इंडिगो ने मई महीने के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीट क्षमता में 17 प्रतिशत कटौती की 

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे तौर पर विमानन क्षेत्र पर दिखने लगा है। भारत की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो ने मई महीने के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीट क्षमता में फरवरी के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत तक की कटौती करने का फैसला लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण हवाई मार्गों पर लगातार व्यवधान आ रहे हैं और उड़ानों के संचालन पर असर पड़ रहा है। वैश्विक विमानन परामर्श फर्म OAG के ताजा आंकड़ों और विश्लेषण से पता चलता है कि खाड़ी देशों के बाहर संचालित होने वाली विमानन कंपनियों में इंडिगो सबसे अधिक प्रभावित कंपनियों में शामिल है। 

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों में बदलाव, सुरक्षा चिंताओं और परिचालन बाधाओं के कारण कई एयरलाइंस को अपने नेटवर्क में बदलाव करना पड़ा है, जिसका सीधा असर सीट क्षमता पर पड़ा है। पश्चिम एशिया क्षेत्र वैश्विक हवाई यातायात का एक अहम केंद्र है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी प्रभावित करता है। कई एयरलाइंस को वैकल्पिक और लंबी दूरी के मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ रही है और उड़ानों की समय-सीमा भी प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि इंडिगो जैसी कंपनियां फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए अपनी क्षमता में कटौती कर रही हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी संकेत दिए गए हैं कि आने वाले महीनों में स्थिति कुछ हद तक सुधर सकती है। 

ओएजी के अनुसार जून महीने में इंडिगो की सीट क्षमता में लगभग 1.1 प्रतिशत और जुलाई में 1.8 प्रतिशत तक की मामूली बढ़ोतरी देखी जा सकती है। यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि विमान ईंधन की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे परिचालन लागत में राहत मिलेगी और एयरलाइंस धीरे-धीरे अपनी सेवाएं बहाल कर सकेंगी। लेकिन इस संभावना पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए विमान ईंधन की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने के बाद यह उम्मीद कमजोर पड़ती नजर आ रही है। ईंधन की बढ़ती कीमतें पहले से ही दबाव में चल रही एयरलाइंस के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो सकती हैं, जिससे क्षमता बहाली की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। पश्चिम एशिया की स्थानीय विमानन कंपनियों की स्थिति इससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। 

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के मुकाबले मई में अपनी क्षमता में सबसे बड़ी कटौती Air Arabia ने की है, जहां 34.3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद Qatar Airways, flydubai, Etihad Airways और Saudia जैसी कंपनियां भी प्रभावित सूची में शामिल हैं। इंडिगो इस सूची में गैर-पश्चिम एशियाई कंपनियों में पहली और कुल मिलाकर शीर्ष 10 प्रभावित एयरलाइंस में छठे स्थान पर है। यह स्थिति बताती है कि क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव सीमाओं से परे जाकर वैश्विक विमानन तंत्र को भी प्रभावित कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर निर्भर एयरलाइंस के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है।

वैश्विक विमानन पर गहराया संकट, दक्षिण एशिया भी असर से अछूता नहीं

दुनिया भर में विमानन क्षेत्र इस समय कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहा है और पश्चिम एशिया का तनाव इसमें एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ प्रमुख विमानन कंपनियों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम भी देखा गया है। उदाहरण के तौर पर Emirates की सीट क्षमता में इंडिगो के मुकाबले काफी कम गिरावट दर्ज की गई है, जो इसकी मजबूत परिचालन रणनीति और व्यापक नेटवर्क को दर्शाता है। इसके अलावा अन्य गैर-पश्चिम एशियाई कंपनियां भी इस संकट से प्रभावित हुई हैं। Thai Airways की क्षमता में लगभग 9.3 प्रतिशत, Pegasus Airlines में 13.7 प्रतिशत और AirAsia में 8.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक स्तर पर हवाई यातायात की स्थिति अस्थिर बनी हुई है। क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो दक्षिण एशिया भी इस संकट से अछूता नहीं रहा है। 

भारत की अगुवाई वाला यह क्षेत्र दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बनकर सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कुल सीट क्षमता फरवरी के मुकाबले लगभग 9 से 10 प्रतिशत तक घट गई है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं होता है, तो इसका असर आने वाले महीनों में और गहरा सकता है। इससे न केवल एयरलाइंस की आय पर असर पड़ेगा, बल्कि यात्रियों को भी महंगे टिकट और सीमित विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है। मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि वैश्विक विमानन उद्योग एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहां भू-राजनीतिक घटनाएं सीधे तौर पर संचालन और रणनीति को प्रभावित कर रही हैं। आने वाले समय में स्थिति किस दिशा में जाती है, यह काफी हद तक क्षेत्रीय स्थिरता और ईंधन कीमतों पर निर्भर करेगा।

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