नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवारी का अद्भुत संयोग आज, सोमवार को देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का महासागर लेकर आया। भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा के इस पावन अवसर पर सुबह से ही मंदिर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नाग पंचमी के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और नाग देवता की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ऐसे में सावन के तीसरे सोमवार के साथ नाग पंचमी के संयोग ने बाबा बैद्यनाथ धाम की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और पवित्र गंगाजल से जलाभिषेक के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु देवघर पहुंचे। रविवार रात से ही मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगातार लंबी होती चली गई। रात करीब साढ़े दस बजे तक कतार लगभग पांच किलोमीटर तक पहुंच चुकी थी। इसके बाद रात बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई और सोमवार सुबह तक दर्शन के लिए लगी कतार 12 किलोमीटर से अधिक लंबी हो गई। देवघर की सड़कों से लेकर बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक चारों ओर गेरुआ वस्त्र पहने कांवरियों का हुजूम दिखाई दिया। ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच भी कांवरियों के कदम नहीं रुके। कंधे पर कांवर, उसमें पवित्र गंगाजल और मन में बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट आस्था लिए श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी कर बाबा धाम पहुंचे।
सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 108 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ भी सोमवार को शिवभक्ति में डूबा नजर आया। कांवरियों के जत्थे लगातार बाबा धाम की ओर बढ़ते रहे। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा के दौरान भक्ति गीत और शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। उनके लिए यह यात्रा केवल कठिन पैदल सफर नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और आस्था की परीक्षा भी है। सावन की तीसरी सोमवारी वैसे ही शिवभक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इस बार नाग पंचमी के साथ इसका संयोग होने से उत्साह और बढ़ गया। सोमवार को सिंह संक्रांति और मां मनसा की वार्षिक पूजा का भी अवसर है। इसके साथ ही बांग्ला श्रावण का समापन भी हो रहा है। धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण अवसरों के एक साथ आने से बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्ति और श्रद्धा का माहौल और गहरा हो गया।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। लंबी कतार के बावजूद भक्तों में उत्साह कम नहीं हुआ। कई श्रद्धालु घंटों इंतजार के बाद बाबा का जलाभिषेक करने और दर्शन पाने को अपनी सबसे बड़ी सौभाग्य की बात मानते नजर आए। कांवरियों के लिए बाबा धाम पहुंचना यात्रा का अंतिम पड़ाव जरूर है, लेकिन जलाभिषेक के बाद उनके चेहरे पर संतोष और आस्था की अलग ही चमक दिखाई दी। इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ धाम में 3,17,494 श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया था। दूसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर 3,69,449 हो गई। तीसरी सोमवारी पर भीड़ और बढ़ने की संभावना पहले से जताई जा रही थी। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक करीब चार लाख श्रद्धालु सोमवार को बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। अधिकारियों की टीमें लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं, ताकि इतनी बड़ी भीड़ के बीच किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
नाग पंचमी और तीसरी सोमवारी के महासंयोग ने बढ़ाई बाबा धाम की रौनक
तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी का संयोग बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नाग पंचमी भगवान शिव और नाग देवता की आराधना से जुड़ा प्रमुख पर्व है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए शिवभक्तों के लिए नाग पंचमी का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन के पवित्र महीने में नाग पंचमी और सोमवार का एक साथ पड़ना श्रद्धालुओं के उत्साह को कई गुना बढ़ा रहा है। बाबा बैद्यनाथ धाम में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह केवल दर्शन और जलाभिषेक का अवसर नहीं, बल्कि कई धार्मिक पर्वों और परंपराओं के एक साथ जुड़ने का दिन भी है। नाग पंचमी के अवसर पर जहां नाग देवता की पूजा की जा रही है, वहीं शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ पर गंगाजल अर्पित कर रहे हैं। सिंह संक्रांति और मां मनसा की वार्षिक पूजा का भी संयोग इस दिन को धार्मिक रूप से खास बना रहा है।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में सावन के अवसर पर लगाई गई विशेष बिल्वपत्र प्रदर्शनी का भी सोमवार को समापन हो रहा है। भगवान शिव की पूजा में बिल्वपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। प्रदर्शनी को देखने के लिए भी श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के चलते पूरे दिन भक्ति का माहौल बना रहा। उधर, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार व्यवस्थाओं पर नजर रखे हुए हैं। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने तीसरी सोमवारी की सुबह रूटलाइन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नंदन पहाड़, कालीबाड़ी और बरमसिया से लेकर बाबा मंदिर परिसर तक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था का जायजा लिया।
प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि लंबी कतार के बावजूद श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। कांवरिया पथ से लेकर मंदिर परिसर तक पुलिस बल और प्रशासनिक टीमों की तैनाती की गई है। भीड़ बढ़ने के साथ अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सावन की तीसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर देवघर की धार्मिक आस्था और कांवर यात्रा की विशाल परंपरा की तस्वीर सामने रख दी है। नाग पंचमी के पावन पर्व के साथ तीसरी सोमवारी के संयोग ने इस बार के आयोजन को और विशेष बना दिया। बारिश की फुहार, लंबी कतार, कंधों पर कांवर और जुबां पर ‘बोल बम’ के जयकारों के बीच लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के चरणों में आस्था अर्पित करने पहुंचे। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी भीड़ को सुरक्षित और सुचारु तरीके से दर्शन कराना है।

















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