देश में आम आदमी की जेब और रसोई के खर्च से जुड़ी महंगाई को लेकर केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 के ताजा आंकड़े जारी कर दिए हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च 2026 में जहां खुदरा महंगाई दर 3.40 प्रतिशत थी, वहीं अप्रैल में यह बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि महंगाई अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय दायरे के भीतर बनी हुई है। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई का असर शहरी इलाकों की तुलना में अधिक महसूस किया जा रहा है।
गांवों में खुदरा महंगाई दर 3.74 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.16 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि ग्रामीण परिवारों पर रोजमर्रा की जरूरतों का बोझ अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़ा है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी अप्रैल के दौरान तेजी देखने को मिली। फूड इन्फ्लेशन मार्च के मुकाबले बढ़कर 4.20 प्रतिशत पर पहुंच गया। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 4.26 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.10 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, सप्लाई चेन पर दबाव और कुछ सब्जियों की कम आवक के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े हैं। सब्जियों की कीमतों ने इस बार आम लोगों की थाली का स्वाद बिगाड़ दिया। खासतौर पर टमाटर और फूलगोभी के दामों में तेज उछाल ने घरेलू बजट पर असर डाला है।
आंकड़ों के अनुसार टमाटर की कीमतों में 35.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फूलगोभी 25.58 प्रतिशत महंगी हो गई। इन दोनों सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने रसोई का खर्च बढ़ा दिया है। हालांकि कुछ जरूरी सब्जियों के सस्ते होने से लोगों को थोड़ी राहत भी मिली है। आलू की कीमतों में 23.69 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि प्याज 17.67 प्रतिशत सस्ता हुआ है। बाजार में आलू और प्याज की पर्याप्त उपलब्धता के कारण इनके दाम नीचे आए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह राहत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भारतीय रसोई में इन दोनों चीजों का इस्तेमाल लगभग रोज होता है।
महंगाई का असर सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कीमती धातुओं और गहनों की कीमतों में भी रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली।
सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के बढ़ते दामों ने लोगों की बचत और खरीदारी दोनों पर असर डाला है। आंकड़ों के मुताबिक चांदी के गहनों की कीमतों में सबसे अधिक 144.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं सोना, हीरा और प्लैटिनम के गहने भी 40.72 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी और निवेशकों का गोल्ड व सिल्वर की ओर बढ़ता रुझान इसकी प्रमुख वजह है। शादी-विवाह के सीजन में भी गहनों की मांग बढ़ने से बाजार में कीमतें ऊपर बनी हुई हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, क्योंकि त्योहारों और सामाजिक आयोजनों में गहनों की खरीद भारतीय परिवारों की परंपरा का हिस्सा मानी जाती है।
गांवों में ज्यादा असर, राज्यों के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर
पर्सनल केयर और अन्य सेवाओं से जुड़े खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस श्रेणी में महंगाई दर 17.66 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का कहना है कि गहनों की कीमतों में उछाल और कुछ सेवाओं की लागत बढ़ने के कारण यह आंकड़ा ऊपर गया है। दूसरी तरफ वाहन खरीदने वालों के लिए थोड़ी राहत की खबर भी आई है। मोटर कार और जीप की कीमतों में 7.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और मांग में नरमी के कारण कंपनियां कीमतों में कटौती कर रही हैं। राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तेलंगाना देश में सबसे अधिक महंगाई वाला राज्य रहा। यहां खुदरा महंगाई दर 5.81 प्रतिशत दर्ज की गई।
वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महंगाई सबसे कम रही और यह 1.96 प्रतिशत पर दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में महंगाई दर करीब 3.59 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से थोड़ा अधिक है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई दर में यह बढ़ोतरी फिलहाल बहुत चिंताजनक नहीं है, क्योंकि यह अभी भी रिजर्व बैंक के निर्धारित दायरे में बनी हुई है। आरबीआई आमतौर पर खुदरा महंगाई को 2 से 6 प्रतिशत के बीच बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। हालांकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आने वाले महीनों में चुनौती बन सकती है। यदि मानसून सामान्य रहता है और कृषि उत्पादन बेहतर होता है तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई पर कुछ नियंत्रण देखने को मिल सकता है।
लेकिन यदि मौसम संबंधी दिक्कतें बढ़ती हैं या सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी आ सकती है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए महंगाई अब भी बड़ी चिंता बनी हुई है। रोजमर्रा की जरूरतों, रसोई के सामान, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और परिवहन पर बढ़ता खर्च घरेलू बजट पर दबाव डाल रहा है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता और कुछ वस्तुओं के सस्ते होने से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन खाने-पीने की चीजों और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। अब सभी की नजर आने वाले महीनों के महंगाई आंकड़ों और आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति पर टिकी हुई है। यदि महंगाई में और बढ़ोतरी होती है तो ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

















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