देश में अगली जनगणना को लेकर तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। करीब एक दशक के लंबे अंतराल के बाद होने जा रही जनगणना 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। इस बार न केवल देश की आबादी का नया आंकड़ा सामने आएगा, बल्कि जातिगत स्थिति, डिजिटल सुविधाओं की पहुंच, बैंक खातों और पहचान से जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। खास बात यह है कि 1931 के बाद पहली बार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य सभी जातियों की गणना के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। इससे देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को नए सिरे से समझने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जनगणना की प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास से संबंधित जानकारी जुटाने का काम अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जा चुका है। इसके बाद अब दूसरे चरण की तैयारी की जा रही है, जिसमें देश की वास्तविक जनसंख्या की गणना की जाएगी।
इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी जुटाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक मुख्य जनसंख्या गणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी।
इस बार सरकार ने लोगों को जनगणना की प्रक्रिया में सीधे भागीदारी का अवसर देने के लिए स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लोग अपने परिवार और सदस्यों से संबंधित निर्धारित जानकारियां स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इससे गणनाकर्मियों के घर पहुंचने से पहले ही संबंधित परिवार का विवरण डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सकेगा। हालांकि, इस व्यवस्था के तहत दर्ज की गई जानकारी का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
जनगणना के दौरान कोई भी व्यक्ति या परिवार छूट न जाए, इसके लिए मुख्य गणना के बाद पुनरीक्षण चरण भी रखा गया है।
एक मार्च से पांच मार्च 2027 तक चलने वाले इस चरण में छूटे हुए लोगों और परिवारों को गणना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए एक मार्च 2027 की रात 12 बजे को संदर्भ तिथि निर्धारित किया गया है। यानी जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों को तय संदर्भ समय के आधार पर दर्ज किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य जनगणना के आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यापक बनाना है।
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता जातिगत गणना को माना जा रहा है। वर्ष 1931 के बाद पहली बार देश में सभी जातियों से संबंधित व्यापक जानकारी जुटाने की व्यवस्था की जा रही है। अभी तक जनगणना में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की गणना अलग से होती रही है, लेकिन इस बार अन्य जातियों के लिए भी प्रश्नावली में खुला विकल्प रखा जाएगा। इसके माध्यम से लोग अपनी जाति का विवरण दर्ज करा सकेंगे। जातिगत गणना का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। ऐसे में इसके आंकड़े सामने आने के बाद सामाजिक संरचना, विभिन्न समुदायों की आबादी और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू हो सकती है।
इस बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप देने पर भी विशेष जोर दिया गया है। आंकड़ों को एकत्र करने और सुरक्षित रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। स्व-गणना की सुविधा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे लोगों को अपनी जानकारी स्वयं भरने का अवसर मिलेगा और गणनाकर्मियों के काम में भी सहूलियत होगी। हालांकि, पूरे देश में जनगणना का कार्यक्रम एक ही समय-सारिणी के अनुसार नहीं चलेगा। कुछ राज्यों और क्षेत्रों की परिस्थितियों को देखते हुए अलग व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित होने के कारण वहां गणना की अवधि अलग रखी गई है। इन राज्यों में घर-घर जाकर जनसंख्या गणना के लिए एक दिसंबर से शुरू होने वाली 35 दिनों की अलग समय-सीमा निर्धारित की गई है। वहीं, हिंसा प्रभावित मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखा गया है। वहां आगे की स्थिति को देखते हुए नई समय-सारिणी घोषित की जाएगी।
बर्फबारी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के उन इलाकों में, जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है, जनगणना का काम पहले ही पूरा कराया गया है। इन गैर-समकालिक क्षेत्रों में सितंबर 2026 के दौरान जनसंख्या गणना की प्रक्रिया पूरी की गई, ताकि मौसम की कठिनाइयों के कारण कोई परिवार या व्यक्ति गणना से वंचित न रह जाए।
40 सवालों से सामने आएगी परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल तस्वीर
जनगणना 2027 में इस बार कुल 40 सवालों के माध्यम से लोगों और उनके परिवारों से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी। इन सवालों में परंपरागत जनसांख्यिकीय विवरणों के साथ कई ऐसे विषय भी शामिल किए गए हैं, जो बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े हैं। उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति और धर्म जैसी सामान्य जानकारियों के अलावा डिजिटल साक्षरता, पहचान संबंधी दस्तावेजों और बैंकिंग सुविधाओं तक लोगों की पहुंच का भी आकलन किया जाएगा। प्रश्नावली में मोबाइल फोन नंबर, आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा भारतीय पासपोर्ट रखने वाले लोगों से पासपोर्ट संख्या का विवरण भी लिया जाएगा। परिवार के पास कितने बैंक खाते हैं, इस संबंध में भी जानकारी जुटाई जाएगी। इन सवालों के जरिए देश में वित्तीय सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं की पहुंच का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
इस बार कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित जानकारी को भी प्रश्नावली में शामिल किया गया है। लोगों से टीकाकरण के स्थान के बारे में पूछा जाएगा। इसके अलावा परिवार के सदस्यों के माता-पिता का विवरण, जीवनसाथी का नाम और घोषित नागरिकता से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इन जानकारियों के माध्यम से जनसंख्या की संरचना और परिवारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
जनगणना में जुटाए जाने वाले आंकड़े केवल आबादी की संख्या जानने तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका इस्तेमाल भविष्य की विकास योजनाओं, सरकारी नीतियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए भी किया जाएगा। अलग-अलग क्षेत्रों में आबादी के अनुपात और परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर योजनाओं की जरूरतों का आकलन करने में भी मदद मिलेगी।
जातिगत गणना और डिजिटल सुविधाओं से जुड़े सवाल इस बार की जनगणना को पहले से अलग बनाते हैं। इसके आंकड़ों का इंतजार राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संगठनों और नीति निर्धारकों तक को रहेगा। खासकर जातिगत आंकड़े सामने आने के बाद आरक्षण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर नए सिरे से चर्चा होने की संभावना है। कुल मिलाकर जनगणना 2027 देश की आबादी की नई तस्वीर सामने लाने के साथ सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल बदलावों का व्यापक दस्तावेज तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।


















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