पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया है। सोमवार को घोषित नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की रही, जहां भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार सत्ता हासिल करते हुए इतिहास रच दिया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी शिकस्त देते हुए भाजपा ने महज दस वर्षों में 3 सीटों से 206 सीटों तक का सफर तय किया, जो भारतीय चुनावी इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। बंगाल में यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत भी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं चुनाव हार गईं, जो राज्य की राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके साथ ही कैबिनेट के 12 वरिष्ठ मंत्री भी अपनी सीटें नहीं बचा सके। इनमें शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा और मोलय घटक जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं।
यह हार TMC के लिए गहरे आत्ममंथन का कारण बन सकती है। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे मजबूत संगठन, रणनीतिक योजना और जमीनी स्तर पर व्यापक संपर्क अभियान को अहम माना जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान करीब 15 दिनों तक बंगाल में रहकर चुनावी कमान संभाली। इस दौरान पार्टी ने पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ रणनीति को व्यापक स्तर पर लागू किया। राज्य के 44,000 से अधिक मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ और ‘कमजोर’ श्रेणियों में विभाजित किया गया। हर पन्ना प्रमुख को 30 से 60 मतदाताओं की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे बूथ स्तर तक सीधा संपर्क और मतदान सुनिश्चित किया जा सका। TMC की ओर से चलाई जा रही ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं भी चुनावी चर्चा का केंद्र रहीं। इस योजना के तहत महिलाओं को 1000 से 1200 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही थी, जिससे महिला वोटरों में इसका खासा प्रभाव था।
इसके जवाब में भाजपा ने सभी वर्गों के लिए 3000 रुपये तक की सहायता योजना का वादा किया। साथ ही पार्टी नेताओं ने यह भरोसा दिलाया कि मौजूदा योजनाओं को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें और विस्तार दिया जाएगा। भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में अहम रहा। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने रोजगार, महिला सुरक्षा, अवैध घुसपैठ पर सख्ती और पलायन रोकने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। नतीजों के बाद सोमवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे और अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपने 47 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा, “गंगोत्री से गंगासागर तक कमल ही कमल खिला है,” जो कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
असम-पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सत्ता में वापसी की, तमिलनाडु में बड़ा उलटफेर
पश्चिम बंगाल के अलावा असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों ने भी देश की राजनीति में नए समीकरण बनाए हैं। असम और पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सत्ता में वापसी करते हुए अपनी पकड़ बरकरार रखी है, जो भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता मानी जा रही है।तमिलनाडु में इस बार सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। अभिनेता थलपति विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं। 59 वर्षों में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि राज्य में न तो DMK और न ही AIADMK सत्ता में होगी। यह बदलाव तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जो राज्य की राजनीति के लिए बड़ा झटका है। केरल में भी मतदाताओं ने सत्ता परिवर्तन का संकेत दिया है। यहां की जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया, जिससे नई सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ है। वहीं पुडुचेरी में NDA की वापसी ने दक्षिण भारत में भाजपा की उपस्थिति को और मजबूत किया है। इन चुनाव नतीजों से यह स्पष्ट है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता अब पारंपरिक राजनीति से हटकर नए विकल्पों को अपनाने के लिए तैयार हैं। बंगाल में भाजपा का उभार, तमिलनाडु में नई राजनीतिक ताकत का उदय और असम-पुडुचेरी में NDA की वापसी यह दर्शाती है कि भारतीय राजनीति तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

















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