बंगाल में सत्ता परिवर्तन की पटकथा पूरी : आज भाजपा राज्य में अपने पहले मुख्यमंत्री के नाम का एलान करेगी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आ चुका है। विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के सिर्फ चार दिन बाद शुक्रवार को भाजपा बंगाल में अपने पहले मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक एलान करने जा रही है। कोलकाता के न्यूटाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में दोपहर तीन बजे भाजपा विधायक दल की अहम बैठक होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शाह औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा करेंगे। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत ने बंगाल की राजनीति की दशकों पुरानी तस्वीर बदल दी है। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले राज्य में पहली बार भाजपा सत्ता के केंद्र में पहुंचती दिखाई दे रही है। 

पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर कई नामों की चर्चा जरूर हुई, लेकिन सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सुवेंदु अधिकारी का नाम लगातार आगे बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में लगभग तय माना जा रहा है कि भाजपा बंगाल की कमान उन्हीं के हाथों में सौंप सकती है। सुवेंदु अधिकारी वही नेता हैं जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती दी थी और इस बार के चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर सीट पर हराकर बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया। भाजपा नेतृत्व भी उन्हें बंगाल में पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिनता है। संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर राज्य में दीर्घकालिक राजनीतिक संदेश देना चाहती है। भाजपा की सरकार के गठन को लेकर पार्टी ने तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली हैं। 

नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार 09 मई को आयोजित होगा। खास बात यह है कि यह समारोह कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के दिन रखा गया है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री और मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। भाजपा इस समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटी हुई है। देशभर के कई बड़े नेताओं और संत समाज के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किए जाने की चर्चा है। दूसरी ओर चुनावी हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। ममता ने दावा किया कि उनकी पार्टी जनादेश से नहीं बल्कि “साजिश” के तहत हारी है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें “लूटी” गई हैं। 

ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या हुई है और जनता का असली जनादेश दबा दिया गया। ममता बनर्जी के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति और अधिक गर्म हो गई है। भाजपा नेताओं ने उनके आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। भाजपा का कहना है कि बंगाल की जनता ने भ्रष्टाचार, हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति को नकारते हुए परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक यह जीत केवल चुनावी सफलता नहीं बल्कि बंगाल की जनता की मानसिकता में आए बड़े बदलाव का संकेत है।

शपथ ग्रहण से पहले सुवेंदु अधिकारी के करीबी की हत्या से बढ़ा तनाव

राज्य में सत्ता परिवर्तन के माहौल के बीच राजनीतिक हिंसा की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। कोलकाता के पास मध्यमग्राम इलाके में सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जानकारी के मुताबिक चंद्रनाथ रथ स्कॉर्पियो वाहन से जा रहे थे, तभी एक कार ने उनकी गाड़ी को रास्ते में रोक लिया। इसी दौरान बाइक पर पहुंचे हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने छह से दस राउंड गोलियां चलाईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए राज्य में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद से राज्य में विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराने और हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। 

पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि अभी तक हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसी बीच राज्यपाल आरएन रवि ने बड़ा संवैधानिक कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग कर दिया है। गुरुवार शाम लोकभवन से इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया। विधानसभा भंग होने के साथ ही ममता कैबिनेट के मंत्रियों की शक्तियां समाप्त हो गई हैं। अब नई सरकार के गठन तक प्रशासनिक व्यवस्था संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ेगी। बंगाल में यह सत्ता परिवर्तन केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक संस्कृति, प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। 

भाजपा जहां इसे “नए बंगाल” की शुरुआत बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दे रही है। आने वाले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अब पूरे देश की नजर शुक्रवार को होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक और शनिवार के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई है। यदि सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जाएगी। वहीं ममता बनर्जी की अगली राजनीतिक रणनीति भी आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाली है।

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