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हिमाचल में चुनाव से पहले सीएम सुक्खू का बड़ा दावा, बोले- भाजपा 16 विधायक नहीं जीत पाएंगे दोबारा

हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अभी से तेज होने लगी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। सुक्खू का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के मौजूदा विधायकों में से बड़ी संख्या को हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के 28 मौजूदा विधायकों में से 16 विधायक अगला चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच पाएंगे। मुख्यमंत्री ने इसके पीछे भाजपा के भीतर चल रही कथित गुटबाजी और नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान को प्रमुख वजह बताया है। सुक्खू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में विपक्षी पार्टी एकजुट नहीं है, बल्कि पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग नेता अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर सक्रिय हैं और विभिन्न स्थानों पर जाकर खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जब किसी राजनीतिक दल में नेतृत्व को लेकर इस तरह की खींचतान चलती है तो उसका असर संगठन और चुनावी तैयारियों पर भी पड़ता है। मुख्यमंत्री ने भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी पिछली बार के मुकाबले भी कम सीटों पर सिमट सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश में कांग्रेस एक बार फिर सरकार बनाएगी। सुक्खू के इस बयान को भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर निशाना साधने के साथ-साथ कांग्रेस की चुनावी तैयारियों और अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि भाजपा के नेता आगामी चुनाव को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा के अलग-अलग नेता खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताने में जुटे हैं तो पार्टी एकजुट होकर चुनाव का सामना कैसे करेगी? सुक्खू के अनुसार, भाजपा के भीतर चल रही यह खींचतान केवल नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर विधायकों और संगठन के अलग-अलग स्तरों पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के अलग-अलग गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। एक गुट अपने नेताओं को आगे बढ़ाने में लगा है, जबकि दूसरा गुट अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करना चाहता है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भाजपा के भीतर एक ऐसा गुट है जो नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को उनके पद से हटाना चाहता है। 

उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए बयान दे रहे हैं और चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री पद को लेकर दावेदारी पेश कर रहे हैं। सुक्खू ने भाजपा नेताओं की ओर से वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलेंगी, इसका फैसला नेताओं के दावों से नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के मतदान से होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेता भले ही अपनी जीत को लेकर कितने भी दावे कर लें, लेकिन अंतिम फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि भाजपा के 28 मौजूदा विधायकों में से 16 अगला चुनाव नहीं जीत पाएंगे और पार्टी की सीटों की संख्या पिछली बार से भी कम रह सकती है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 सदस्यीय विधानसभा में 40 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि भाजपा को 25 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों और दलबदल के चलते सदन की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव आया। 

वर्तमान चुनावी परिदृश्य को देखते हुए दोनों दलों ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां संगठन को मजबूत करने और अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के कामकाज को जनता के बीच रखने की तैयारी में जुटी है। मुख्यमंत्री सुक्खू का 16 विधायकों की हार का दावा इसी राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है। इसे भाजपा की चुनावी तैयारियों पर सवाल उठाने और कांग्रेस की ओर से आगामी चुनाव के लिए अपना राजनीतिक एजेंडा सामने रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस दावे की पुष्टि अभी किसी चुनावी सर्वेक्षण या स्वतंत्र आकलन से नहीं हुई है। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसका जवाब भाजपा अपने बयानों और चुनावी तैयारियों के जरिए दे रही है।

जयराम ठाकुर का पलटवार, भाजपा ने भी किया सत्ता में वापसी का दावा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के भाजपा में पांच गुट होने और 16 विधायकों के चुनाव हारने संबंधी दावों पर भाजपा की ओर से भी लगातार जवाब दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के बयानों पर निशाना साधते हुए उनसे अपनी सरकार के कामकाज का हिसाब जनता के सामने रखने को कहा है। जयराम ठाकुर ने 21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया था कि प्रदेश में विकास और जनकल्याण के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाजपा की कथित गुटबाजी को लेकर बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने सुक्खू को चुनौती दी थी कि भाजपा के गुटों की संख्या गिनाने के बजाय वह अपनी सरकार की चार प्रमुख उपलब्धियां बताएं। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि प्रदेश की जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका जवाब मिलेगा। उन्होंने सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। 

भाजपा नेता का आरोप है कि कांग्रेस सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है और जनता के बीच उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, 22 अक्टूबर को शिमला जिले के ठियोग में आयोजित भाजपा के एक कार्यक्रम में जयराम ठाकुर और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलने का दावा किया था। दोनों नेताओं ने स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के प्रदर्शन को अपने पक्ष में बताते हुए कहा था कि प्रदेश में राजनीतिक बदलाव का माहौल बन रहा है। जयराम ठाकुर ने भी दावा किया कि भाजपा अगले विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। 

इसके बाद 30 अक्टूबर को नालागढ़ में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर करने का दावा दोहराया। इस तरह हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले ही कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी मुकाबला तेज हो गया है। एक ओर मुख्यमंत्री सुक्खू भाजपा के भीतर कथित गुटबाजी का मुद्दा उठाकर उसके चुनावी दावों को चुनौती दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जयराम ठाकुर कांग्रेस सरकार के कामकाज और चुनावी वादों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। दोनों दलों के नेता अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन इन दावों के बीच सबसे अहम भूमिका प्रदेश के मतदाताओं की होगी। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव ही तय करेगा कि हिमाचल की जनता मौजूदा कांग्रेस सरकार को दोबारा मौका देती है या भाजपा को सत्ता में वापसी का अवसर मिलता है। 

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