देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा को रद्द कर दिया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह निर्णय लिया गया। अब परीक्षा की नई तारीखें जल्द घोषित की जाएंगी। इस फैसले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरा झटका दिया है। महीनों तक दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के सामने अब फिर से तैयारी का दबाव खड़ा हो गया है। NEET परीक्षा रद्द होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बिहार में सामने आया सॉल्वर गैंग का नेटवर्क माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठाकर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का संगठित रैकेट चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड अभी फरार बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार को एक बार फिर शिक्षा माफिया और परीक्षा घोटालों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी में डाल दिया है।
सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक हर जगह यही चर्चा है कि आखिर मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ क्यों हो रहा है। NEET जैसी परीक्षा केवल एक एग्जाम नहीं होती, बल्कि लाखों छात्रों का सपना होती है। कई विद्यार्थी गांवों से शहरों तक आकर कोचिंग करते हैं। माता-पिता अपनी जमा पूंजी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की खबर ने छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने महीनों तक सोशल मीडिया, त्योहार और बाकी गतिविधियों से दूरी बनाकर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दिया था। अब दोबारा परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है। छात्रों और अभिभावकों में NTA और सिस्टम के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जांच में सामने आया कि बिहार में सक्रिय यह गैंग NEET परीक्षा में असली उम्मीदवार की जगह सॉल्वर बैठाने का काम करता था।
इसके बदले अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपए तक की डील होती थी। शुरुआत में 1.5 से 2 लाख रुपए एडवांस लिए जाते थे और बाद में पूरी रकम वसूली जाती थी। इस मामले का खुलासा 2 मई की रात नालंदा जिले में हुआ। पावापुरी थाना पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी, तभी दो लग्जरी गाड़ियां पुलिस को देखकर भागने लगीं। पुलिस ने घेराबंदी कर स्कॉर्पियो-N और ब्रेजा कार को पकड़ लिया। जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर का अवधेश कुमार, मोतिहारी का अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार साह शामिल थे। अवधेश कुमार विम्स मेडिकल कॉलेज में MBBS सेकेंड ईयर का छात्र बताया गया है।
पुलिस ने जब गाड़ी की तलाशी ली तो डैशबोर्ड के नीचे से नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। शुरुआत में आरोपी पैसों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल फोन की जांच की तो कई बड़े खुलासे हुए। मोबाइल में NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के साथ चैट, पैसे के लेन-देन और सॉल्वर सेटिंग से जुड़े सबूत मिले। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कई जिलों में छापेमारी शुरू की।
मेडिकल कॉलेज के छात्र चला रहे थे पूरा नेटवर्क, बिहार पर फिर उठे सवाल
पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच का छात्र है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने का नेटवर्क चला रहा था। गिरफ्तार आरोपी अमन कुमार सिंह उसका मौसेरा भाई है और दोनों मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में साथ रहते थे। पुलिस का मानना है कि मेडिकल छात्रों का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा था ताकि परीक्षा से जुड़े तकनीकी और पहचान संबंधी काम आसानी से किए जा सकें। फिलहाल उज्जवल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। मुख्य आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर चार और लोगों को गिरफ्तार किया।
इनमें सीतामढ़ी के डॉक्टर नरेश कुमार दास का बेटा हर्षराज, मुजफ्फरपुर का मनोज कुमार, बोचहां का गौरव कुमार और हथौरी थाना क्षेत्र का सुभाष कुमार शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक इस गिरोह ने कितने छात्रों को परीक्षा में फर्जी तरीके से पास कराया है। NEET परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे ज्यादा निराश वे छात्र हैं जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की थी। कई छात्र ऐसे हैं जो पिछले दो-तीन वर्षों से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। कोचिंग संस्थानों में भी मायूसी का माहौल है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों ने मानसिक तनाव, दबाव और आर्थिक कठिनाइयों के बीच तैयारी की थी, लेकिन कुछ लोगों की लालच ने पूरे सिस्टम को बदनाम कर दिया।
कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हर साल पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और धांधली की खबरें सामने आती हैं, लेकिन कार्रवाई के बावजूद ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं। छात्रों ने परीक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाने की मांग की है। इस घटना के बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले भी राज्य में कई भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी एग्जाम में पेपर लीक और फर्जीवाड़े के मामले सामने आते रहे हैं। अब NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सॉल्वर गैंग के खुलासे ने पूरे देश का ध्यान बिहार की ओर खींच दिया है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। फिलहाल लाखों छात्र अब NTA की ओर से नई परीक्षा तारीखों के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सकेगा, ताकि मेहनती छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

















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