कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुबह से ही राजनीतिक उत्सव जैसा माहौल है। हल्की उमस, आसमान में बादलों की आवाजाही और मैदान के चारों ओर भगवा झंडों की कतारें पश्चिम बंगाल की राजनीति आज एक नए अध्याय की गवाह बनने जा रही है। मंच पर अंतिम तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सुरक्षा घेरे के बीच हजारों भाजपा कार्यकर्ता “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के नारों से मैदान को गुंजायमान कर रहे हैं। दोपहर 11 बजे शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और इसके साथ ही राज्य में तीन दशक से अधिक समय बाद भाजपा सत्ता के शीर्ष पर पहुंचेगी। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए के कई बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे। भाजपा इसे सिर्फ सरकार गठन नहीं बल्कि “राजनीतिक परिवर्तन का ऐतिहासिक क्षण” बता रही है।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड को बंगाल की सांस्कृतिक थीम पर सजाया गया है। मैदान में पारंपरिक झालमुड़ी और रसगुल्ला स्टॉल लगाए गए हैं, जबकि विशाल वाटरप्रूफ पंडाल के भीतर एक लाख से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। शुभेंदु अधिकारी की ताजपोशी के पीछे सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश ममता बनर्जी को उनके गढ़ में हराना माना जा रहा है। 2021 में नंदीग्राम में ममता को पराजित करने वाले शुभेंदु ने इस बार भवानीपुर सीट पर भी टीएमसी सुप्रीमो को 15 हजार से अधिक वोटों से शिकस्त देकर भाजपा नेतृत्व का भरोसा और मजबूत कर दिया। बंगाल की राजनीति में यह बेहद दुर्लभ क्षण है जब नेता प्रतिपक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री को चुनावी मैदान में हराकर सत्ता हासिल की हो। भाजपा नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि बंगाल में पार्टी अब आक्रामक संगठन और जमीनी संघर्ष की राजनीति को आगे बढ़ाएगी।
इसी वजह से विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर लगभग तुरंत सहमति बन गई। शुक्रवार को कोलकाता के कन्वेंशन सेंटर में हुई बैठक में 207 भाजपा विधायकों ने सर्वसम्मति से उन्हें अपना नेता चुना। इसके बाद अमित शाह ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की और शुभेंदु ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इसे “श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने की वापसी” बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भाजपा की जीत नहीं बल्कि उन लाखों कार्यकर्ताओं के संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने वर्षों तक बंगाल में राजनीतिक हिंसा और दबाव के बीच पार्टी को खड़ा किया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता ने “जंगलराज” को हटाकर विकास और कानून व्यवस्था के नाम पर वोट दिया है। दूसरी ओर भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने शुभेंदु अधिकारी को “संघर्षशील और जमीनी नेता” बताते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में उन्होंने विधानसभा से लेकर सड़क तक ममता सरकार के खिलाफ सबसे मजबूत आवाज उठाई। पार्टी के भीतर भी यह धारणा रही कि बंगाल में भाजपा की सबसे आक्रामक राजनीतिक पहचान शुभेंदु अधिकारी ही बने। शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए कोलकाता में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। करीब चार हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। हावड़ा और सियालदह स्टेशन से ब्रिगेड परेड ग्राउंड तक विशेष बस सेवाएं भी चलाई जा रही हैं। भाजपा ने दावा किया है कि राज्य के हर जिले से कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने कोलकाता पहुंचे हैं।
34 साल के संघर्ष के बाद सत्ता तक पहुंची भाजपा, बंगाल की राजनीति में नए समीकरण शुरू
पश्चिम बंगाल में भाजपा की यह जीत सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं बल्कि लंबे राजनीतिक संघर्ष का परिणाम मानी जा रही है। भाजपा ने 1982 में गठन के बाद पहली बार बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी को यहां जमीन बनाने में दशकों लग गए। 2016 में भाजपा पहली बार तीन सीटें जीत सकी थी और उसका वोट शेयर करीब 10 प्रतिशत था। इसके बाद 2021 में पार्टी ने बड़ा उछाल लेते हुए 77 सीटें हासिल कीं और मुख्य विपक्षी दल बनी। अब 2026 के चुनाव में भाजपा ने 45.84 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली है। 4 मई को आए नतीजों ने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई जबकि लेफ्ट और कांग्रेस लगभग हाशिये पर चले गए। हालांकि राज्य की 294 सीटों में से फालता सीट पर दोबारा मतदान होना बाकी है, जिसके परिणाम 24 मई को आएंगे।
बावजूद इसके भाजपा पहले ही स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है। भाजपा ने इस बार हिंदुत्व, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार विरोध और केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों को एक साथ जोड़ने की रणनीति अपनाई। वहीं टीएमसी को कई क्षेत्रों में सत्ता विरोधी लहर, संगठनात्मक असंतोष और भ्रष्टाचार के आरोपों का नुकसान उठाना पड़ा। शुभेंदु अधिकारी ने खुद को “बंगाल की अस्मिता और हिंदू वोटों के सबसे बड़े चेहरे” के रूप में स्थापित किया, जिसका असर चुनावी नतीजों में साफ दिखाई दिया। अब सबसे बड़ा सवाल नई सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर है। भाजपा शुभेंदु सरकार कानून व्यवस्था सुधार, उद्योग निवेश, भ्रष्टाचार मामलों की जांच और सरकारी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर तेजी से काम शुरू कर सकती है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दों पर भी नई सरकार सख्त रुख अपना सकती है।
दिलचस्प बात यह भी है कि प्रोटोकॉल के तहत ममता बनर्जी को शपथ समारोह का निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि टीएमसी की ओर से अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया कि वह समारोह में शामिल होंगी या नहीं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पहले ही चुनाव परिणामों पर सवाल उठा चुके हैं, लेकिन भाजपा इसे “जनादेश का सम्मान” बता रही है। कोलकाता में आज सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं हो रहा, बल्कि बंगाल की दशकों पुरानी राजनीतिक धुरी बदलती दिखाई दे रही है।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड से उठने वाली यह तस्वीर आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकती है। भाजपा के लिए यह वैचारिक जीत है, जबकि टीएमसी के लिए सबसे कठिन राजनीतिक चुनौती की शुरुआत। शुभेंदु अधिकारी अब सिर्फ विपक्ष के आक्रामक चेहरे नहीं रहेंगे, बल्कि उन वादों की परीक्षा भी उनके सामने होगी जिनके सहारे भाजपा ने बंगाल की सत्ता तक का सफर तय किया है।

















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