चुनाव खत्म होते ही पांच राज्यों से हटी आचार संहिता, लेकिन बंगाल की फाल्टा सीट पर अभी जारी रहेगा चुनावी पहरा

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) हटाने का आदेश जारी कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के साथ ही संबंधित राज्यों और विधानसभा क्षेत्रों में लागू सभी चुनावी प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गए हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर अभी भी आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी, क्योंकि वहां नए सिरे से मतदान कराने का फैसला लिया गया है।निर्वाचन आयोग की ओर से गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया कि आदर्श आचार संहिता चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ लागू होती है और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहती है। चूंकि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं, इसलिए इन राज्यों में अब आचार संहिता हटाई जा रही है। 

इसके अलावा गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनावों की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, इसलिए वहां भी चुनावी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पश्चिम बंगाल के 144-फाल्टा विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में आचार संहिता अब लागू नहीं रहेगी। फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान होने तक चुनावी नियम प्रभावी बने रहेंगे। आयोग के मुताबिक वहां चुनाव प्रक्रिया अभी पूरी नहीं मानी जाएगी। दरअसल, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान भारी गड़बड़ी और चुनावी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए पूरी मतदान प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। 

आयोग ने 3 मई को जारी आदेश में कहा था कि 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली घटनाएं सामने आईं, जिसके चलते निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना संभव नहीं रह गया था। इसी वजह से आयोग ने फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। इसमें सहायक मतदान केंद्र भी शामिल हैं। आयोग के अनुसार फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 24 मई को होगी। 

आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी राज्य प्रशासन और केंद्रीय बलों को विशेष निर्देश दिए हैं ताकि दोबारा मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके। चुनाव आयोग के इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि किसी पूरे विधानसभा क्षेत्र की मतदान प्रक्रिया को रद्द करना बेहद दुर्लभ कदम होता है। आमतौर पर आयोग कुछ बूथों पर दोबारा मतदान कराता है, लेकिन फाल्टा मामले में पूरे क्षेत्र के मतदान को निरस्त करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आयोग को वहां व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं।

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद देश की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिले 

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद देश की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। खासकर पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की राजनीति में लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है।

पुडुचेरी में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को जनता ने दोबारा सत्ता सौंपी है। वहीं केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने सत्ता में वापसी की है। केरल में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प रहा और कांग्रेस गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया। तमिलनाडु के चुनाव परिणाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। राज्य में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और जनता ने खंडित जनादेश दिया। हालांकि अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया और सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। 

तमिलनाडु की राजनीति में यह एक बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। आचार संहिता हटने के बाद अब इन राज्यों में नई सरकारों के गठन और प्रशासनिक फैसलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। चुनाव के दौरान लागू प्रतिबंधों के कारण सरकारें नई योजनाओं की घोषणा, बड़े प्रशासनिक फैसले और वित्तीय स्वीकृतियां जारी नहीं कर सकती थीं। लेकिन अब प्रतिबंध हटने के बाद नई सरकारें तेजी से काम शुरू कर सकेंगी। चुनाव आयोग का फाल्टा सीट पर सख्त रुख लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देता है। 

आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि चुनाव में किसी भी तरह की अनियमितता या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि आयोग ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने जैसा बड़ा निर्णय लिया। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाले फाल्टा पुनर्मतदान पर टिकी हैं। राजनीतिक दलों ने वहां अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और चुनाव आयोग भी निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति बना रहा है। 24 मई को मतगणना के साथ ही फाल्टा सीट का परिणाम सामने आएगा और उसके बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त मानी जाएगी।

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