, छोटे उद्योगों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना तथा राज्यों को अधिक अधिकार देना है। सरकार का दावा है कि इससे देश के करोड़ों छोटे उद्यमियों और रोजगार सृजन को मजबूती मिलेगी। उधर विपक्ष ने मानसून सत्र के दौरान सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने कहा है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके अलावा नीट पेपर लीक, इथेनॉल मिश्रण नीति, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई, सोनम वांगचुक के आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
विपक्ष का कहना है कि जिन विषयों का सीधा संबंध आम जनता से है, उन पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि वह सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को भी सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय बहस में भाग लेना चाहिए। इस बार का मानसून सत्र बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। एक ओर सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी, तो दूसरी ओर विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की कोशिश करेगा। ऐसे में सदन के भीतर तीखी बहस, विरोध और कई अहम फैसले देखने को मिल सकते हैं।

















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