हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक मंच तक पहुंच गई है। शिमला स्थित राजीव भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे लोगों को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जो संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं हैं। नेगी के बयान से कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी और असंतोष एक बार फिर सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के लिए लंबे समय से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ‘जयचंदों’ और भाजपा के ‘स्लीपर सेल’ के तौर पर काम करने वाले लोगों को संगठन में महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं। उनके इस बयान को प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
मंत्री ने यह टिप्पणी शिमला के राजीव भवन में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आदिवासी/अनुसूचित जनजाति विभाग के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान की। कार्यक्रम में लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने विभाग की नई प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष विनय कुमार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। जगत सिंह नेगी ने अपने संबोधन के दौरान संगठन में जिम्मेदारियां बांटने की प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसके कार्यकर्ताओं से होती है और ऐसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा संगठन को कमजोर कर सकती है, जिन्होंने कठिन समय में पार्टी का साथ दिया है।
उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर पदों पर नियुक्ति करते समय कार्यकर्ताओं की निष्ठा और लंबे समय तक किए गए योगदान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि संगठन में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जाती है, जो पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं, तो इसका नुकसान आने वाले समय में पार्टी को उठाना पड़ सकता है। नेगी ने ‘जयचंदों’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए पार्टी के भीतर ऐसे तत्वों पर निशाना साधा, जिन्हें वह संगठन के हितों के खिलाफ काम करने वाला मानते हैं। उन्होंने भाजपा के ‘स्लीपर सेल’ के रूप में काम करने वालों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी व्यक्ति का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद मौजूद हैं। कांग्रेस के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में पार्टी सरकार में है और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे समय में सरकार के वरिष्ठ मंत्री की ओर से संगठन की नियुक्तियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठना पार्टी के अंदर चल रही असहमति को उजागर करता है।
अनुराधा राणा ने संभाली आदिवासी विभाग की कमान
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आदिवासी/अनुसूचित जनजाति विभाग की नई प्रदेश अध्यक्ष अनुराधा राणा का पदभार ग्रहण समारोह था। लाहौल-स्पीति से विधायक अनुराधा राणा को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया की मौजूदगी भी रही। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष विनय कुमार सहित कई नेताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की पहुंच बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने को लेकर भी चर्चा हुई।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आदिवासी क्षेत्रों की अपनी खास अहमियत है। लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में आदिवासी विभाग की जिम्मेदारी एक निर्वाचित विधायक को सौंपे जाने को संगठन के स्तर पर अहम कदम माना जा रहा है।
हालांकि, पदभार ग्रहण समारोह के दौरान सामने आए जगत सिंह नेगी के बयान ने कार्यक्रम की राजनीतिक चर्चा को और व्यापक बना दिया। संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उनकी नाराजगी ने कांग्रेस के भीतर चल रही उस बहस को फिर सामने ला दिया है, जिसमें पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग उठती रही है। कांग्रेस में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार में शामिल वरिष्ठ नेता यदि संगठन के फैसलों को लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति जताते हैं, तो इससे पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान का संकेत मिलता है।
जगत सिंह नेगी के बयान के बाद अब पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज हो सकती है कि संगठनात्मक नियुक्तियों के लिए किन मानकों को अपनाया जा रहा है। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि उन्हें संगठन में उचित जिम्मेदारियां दी जाएं। दूसरी ओर, नेतृत्व के सामने यह चुनौती रहती है कि संगठन को मजबूत करने के लिए नए चेहरों और अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं को भी अवसर दिया जाए। नेगी का बयान इसी व्यापक राजनीतिक बहस के बीच आया है। उन्होंने जिस तरह से पार्टी के भीतर ‘जयचंदों’ और भाजपा के ‘स्लीपर सेल’ का जिक्र किया, उससे साफ है कि वह संगठन के कुछ फैसलों से संतुष्ट नहीं हैं। उनके बयान को पार्टी के अंदर चल रही असहमति के खुले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस नेतृत्व जगत सिंह नेगी के बयान को किस तरह लेता है और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों पर पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल इतना जरूर है कि राजीव भवन में एक औपचारिक संगठनात्मक कार्यक्रम के दौरान सामने आया यह बयान हिमाचल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ गया है।हिमाचल कांग्रेस के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की होगी। यदि पार्टी के भीतर पदों और जिम्मेदारियों को लेकर असंतोष बढ़ता है, तो इसका असर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर भी पड़ सकता है। वहीं, यदि नेतृत्व समय रहते नाराजगी को दूर करने और कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा कायम करने में सफल रहता है, तो संगठन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

















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