मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाने वाली कांग्रेस ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान और तेज कर दिया है। मंगलवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, एसआईआर की प्रक्रिया समाप्त करने और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी की। करीब ढाई घंटे चली सीडब्ल्यूसी की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा एसआईआर को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। बैठक में राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘वोट चोरी’ अभियान को भी चर्चा के केंद्र में रखा गया। कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कार्य समिति के सदस्यों ने राहुल गांधी को चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के लिए बधाई दी।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि पिछले करीब 18-19 महीनों से कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाती रही है। उनके मुताबिक पार्टी ने कई ऐसे मामले सामने रखे हैं, जिनसे चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर भी गंभीर प्रश्न सामने आए हैं। हालांकि ये कांग्रेस के आरोप हैं और चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे आरोपों का खंडन किया है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी ने एसआईआर को लेकर अपनी मांगों को भी स्पष्ट किया। कांग्रेस मतदाता सूची में हुए बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने, हटाए गए मतदाताओं को उचित अपील का अवसर देने और राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से जुड़ा पूरा डेटा उपलब्ध कराने की मांग कर रही है।
इसके साथ ही कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई गई है। कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने भी बैठक के बाद कहा कि लोकतंत्र से जुड़े इस मुद्दे पर पार्टी राहुल गांधी के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े मामलों को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पहले भी उठाई जाती रही है। पार्टी ने इसे लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए हैं। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत कई स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
खरगे ने पीएम मोदी पर भी साधा निशाना, संसद से सड़क तक लड़ाई का ऐलान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सीडब्ल्यूसी बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सरकार की ओर से दबाव डाला जा रहा है। इसी आधार पर उन्होंने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की। खरगे ने ‘नोटबंदी’ का जिक्र करते हुए अब ‘वोटबंदी’ शब्द का इस्तेमाल किया और आरोप लगाया कि जिस तरह नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, उसी तरह कथित तौर पर मतदाताओं के अधिकारों पर असर डालने वाली प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कांग्रेस के सामने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होने की बात कही। खरगे के ये आरोप कांग्रेस के राजनीतिक रुख का हिस्सा हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सीडब्ल्यूसी में खरगे ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर पारदर्शिता की मांग भी रखी। कांग्रेस चाहती है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों, नाम जोड़ने की प्रक्रिया और किए गए बदलावों का पूरा ब्योरा राजनीतिक दलों के सामने रखा जाए। पार्टी ने गंभीर अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की है। इस बीच चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया का बचाव किया गया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है और नामों को लेकर उठाए गए सवालों के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं। ऐसे में एसआईआर को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मतभेद आगे भी बने रहने की संभावना है।
कांग्रेस अब सीडब्ल्यूसी की बैठक में बनी सहमतियों को लेकर संवाददाता सम्मेलन करने की तैयारी में है। पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर आगे ले जाने की रणनीति बना रही है। इसके अलावा विपक्षी दलों की भी 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक प्रस्तावित है, जिसमें चुनाव आयोग, एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस का अभियान अब केवल एसआईआर तक सीमित नहीं है। पार्टी मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को एक साथ उठाने की तैयारी में है। वहीं चुनाव आयोग और सरकार के रुख के बीच कांग्रेस के आरोपों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।


















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