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उत्तराखंड के शहरों के विकास का सीएम धामी ने खींचा नया खाका, तय होगी हर काम की समय-सीमा

उत्तराखंड के शहर अब केवल बढ़ेंगे नहीं, बल्कि उन्हें नए ढंग से आकार देने की तैयारी है। सड़कों से लेकर पार्किंग तक, अवैध निर्माण से लेकर मास्टर प्लान तक और शहरों के सौंदर्यीकरण से लेकर आम नागरिक की सुविधाओं तक। सरकार ने विकास प्राधिकरणों की पूरी कार्यप्रणाली को समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने का खाका खींच दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया है कि अब योजनाएं फाइलों में नहीं, जमीन पर नजर आनी चाहिए और हर काम की जिम्मेदारी तय होगी। सीएम धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन सभी विकास प्राधिकरणों की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान, परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, आवासीय योजनाओं और सौंदर्यीकरण के कामों की अलग-अलग समीक्षा कर उनकी समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल कागजों पर योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका असर धरातल पर दिखाई देना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक लंबित कार्य की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाए और उसके पूरा होने की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए। जहां कार्य धीमी गति से चल रहे हैं, वहां कारणों की पहचान कर तत्काल समाधान किया जाए। 

धामी सरकार का विशेष जोर इस बार प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के स्वरूप को बदलने पर है। मुख्यमंत्री ने सभी विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में इसी माह से व्यापक सौंदर्यीकरण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इन कार्यों को 15 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सौंदर्यीकरण का स्तर ऐसा हो कि शहरों का बदला हुआ स्वरूप साफ दिखाई दे। उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण कार्यों की गुणवत्ता और आकर्षण वैसा ही होना चाहिए जैसा जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदेश के प्रमुख शहरों में दिखाई दिया था। शहरों के प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थलों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बेहतर स्वरूप देने के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि किसी कार्य के लिए बजट की जरूरत है तो उसकी व्यवस्था की जाए, लेकिन बजट की कमी को काम रोकने या देर करने का बहाना नहीं बनाया जाएगा। सड़कों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों को 15 दिन की समय-सीमा दी है। प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन किया जाएगा। जिन सड़कों की हालत खराब है, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और सुधार कार्य कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुधार के काम की नियमित निगरानी होनी चाहिए और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। 

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की विस्तृत सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरकार का जोर इस बात पर है कि आवास योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र परिवारों तक पहुंचे और योजनाओं की प्रगति केवल आंकड़ों में दिखाई न दे। शहरों में नागरिक सुविधाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने को अनिवार्य करने को कहा। प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य शौचालय के साथ महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। शहरी क्षेत्रों के साथ अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएंगे। अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सार्वजनिक सुविधाओं की योजना बनाते समय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। शहरों का विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को बेहतर और सम्मानजनक सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी क्रम में भवन मानचित्र स्वीकृति की व्यवस्था को और सरल तथा पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों से जोड़ने के निर्देश दिए। उनका कहना है कि आम नागरिकों को भवन मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और डिजिटल माध्यम से आसान होनी चाहिए। 

अवैध निर्माण पर सरकार अब केवल कार्रवाई के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय शुरुआत में ही निगरानी करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने जीआईएस, उपग्रह चित्रों और ड्रोन के माध्यम से निर्माण गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। संदिग्ध निर्माण की शुरुआती स्तर पर पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में प्रत्येक विकास प्राधिकरण में अवैध निर्माण निगरानी डैशबोर्ड विकसित करना शामिल है। इसमें संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की पूरी प्रक्रिया की वास्तविक समय स्थिति दर्ज होगी। इससे कार्रवाई की स्थिति अधिकारियों के सामने स्पष्ट रहेगी और किसी मामले को लंबे समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी साफ किया कि यदि अवैध निर्माण के मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यानी अब अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उसे संरक्षण देने वाले तंत्र पर भी नजर रखने की तैयारी है।

पार्किंग से लेकर भूमि तक, शहरों के विकास का नया मॉडल

देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में लगातार बढ़ती पार्किंग समस्या को लेकर भी मुख्यमंत्री ने स्थायी समाधान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसी नगर पालिकाओं को चिन्हित करने को कहा जहां पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके बाद एमडीडीए और एचआरडीए को संबंधित नगर निकायों के साथ मिलकर ठोस कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसमें बहुमंजिला पार्किंग, सतही पार्किंग, बाहरी क्षेत्रों में पार्किंग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को शामिल किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि पार्किंग की समस्या का समाधान केवल वर्तमान जरूरतों के आधार पर न हो, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ते वाहनों और शहरी आबादी को ध्यान में रखकर किया जाए। शहरी विकास के साथ आवासीय परियोजनाओं की रफ्तार पर भी नजर रखी जाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में आवासीय परियोजनाओं की प्रगति का स्पष्ट विवरण तैयार करने को कहा। इसमें यह बताया जाएगा कि कितने आवास पूरे हो चुके हैं, कितने निर्माणाधीन हैं और किन परियोजनाओं की गति धीमी है। धीमी परियोजनाओं की अलग से निगरानी कर उन्हें गति देने के निर्देश दिए गए हैं। 

विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। नक्शा स्वीकृति, विकास शुल्क, अवैध निर्माण, मास्टर प्लान और प्रवर्तन जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग होने के बावजूद जहां संभव हो, वहां प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जाए। इसका उद्देश्य नागरिकों को विकास प्राधिकरणों से जुड़ी सेवाओं के लिए सरल, स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को भी नागरिकों के लिए अधिक उपयोगी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। योजनाओं, शुल्क, नियमों, मानचित्र स्वीकृति और अन्य सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के साथ प्रस्तावित चैटबॉट जैसी तकनीकी सुविधाओं को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।धामी सरकार अब भूमि विकास के लिए लैंड पूलिंग योजना को भी प्रयोग के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने कम से कम दो से तीन विकास क्षेत्रों में पायलट परियोजना के रूप में लैंड पूलिंग लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें किसानों और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट और पारदर्शी मॉडल तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि विकास की योजनाओं में भूमि मालिकों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। 

उन्हें योजना से मिलने वाले लाभ और भविष्य की संभावनाओं की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। इससे विकास और भूमि मालिकों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी। उत्तराखंड सरकार का नया फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। जिन ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों को विकास प्राधिकरणों के दायरे में शामिल किया गया है, वहां भी नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास प्राधिकरण अब केवल नक्शे पास करने और निर्माण की अनुमति देने वाली संस्थाएं नहीं रह सकतीं। उन्हें शहरों और प्राधिकरण क्षेत्रों के नियोजित विकास की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए पारदर्शिता, तकनीक और जवाबदेही तीनों को कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना होगा।अब असली परीक्षा इन घोषणाओं की नहीं, बल्कि तय समय-सीमा के भीतर इनके धरातल पर उतरने की होगी। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार समेत सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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