छात्रों के बीच फिर राहुल गांधी, आज पुणे में करेंगे ‘छात्रों की गूंज’, पेपर लीक से शिक्षा व्यवस्था तक उठाएंगे सवाल

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के चौथे चरण में छात्रों से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी लगातार देश के युवाओं और विद्यार्थियों के बीच पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका फोकस खासतौर पर शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, युवाओं के भविष्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर है। पुणे में होने वाला यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है, जब देश में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच लगातार कई सवाल उठते रहे हैं। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की शुरुआत राहुल गांधी ने छात्रों के साथ सीधे संवाद के उद्देश्य से की थी। अब तक वह अलग-अलग शहरों में विद्यार्थियों से मुलाकात कर चुके हैं और उनकी समस्याओं को सीधे सुनने के साथ-साथ सार्वजनिक मंच से भी उठाते रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि देश के युवाओं की आवाज को केवल संसद तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी बात सीधे सामने रखने का अवसर भी मिलना चाहिए।

पुणे में होने वाला कार्यक्रम इस श्रृंखला का चौथा प्रमुख कार्यक्रम होगा। इससे पहले राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में 17 जून को छात्रों के साथ संवाद किया था। इसके बाद 17 जुलाई को उन्होंने देहरादून में विद्यार्थियों से बातचीत की। तीसरा कार्यक्रम 8 अगस्त को प्रयागराज में आयोजित किया गया था। इन कार्यक्रमों में छात्रों ने अपनी पढ़ाई, परीक्षाओं, भविष्य, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां राहुल गांधी के सामने रखीं।

राहुल गांधी ने इन संवाद कार्यक्रमों में केवल भाषण देने पर जोर नहीं दिया, बल्कि छात्रों और शिक्षकों को भी मंच पर अपनी बात रखने का अवसर दिया। कई मौकों पर उन्होंने विद्यार्थियों से सीधे सवाल पूछे और उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की। उनका जोर इस बात पर रहा है कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर फैसले लेते समय छात्रों और शिक्षकों की वास्तविक परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इन कार्यक्रमों के दौरान पेपर लीक का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से छात्रों पर पड़ने वाले असर को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि एक छात्र वर्षों तक मेहनत करता है, परीक्षा की तैयारी में समय और पैसा लगाता है, लेकिन अगर परीक्षा में गड़बड़ी हो जाए तो उसकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के बेहतर अवसर भी मिलें। वह युवाओं की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दे के बजाय देश के भविष्य से जुड़े सवाल के तौर पर पेश करते रहे हैं।

800 छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचेगा कार्यक्रम

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 19 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद स्पष्ट किया था कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया था कि इस अभियान को देश के करीब 800 छोटे शहरों और कस्बों तक ले जाने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल बड़े शहरों के विद्यार्थियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में पढ़ने वाले युवाओं की समस्याओं को भी सामने लाना है। कांग्रेस की इस योजना के तहत राहुल गांधी सभी 800 स्थानों पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रहेंगे। इनमें से कुछ चुनिंदा शहरों और कस्बों में वह स्वयं कार्यक्रम में शामिल होंगे और छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। बाकी स्थानों पर अभियान को पार्टी के अन्य नेताओं और संगठन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। पुणे का कार्यक्रम इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। पुणे देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी देश के अलग-अलग हिस्सों से पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में राहुल गांधी के लिए छात्रों के साथ संवाद का यह कार्यक्रम राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। इनमें परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक, प्रवेश परीक्षाओं की प्रक्रिया, शिक्षा की बढ़ती लागत, रोजगार के अवसर और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। राहुल गांधी पहले भी इन विषयों पर छात्रों के साथ बातचीत कर चुके हैं। ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए कांग्रेस की कोशिश युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की भी है। देश की राजनीति में युवा और छात्र वर्ग लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों से लेकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे युवाओं तक, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे सीधे उनके भविष्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे में कांग्रेस इन विषयों को लगातार उठाकर युवाओं से संवाद स्थापित करना चाहती है।

राहुल गांधी के पिछले कार्यक्रमों में जिस तरह छात्रों और शिक्षकों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया, उससे यह अभियान पारंपरिक राजनीतिक सभाओं से अलग नजर आता है। मंच पर केवल नेताओं के भाषण के बजाय छात्रों की समस्याओं और सवालों को जगह देने की कोशिश की जा रही है। इससे कांग्रेस का दावा है कि वह युवाओं की बात सीधे सुनने और उसे राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने का प्रयास कर रही है। पुणे में होने वाला चौथा कार्यक्रम इस अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम होगा। इसके बाद भी ‘छात्रों की गूंज’ के तहत अलग-अलग शहरों और कस्बों में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। 

800 छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य बताता है कि कांग्रेस इस अभियान को सीमित कार्यक्रमों के बजाय व्यापक जनसंपर्क अभियान के रूप में आगे ले जाना चाहती है। राहुल गांधी लगातार छात्रों के बीच जाकर उनके सवाल सुन रहे हैं। अब पुणे में होने वाले कार्यक्रम में भी उनकी कोशिश यही रहेगी कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सीधे विद्यार्थियों की आवाज के साथ सामने रखा जाए। आने वाले दिनों में यह अभियान कितनी व्यापक पहुंच बनाता है और छात्रों के बीच इसका कितना असर होता है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *