वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक संकट के बीच देश में ईंधन बचत को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें अब गंभीर कदम उठाती दिखाई दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब केवल आम जनता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नेताओं, मंत्रियों और सरकारी तंत्र में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकारें अब सादगी और संसाधनों के सीमित उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि जहां संभव हो वहां निजी वाहनों का कम उपयोग किया जाए और सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों तथा कार पूलिंग को बढ़ावा दिया जाए।
इसी अपील के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर कई बड़े फैसले लागू करने शुरू कर दिए हैं। सबसे पहले खुद प्रधानमंत्री ने अपने सरकारी काफिले की गाड़ियों की संख्या सीमित कर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की। गुजरात और असम दौरे के दौरान पीएम के काफिले में अनावश्यक वाहनों को हटाया गया। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था और एसपीजी प्रोटोकॉल से कोई समझौता नहीं किया गया, लेकिन जरूरत के हिसाब से वाहनों की संख्या घटाई गई। प्रधानमंत्री की इस पहल के बाद कई राज्यों ने भी अपने-अपने स्तर पर एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया। राज्यों को सलाह दी गई कि सरकारी कामकाज में इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग हो, अनावश्यक यात्रा कम की जाए और अधिक से अधिक ऑनलाइन बैठकों का आयोजन किया जाए। शपथ ग्रहण समारोहों और सरकारी कार्यक्रमों से लौटने के बाद कई मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिलों में कटौती लागू कर दी।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से राष्ट्रीय हित में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग और फिजूल खर्ची रोकने पर जोर दिया। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री के दौरों के दौरान अब वाहन रैलियां भी आयोजित नहीं की जाएंगी और मंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी यात्राओं में कम से कम गाड़ियों का इस्तेमाल करें। दिल्ली में भी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभागीय कार्यों के लिए गाड़ियों के उपयोग को सीमित करने का फैसला लिया है।
दिल्ली सरकार ने सभी कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपील की है कि आवश्यकता के अनुरूप ही वाहन उपयोग करें। साथ ही कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि राजधानी में प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। इसी अभियान के तहत दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा बुधवार को मेट्रो से सफर करते नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी मेट्रो यात्रा की तस्वीरें और जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर दिल्ली सरकार के सभी मंत्री सार्वजनिक परिवहन के उपयोग का संकल्प ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर केवल एक सरकारी वाहन का उपयोग किया जाएगा। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हुई और लोगों ने इसे नेताओं द्वारा दिया गया सकारात्मक संदेश बताया।
ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाने की तैयारी, यूपी में बड़े निर्देश
उत्तर प्रदेश में भी इस दिशा में बड़ा अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में तत्काल 50 प्रतिशत तक कटौती की जाए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक गाड़ियों को हटाया जाए और सरकारी यात्राओं को सीमित रखा जाए। सीएम योगी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ईंधन की खपत कम करें और आवश्यकता न होने पर निजी वाहनों के उपयोग से बचें। मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों से हफ्ते में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की।
इसके साथ ही “नो व्हीकल डे” मनाने का सुझाव भी दिया गया ताकि लोगों में ईंधन बचत के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान से स्कूलों, कॉलेजों और समाज के विभिन्न वर्गों को भी जोड़ा जाएगा। सीएम योगी ने केवल ईंधन ही नहीं बल्कि बिजली बचत पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सरकारी भवनों, घरों और निजी प्रतिष्ठानों में अनावश्यक बिजली खर्च को रोका जाए। व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और निजी संस्थानों में रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों के उपयोग को कम करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा “वर्क फ्रॉम होम” संस्कृति को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई ताकि अनावश्यक यात्रा को कम किया जा सके।
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद भी मंगलवार को मेट्रो और ई-रिक्शा से सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में पहुंचे। उनके इस कदम को भी जनता के बीच सकारात्मक संदेश के रूप में देखा गया। राजधानी में अब कई अधिकारी और कर्मचारी भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यदि सरकारी स्तर पर इस तरह की पहल लगातार जारी रहती है तो इससे देश में ईंधन की खपत कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि यह केवल सरकारी अभियान न बनकर जनभागीदारी वाला आंदोलन बने। वैश्विक संकट और बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उठाए जा रहे ये कदम आने वाले समय में देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में अहम साबित हो सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद जिस तरह नेताओं और मंत्रियों ने खुद उदाहरण पेश करना शुरू किया है, उससे आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

















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