मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से प्रस्तावित ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम पर मौसम ने पानी फेर दिया है। दिल्ली में खराब मौसम और बारिश के चलते विपक्ष ने इस कार्यक्रम को एक दिन के लिए टालने का फैसला किया है। पहले यह आयोजन 30 अक्टूबर को होना था, लेकिन अब इसे 31 अक्टूबर 2026 को निर्धारित समय पर आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सरकारी आवास 10, राजाजी मार्ग पर होगा। इस कार्यक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवालों को उठाने का मंच बताया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित इस आयोजन में इंडिया गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगी। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उसकी आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से सामने लाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
विपक्षी गठबंधन की रणनीति के तहत इस कार्यक्रम को सामान्य राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के बजाय एक प्रतीकात्मक संसदीय कार्यवाही की शक्ल देने की तैयारी की गई है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्यक्रम में करीब 30 वक्ता हिस्सा लेंगे, जिनमें 21 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से प्रभावित लोगों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा।
कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कार्यवाही की शुरुआत करेंगे और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रस्ताव पेश करेंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अंत में अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद प्रस्ताव पर मतदान कराया जाएगा। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार पूरी कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगी। इस आयोजन के माध्यम से विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर अपने सवाल उठाने की तैयारी में है। राहुल गांधी पहले ही इस अभियान को संविधान, लोकतंत्र और प्रत्येक भारतीय के मताधिकार की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बता चुके हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान कई जगह मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। गठबंधन इन मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहा है। हालांकि, इस आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि ‘जन महाभियोग’ संवैधानिक या संसदीय प्रक्रिया के तहत होने वाला वास्तविक महाभियोग नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है, जिसके जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी नाराजगी और आरोप सार्वजनिक रूप से दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया अलग है। विपक्ष का यह कार्यक्रम उसी औपचारिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
एसआईआर और कथित वोट चोरी के खिलाफ एक नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली
इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जन महाभियोग कार्यक्रम के साथ ही अपने विरोध अभियान को आगे बढ़ाने की भी तैयारी की है। इसके तहत एक नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी महारैली आयोजित की जाएगी। विपक्ष ने इसे विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के खिलाफ अपनी लड़ाई का अगला चरण बताया है। इस रैली के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मिलने की जानकारी भी सामने आई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, रैली सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस महारैली में इंडिया गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वाम दल और अन्य विपक्षी दलों के नेता भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज करा सकते हैं। विपक्षी दलों की कोशिश है कि अलग-अलग राज्यों में एसआईआर को लेकर उठ रही आपत्तियों को एक साझा मंच दिया जाए और इस मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के सामने अपनी मांगें रखी जाएं।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए और नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए। गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे इन राजनीतिक आरोपों पर आयोग का पक्ष अलग है। ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच बहस का विषय बना हुआ है। दिल्ली में लगातार दो दिनों तक होने वाले इन कार्यक्रमों को विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
31 अक्टूबर को खड़गे के आवास पर होने वाले प्रतीकात्मक जन महाभियोग में जहां विपक्ष अपनी शिकायतें और आरोप सामने रखेगा, वहीं एक नवंबर को रामलीला मैदान की महारैली के जरिए इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की कोशिश होगी। बारिश के कारण कार्यक्रम की तारीख में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन विपक्ष ने अपने विरोध अभियान के बाकी कार्यक्रमों को जारी रखने का फैसला किया है। अब निगाहें 31 अक्टूबर की बैठक और एक नवंबर की महारैली पर रहेंगी।


















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