राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले चरण की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्र जमा कराए गए और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है। निर्वाचन अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक, कुल मतदाताओं में करीब 33 प्रतिशत यानी लगभग 47 लाख लोगों के नाम आगामी मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाने की आशंका है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हट जाएंगे। मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद संबंधित मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। दिल्ली में इस समय कुल 1,45,10,299 मतदाता दर्ज हैं। एसआईआर के पहले चरण में बूथ स्तर के अधिकारियों ने मतदाताओं से गणना प्रपत्र जमा कराए। इसके बाद प्राप्त प्रपत्रों को डिजिटल रूप में दर्ज किया गया। अब निर्वाचन आयोग की अगली बड़ी प्रक्रिया मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित करने की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 24 अगस्त को मसौदा सूची सामने आएगी। इसके बाद जिन लोगों के नाम सूची में नहीं होंगे, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकेंगे।
इस पूरी कवायद का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके लिए मतदाताओं को 2002 की आधार सूची से जोड़ने के लिए आंशिक रूप से पहले से भरे हुए गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए गए थे। 30 जून से शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में अधिकारियों ने घर-घर जाकर प्रपत्र उपलब्ध कराने और उन्हें वापस लेने का काम किया। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख यानी 67.18 प्रतिशत के गणना प्रपत्र सफलतापूर्वक डिजिटल किए जा चुके हैं। वहीं करीब 47.63 लाख मतदाताओं के प्रपत्र या तो जमा नहीं हुए या उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार नहीं हो सका। यही वजह है कि आगामी मसौदा सूची में लगभग 47 लाख नामों के छूटने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि निर्वाचन अधिकारियों ने साफ किया है कि मसौदा सूची में नाम नहीं आने को अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। ऐसे मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने का पूरा अवसर मिलेगा। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान संबंधित व्यक्ति जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकेंगे। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक और पात्र मतदाता किसी तकनीकी या प्रक्रियागत कारण से अंतिम मतदाता सूची से बाहर न रह जाएं।
एसआईआर के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की स्थिति में बड़ा अंतर देखने को मिला है। कुछ क्षेत्रों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रपत्रों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो चुका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत के आसपास या उससे भी नीचे रहा। निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े बताते हैं कि रोहिणी में प्रपत्रों के डिजिटलीकरण का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जबकि तुगलकाबाद में स्थिति सबसे कमजोर रही। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,50,398 मतदाता हैं। इनमें से 1,25,478 यानी 83.43 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण किया गया। वहीं 24,920 प्रपत्र ऐसे रहे जिन्हें एकत्र नहीं किया जा सका। प्रतिशत के लिहाज से रोहिणी दिल्ली के सभी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे आगे रहा।
रोहिणी के बाद शकूरबस्ती का प्रदर्शन भी बेहतर रहा, जहां 81.26 प्रतिशत प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ। राजौरी गार्डन में यह आंकड़ा 79.14 प्रतिशत, मंगोलपुरी में 78.76 प्रतिशत और उत्तम नगर में 77.76 प्रतिशत रहा। इन विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के प्रपत्र डिजिटल किए जा चुके हैं। इसके उलट दक्षिण-पूर्वी दिल्ली का तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र डिजिटलीकरण के मामले में सबसे पीछे रहा। यहां केवल 52.15 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का ही डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सका। यानी लगभग 47.85 प्रतिशत प्रपत्र ‘एकत्र नहीं किए जा सके’ की श्रेणी में रहे। इसी वजह से तुगलकाबाद में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में नहीं आने की आशंका है।
24 अगस्त को मसौदा सूची, 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची
दिल्ली में एसआईआर के पहले चरण के आंकड़े सामने आने के बाद अब सभी की नजर 24 अगस्त पर है। इसी दिन मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। मसौदा सूची में जिन मतदाताओं के नाम नहीं मिलेंगे, उन्हें दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। निर्वाचन अधिकारियों के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि इस चरण में वास्तविक मतदाताओं की पात्रता की जांच कर उन्हें अंतिम सूची में शामिल किया जाए। निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों के नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें एएसडीडी श्रेणी के तहत नोटिस भेजे जाएंगे। एएसडीडी का अर्थ अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव वाले नामों से है। इस श्रेणी का इस्तेमाल ऐसे मतदाताओं की पहचान के लिए किया जा रहा है जिनके संबंध में मतदाता सूची में स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।
ऐसे मतदाताओं को अपनी नागरिकता और पते से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया का मकसद यही है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम केवल प्रपत्र जमा नहीं होने या सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण मसौदा सूची से छूट गया है तो उसे अंतिम सूची में शामिल किया जा सके। दिल्ली के अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में भी प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की स्थिति अलग-अलग रही। चांदनी चौक में यह दर 61.02 प्रतिशत रही, जो इन क्षेत्रों में सबसे कम बताई गई है। वहीं मुस्तफाबाद में 71.91 प्रतिशत, मटिया महल में 75.50 प्रतिशत, सीलमपुर में 76.63 प्रतिशत, बाबरपुर में 73 प्रतिशत और बल्लीमारान में 67.35 प्रतिशत प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के सभी विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर प्रक्रिया की प्रगति एक जैसी नहीं रही। कहीं बड़ी संख्या में प्रपत्र डिजिटल हो चुके हैं तो कहीं बड़ी संख्या में मतदाताओं के प्रपत्र जमा नहीं हो सके। अब असली तस्वीर 24 अगस्त को मसौदा सूची जारी होने के बाद सामने आएगी।
मसौदा सूची में नाम छूटने वाले मतदाताओं के लिए इसके बाद की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्हें निर्धारित समय में दावा दाखिल कर अपने मतदाता अधिकार को सुरक्षित करना होगा। निर्वाचन अधिकारियों के लिए भी यह चरण चुनौतीपूर्ण रहेगा, क्योंकि करीब 47 लाख संभावित रूप से छूटे नामों की स्थिति की जांच करनी होगी। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। यानी 24 अगस्त को मसौदा सूची आने से लेकर 27 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियों के निस्तारण का महत्वपूर्ण चरण चलेगा। इस दौरान यह तय होगा कि मसौदा सूची से बाहर रहने वाले कितने मतदाता अंतिम सूची में वापस शामिल होते हैं। इसलिए फिलहाल 47 लाख नामों के छूटने को अंतिम कटौती मानना सही नहीं होगा। यह आंकड़ा उन मतदाताओं से जुड़ा है जिनके गणना प्रपत्र जमा या डिजिटल नहीं हो पाए हैं। अंतिम निर्णय दावे, आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची ही दिल्ली में वास्तविक रूप से पात्र मतदाताओं की तस्वीर स्पष्ट करेगी।

















Leave a Reply