विश्व फुटबॉल का नया बादशाह : 120 मिनट की जंग के बाद स्पेन विश्व विजेता, अर्जेंटीना का सपना टूटा, हार से मैसी मायूस 

रविवार रात पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका के न्यूजर्सी स्टेडियम पर टिकी थीं। मैदान में विश्व फुटबॉल की दो सबसे बड़ी ताकतें स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने थीं, जबकि करोड़ों प्रशंसक टेलीविजन और डिजिटल मंचों पर सांसें थामे इस ऐतिहासिक फाइनल का इंतजार कर रहे थे। हर किसी को उम्मीद थी कि लियोनेल मेसी एक और जादुई रात लिखेंगे या फिर युवा स्पेन अपनी नई पीढ़ी के दम पर इतिहास रचेगा। लगभग दो घंटे तक चले इस रोमांचक संघर्ष में दोनों टीमों ने अपना सब कुछ झोंक दिया, लेकिन फैसला सामान्य समय में नहीं हो सका। आखिरकार अतिरिक्त समय के 106वें मिनट में फेरान टोरेस ने वह गोल दागा, जिसने स्पेन को विश्व विजेता बना दिया। स्पेन ने 1-0 से जीत दर्ज करते हुए न सिर्फ विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की, बल्कि अर्जेंटीना से छह दशक पुरानी हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। वहीं इस हार के साथ लियोनेल मेसी का लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना भी टूट गया।

मैच की शुरुआत से ही स्पेन ने अपनी पहचान के अनुरूप गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। शुरुआती दस मिनट में अधिकांश समय गेंद स्पेन के खिलाड़ियों के पैरों में रही, लेकिन अर्जेंटीना का मजबूत रक्षा तंत्र किसी भी कीमत पर शुरुआती बढ़त देने को तैयार नहीं था। लामिने यमाल ने शुरुआती मिनटों में गोल पर निशाना साधा, मगर अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने बिना किसी परेशानी के गेंद को रोक लिया। इसके बाद अर्जेंटीना ने धीरे-धीरे मुकाबले में वापसी की और अपने आक्रामक तथा शारीरिक खेल से स्पेन की लय बिगाड़ दी। मिडफील्ड में लगातार संघर्ष देखने को मिला। स्पेन अपनी सामान्य पासिंग फुटबॉल नहीं खेल पा रहा था, जबकि अर्जेंटीना हर मौके पर खेल की गति तोड़ने और दबाव बनाने में सफल रही। मुकाबला जितना तकनीकी था, उतना ही शारीरिक भी बन चुका था।

पहले हाफ का सबसे बड़ा झटका 44वें मिनट में अर्जेंटीना को लगा, जब डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए। उनकी जगह अनुभवी निकोलस ओटामेंडी को उतारा गया। इससे पहले 41वें मिनट में मार्टिनेज को ओयारजाबल पर फाउल करने के कारण मैच का पहला पीला कार्ड भी मिला था। पहले हाफ में स्पेन के पास लगभग 63 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रहा, लेकिन वह इसे गोल में नहीं बदल सकी। दूसरी ओर अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी पूरे पहले हाफ में प्रभाव छोड़ने में असफल रहे। स्पेनिश डिफेंडरों ने उन्हें लगातार घेरे रखा और उनके लिए गोल के मौके लगभग खत्म कर दिए। मैक एलिस्टर की फ्री-किक भी कोई कमाल नहीं दिखा सकी। पहले 45 मिनट बिना किसी गोल के समाप्त हुए, लेकिन मुकाबले का रोमांच लगातार बढ़ता रहा।

अतिरिक्त समय में चमका टोरेस, स्पेन ने रचा इतिहास

दूसरे हाफ की शुरुआत अर्जेंटीना ने बदलाव के साथ की। निको गोंजालेज की जगह लिएंड्रो पेरेडेस मैदान पर आए ताकि मिडफील्ड को और मजबूती मिल सके। हालांकि 50वें मिनट में दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके बाद रेफरी ने पेरेडेस को पीला कार्ड दिखाया। स्पेन ने भी समय रहते अपने दांव खेले। मिकेल ओयारजाबल और फैबियन रुइज की जगह फेरान टोरेस तथा पेड्री को मैदान पर उतारा गया। यही बदलाव आगे चलकर मैच का सबसे बड़ा फैसला साबित हुआ। फेरान टोरेस ने मैदान पर उतरते ही स्पेन के हमलों में नई ऊर्जा भर दी और अर्जेंटीना की रक्षा पंक्ति पर लगातार दबाव बनाया।

नियमित समय के अंतिम मिनटों में दोनों टीमों ने जीत के लिए भरपूर प्रयास किए, लेकिन कोई भी गोल नहीं कर सका। 90वें मिनट में अर्जेंटीना की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब एंजो फर्नांडीज ने पाउ कुबारसी पर फाउल किया। यह उनका दूसरा पीला कार्ड था और उन्हें रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया। इंजरी टाइम में अर्जेंटीना केवल दस खिलाड़ियों के साथ खेल रही थी।

अतिरिक्त समय में स्पेन ने पूरी ताकत झोंक दी। एक मौके पर निको विलियम्स ने गेंद खाली गोलपोस्ट में पहुंचा भी दी, लेकिन रेफरी ने पहले हुए फाउल के कारण गोल को मान्यता नहीं दी। इससे स्पेन के खिलाड़ियों और समर्थकों को कुछ पल के लिए निराशा जरूर हुई, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार 106वें मिनट में वह पल आया जिसका पूरी स्पेन को इंतजार था। शानदार आक्रमण के बाद फेरान टोरेस ने सटीक शॉट लगाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 

यह उनके विश्व कप करियर का तीसरा गोल था और स्पेन की 20वीं कोशिश आखिरकार सफल रही। स्टेडियम में मौजूद स्पेनिश समर्थक खुशी से झूम उठे, जबकि अर्जेंटीना के खेमे में सन्नाटा छा गया। 113वें मिनट में फेरान टोरेस ने एक बार फिर गेंद को गोल में पहुंचाया, लेकिन इस बार लाइंसमैन ने ऑफसाइड का झंडा उठा दिया और दूसरा गोल रद्द कर दिया। इसके बावजूद स्पेन ने आखिरी मिनटों तक शानदार अनुशासन के साथ अपनी बढ़त बचाए रखी। अंतिम सीटी बजते ही स्पेन के खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाने लगे और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के चेहरे मायूसी से भर गए। इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व फुटबॉल में अपना दबदबा एक बार फिर साबित किया। टीम ने अर्जेंटीना से 60 साल पहले मिली फाइनल की हार का बदला भी पूरा कर लिया। दूसरी ओर लियोनेल मेसी के लिए यह रात बेहद भावुक रही। लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया। न्यूजर्सी की यह रात फुटबॉल इतिहास में फेरान टोरेस के निर्णायक गोल, स्पेन की धैर्यपूर्ण रणनीति और अर्जेंटीना की अधूरी उम्मीदों के नाम हमेशा याद रखी जाएगी।

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