हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। पहले दिन राष्ट्रगीत को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुए हंगामे के बाद अब आज सदन में बेरोजगारी का मुद्दा गरमाने के आसार हैं। विपक्षी भाजपा कांग्रेस सरकार को उसके चुनावी रोजगार वादे पर घेरने की तैयारी में है। भाजपा बेरोजगारी के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर काम रोको प्रस्ताव ला सकती है। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान हर साल एक लाख और पांच साल में पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन सरकार अब तक इस वादे को पूरा नहीं कर पाई है। भाजपा आज सदन में सरकार से यह जवाब मांग सकती है कि चुनाव के दौरान युवाओं से किए गए रोजगार के वादे पर अब तक कितना काम हुआ है और कितने युवाओं को रोजगार दिया गया। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश के युवा रोजगार की समस्या से जूझ रहे हैं और सरकार को इस मुद्दे पर सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
वहीं, मानसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रगीत को लेकर हुआ विवाद भी आज की कार्यवाही पर असर डाल सकता है। शुक्रवार को सदन की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई थी। इसके बाद भाजपा विधायकों ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी थी। देखते ही देखते सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए और सदन में हंगामा शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि विधानसभा की अपनी परंपराएं और नियम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से और समापन राष्ट्रगीत के साथ करने की परंपरा है।
मानसून सत्र के पहले ही दिन राष्ट्रगीत को लेकर हुए हंगामे के बाद आज बेरोजगारी का मुद्दा सदन के माहौल को और गर्म कर सकता है। यदि भाजपा काम रोको प्रस्ताव लाती है और उस पर चर्चा की मांग करती है, तो सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार रोजगार के वादे पर विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है और विधानसभा की कार्यवाही आज किस तरह आगे बढ़ती है।
राष्ट्रगीत विवाद के बाद आज रोजगार पर सरकार को घेरेगी भाजपा
पहले दिन के हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा पर विधानसभा की परंपराओं का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का सम्मान करती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक राष्ट्रगान सत्र की शुरुआत में और राष्ट्रगीत सत्र के अंत में गाया जाता है। उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाने और जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।दूसरी ओर भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि भाजपा विधायकों ने राष्ट्रगान के बाद राष्ट्रगीत गाने का आग्रह किया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। परमार ने कहा था कि भाजपा इस मुद्दे को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी।
अब दूसरे दिन भाजपा का फोकस बेरोजगारी के मुद्दे पर रहने की संभावना है। विपक्ष सरकार से चुनावी वादे का हिसाब मांगने के साथ ही प्रदेश में रोजगार की स्थिति पर चर्चा की मांग कर सकता है। काम रोको प्रस्ताव के जरिए भाजपा इस मुद्दे को सदन की कार्यवाही में प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगी। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले युवाओं को हर साल एक लाख रोजगार देने का वादा किया था।
पांच साल में पांच लाख रोजगार देने का वादा भी चुनावी घोषणा का अहम हिस्सा था। विपक्ष अब सरकार से पूछ सकता है कि इस वादे के तहत अब तक कितनी भर्तियां हुई हैं और कितने युवाओं को रोजगार मिला है। ऐसे में आज विधानसभा में रोजगार का मुद्दा सत्ता पक्ष के लिए चुनौती बन सकता है। कांग्रेस सरकार जहां अपने काम और योजनाओं के आधार पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा चुनावी वादों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

















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