तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए बढ़ती जा रही उलझन, सबसे ज्यादा सीट लाने के बाद भी विजय नहीं जुटा पा रहे बहुमत 

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार गठन की तैयारी में जुटी है, असम में भाजपा नीत एनडीए ने स्पष्ट बहुमत के साथ नई सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है, केरल में कांग्रेस नेतृत्व सरकार गठन को अंतिम रूप देने में लगी है और पुडुचेरी में भी भाजपा खेमे की सक्रियता बढ़ गई है। लेकिन तमिलनाडु में स्थिति सबसे ज्यादा उलझी हुई नजर आ रही है। यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके (TVK) के प्रमुख विजय अभी तक सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं जुटा पाए हैं। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक खींचतान जारी है। राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने गुरुवार को एक बार फिर टीवीके प्रमुख विजय के सरकार बनाने के दावे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 

राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि विजय को बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 118 विधायकों के हस्ताक्षर पेश करने होंगे, तभी आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, राज्यपाल ने यह भरोसा भी दिलाया है कि फिलहाल किसी अन्य दल को सरकार गठन के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम के बाद हलचल और तेज हो गई है। टीवीके लगातार संख्या बल जुटाने में लगी हुई है। पार्टी की ओर से वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल जैसे सहयोगी दलों को समर्थन के लिए मनाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। विजय की टीम लगातार निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों से भी संपर्क साध रही है। 

दूसरी ओर, डीएमके ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने अपने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में ही रहने का निर्देश दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक फैसला लिया जा सकता है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीति में अभी कई बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। तमिलनाडु में सबसे ज्यादा चर्चा एआईएडीएमके के भीतर बढ़ती हलचल को लेकर हो रही है। पार्टी के 28 विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट किए जाने की खबर ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि ये विधायक वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम के समर्थक हैं। टीवीके और एआईएडीएमके के बागी गुट के बीच उपमुख्यमंत्री पद और मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि, एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी इस तरह के किसी समझौते के खिलाफ बताए जा रहे हैं। 

विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत का आंकड़ा जुटाने की है। तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है, लेकिन टीवीके अभी भी इस संख्या से छह विधायक पीछे बताई जा रही है। यही वजह है कि राज्य की राजनीति पूरी तरह जोड़-तोड़ और रणनीतिक बैठकों के दौर में पहुंच चुकी है। उधर, डीएमके ने अपनी विधायक दल की बैठक में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए हैं। पहले प्रस्ताव में जनता और गठबंधन सहयोगियों का आभार जताया गया। दूसरे प्रस्ताव में पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन के नेतृत्व की सराहना की गई। तीसरे प्रस्ताव में स्टालिन को मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए सभी जरूरी फैसले लेने का अधिकार दिया गया।

कांग्रेस पर बरसी डीएमके, केरल और असम में भी तेज हुई सरकार गठन की हलचल

डीएमके ने चौथे और सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रस्ताव में कांग्रेस पर गठबंधन तोड़ने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से अलग होकर अपना पुराना राजनीतिक चरित्र दिखाया है। डीएमके ने यह भी कहा कि कांग्रेस को गठबंधन के तहत राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें दी गई थीं, लेकिन इसके बावजूद उसने कुछ ही दिनों में अलग राह चुन ली। तमिलनाडु की इस अस्थिर स्थिति के बीच देश के दूसरे राज्यों में सरकार गठन की तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है। असम में भाजपा नीत एनडीए ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। अब नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। 12 मई को गुवाहाटी के खानापारा में नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। 

भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक जेपी नड्डा और नायब सिंह सैनी 9 मई को गुवाहाटी पहुंचेंगे। इसके बाद 10 मई को विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। असम में भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है क्योंकि पार्टी ने स्पष्ट जनादेश हासिल किया है और सरकार गठन में किसी तरह की बाधा नहीं दिख रही। वहीं केरल में कांग्रेस सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने सभी 63 विधायकों से अलग-अलग मुलाकात की। बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार कांग्रेस आलाकमान को सौंप दिया गया। अब माना जा रहा है कि जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जा सकती है। 

तमिलनाडु इस समय देश का सबसे जटिल सियासी राज्य बन चुका है। यहां सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद विजय सरकार गठन से दूर नजर आ रहे हैं। राज्यपाल की सख्ती, एआईएडीएमके में अंदरूनी खींचतान, डीएमके की रणनीतिक सक्रियता और कांग्रेस के बदले रुख ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह उलझा दिए हैं। तमिलनाडु में अब सबकी नजर अगले कुछ दिनों पर टिकी हुई है। यदि विजय जरूरी समर्थन जुटाने में सफल हो जाते हैं तो राज्य में पहली बार टीवीके के नेतृत्व में नई राजनीतिक शुरुआत देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर बहुमत का आंकड़ा नहीं जुट पाया, तो तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा सियासी संकट और नए समीकरण पैदा हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *