‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर देशभर में राष्ट्रवाद और सैन्य गौरव का माहौल देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल तस्वीर बदलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोगो लगा लिया। इस कदम को आतंकवाद के खिलाफ भारत की कठोर नीति और सेना के पराक्रम को सम्मान देने के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रोफाइल फोटो बदलकर इसकी शुरुआत की। इसके साथ उन्होंने एक भावुक संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी, सटीक रणनीति और अदम्य साहस की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक साल पहले भारतीय सेनाओं ने जिस तरह आतंकवाद को जवाब दिया, वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का निर्णायक क्षण बन गया। उन्होंने लिखा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्पष्ट और कठोर चेतावनी थी। इस अभियान ने दिखाया कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का जवाब देने में हिचकिचाएगा नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज उन वीर जवानों के साहस को नमन कर रहा है जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए असाधारण शौर्य का प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल समेत कई केंद्रीय नेताओं ने भी अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोगो लगाया।
इसके साथ ही भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस अभियान की वर्षगांठ को विशेष तरीके से मनाया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आदि ने अपनी प्रोफाइल तस्वीर बदलकर सेना के सम्मान में एकजुटता दिखाई। यह केवल डिजिटल अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सरकार के सख्त रुख का सार्वजनिक संदेश भी है। सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े पोस्ट और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और बड़ी संख्या में लोग भी अपनी डीपी बदलकर इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन सिंदूर’
दरअसल, भारत ने 6 और 7 मई की दरमियानी रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। यह सैन्य अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था। 22 अप्रैल को हुए उस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और देशभर में गुस्से की लहर फैल गई थी। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी। इसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए थे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और खुफिया एजेंसियों ने अभूतपूर्व तालमेल का प्रदर्शन किया। अभियान का लक्ष्य केवल आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था और इसे बेहद सटीक रणनीति के साथ अंजाम दिया गया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी साफ संदेश दिया कि वह आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इस अभियान ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने रखा। स्वदेशी तकनीक, आधुनिक हथियार प्रणाली और सेनाओं के बेहतर समन्वय ने इस मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की सैन्य नीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर आतंकवाद के खिलाफ सीधे और निर्णायक कदम उठाएगा। एक साल बाद भी इस अभियान की चर्चा इसलिए बनी हुई है क्योंकि इसे भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति के सबसे प्रभावशाली अभियानों में गिना जा रहा है। यही वजह है कि इसकी पहली वर्षगांठ पर सरकार और भाजपा नेतृत्व ने इसे केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है।

















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