देश के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल 13,041 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें चार परियोजनाएं रेलवे से जुड़ी हैं, जबकि एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना बिहार के लिए स्वीकृत की गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करने, यात्री और माल परिवहन को बेहतर बनाने तथा सड़क संपर्क को मजबूत करना है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, चार रेलवे परियोजनाओं पर करीब 9,450 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के तहत लगभग 410 किलोमीटर नई रेल लाइनें जुड़ेंगी। इनका विस्तार पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आठ जिलों तक होगा। वहीं, बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के 82.6 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में विकसित करने के लिए करीब 3,590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देश के कई महत्वपूर्ण रेल और सड़क मार्गों पर यातायात की क्षमता बढ़ेगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही सुचारु होने के साथ-साथ यात्रियों के लिए सफर आसान होगा और माल ढुलाई की गति भी बढ़ेगी। परियोजनाओं से करीब 6,448 गांवों की रेल संपर्क व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है, जिसका लाभ लगभग 60 लाख लोगों तक पहुंच सकता है।
रेलवे के लिए स्वीकृत परियोजनाएं ऐसे मार्गों पर केंद्रित हैं, जहां लंबे समय से रेल यातायात का दबाव बना हुआ है। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से मौजूदा मार्गों पर ट्रेनों को चलाने के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी। इसका सीधा असर यात्री ट्रेनों के संचालन और मालगाड़ियों की आवाजाही पर पड़ सकता है। इन परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाना भी है। नए रेल संपर्क और अतिरिक्त लाइनों के माध्यम से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, वाहन और अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आने की संभावना है। सरकार के अनुमान के अनुसार, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर साल अतिरिक्त 76 मिलियन टन माल ढोने की क्षमता विकसित हो सकती है।
रेलवे परियोजनाओं के अलावा बिहार की सड़क परियोजना भी क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के 82.6 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में विकसित किया जाएगा। इससे बिहार के कई इलाकों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा और यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन में भी समय की बचत होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क का सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा। परिवहन सुविधाएं मजबूत होने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है, औद्योगिक क्षेत्रों तक माल पहुंचाना आसान हो सकता है और किसानों के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
चार रेलवे परियोजनाओं से बदलेगा रेल संपर्क का ढांचा
कैबिनेट की मंजूरी के तहत खड़गपुर-भद्रक चौथी रेल लाइन परियोजना पर करीब 3,352 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह रेल मार्ग पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क का हिस्सा है और इस पर यातायात का दबाव काफी अधिक रहता है। अतिरिक्त लाइन बनने से इस मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,583 करोड़ रुपये है। वहीं, गुम्मिडिपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन परियोजना के लिए लगभग 2,229 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण रेल खंड पर अतिरिक्त लाइनें बनने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। कटक-पारादीप तीसरी और चौथी लाइन परियोजना भी इस पैकेज का हिस्सा है। इस परियोजना पर करीब 2,286 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कटक और पारादीप के बीच रेल संपर्क औद्योगिक और माल परिवहन की दृष्टि से अहम है। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से बंदरगाह और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी माल ढुलाई को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।
इन चारों रेल परियोजनाओं के माध्यम से करीब 410 किलोमीटर का अतिरिक्त रेल नेटवर्क तैयार होगा। परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आठ जिलों को कवर करेंगी। इनके पूरा होने के बाद करीब 6,448 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे लगभग 60 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। अतिरिक्त रेल लाइनों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी। फिलहाल कई महत्वपूर्ण मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों को एक ही नेटवर्क पर चलाना पड़ता है, जिसके कारण कई बार ट्रेनों की गति और समय-सारिणी प्रभावित होती है। नई लाइनों के निर्माण से इस दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
रेलवे के अनुसार, इन परियोजनाओं से यात्री परिवहन के साथ माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी। इससे उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सुविधा होगी। साथ ही कृषि उपज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही भी अधिक प्रभावी हो सकती है। इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा किए जाने की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि इनके माध्यम से हर साल अतिरिक्त 76 मिलियन टन माल परिवहन की क्षमता विकसित हो सकती है। खास तौर पर कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, वाहन और अनाज के परिवहन में इन रेल मार्गों की अहम भूमिका रहेगी।
बिहार के लिए स्वीकृत राष्ट्रीय राजमार्ग-22 परियोजना भी राज्य के परिवहन ढांचे को मजबूती देने वाली है। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा को जोड़ने वाले 82.6 किलोमीटर लंबे हिस्से को चार लेन में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 3,590.73 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं के महत्व पर बात करते हुए हावड़ा-चेन्नई रेल मार्ग को देश के सबसे महत्वपूर्ण रेल मार्गों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग एक महत्वपूर्ण मुख्य रेल लाइन है और इसके विस्तार तथा क्षमता बढ़ाने से देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों के बीच रेल परिवहन को मजबूती मिलेगी।

















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