सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार, 28 सितंबर को एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली। घरेलू सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव नीचे आए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 4,133 रुपये गिरकर 1,48,000 रुपये के करीब पहुंच गया है। इसी तरह चांदी की कीमत में भी भारी कमी आई है। एक किलोग्राम चांदी 9,297 रुपये सस्ती होकर करीब 2,23,000 रुपये पर आ गई है। सोने-चांदी के भाव में आई यह गिरावट ऐसे समय में हुई है, जब पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। घरेलू बाजार में भी निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की चाल पर बनी हुई है। इन कारकों का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।
28 सितंबर की गिरावट के बाद सोने का भाव सितंबर की शुरुआत की तुलना में काफी नीचे आ गया है। महीने की शुरुआत में जहां सोना 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं अब इसकी कीमत करीब 1.48 लाख रुपये रह गई है। यानी सितंबर के 28 दिनों में सोने की कीमत में लगभग 8 हजार रुपये की कमी आई है। चांदी की कीमत में भी इसी अवधि में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 31 अगस्त को एक किलो चांदी का भाव करीब 2.37 लाख रुपये था, जो अब घटकर लगभग 2.23 लाख रुपये रह गया है। इस तरह सितंबर में अब तक चांदी करीब 14 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।
कीमती धातुओं की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट से उन लोगों की नजर भी बाजार पर है, जो निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में जल्दबाजी के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी है। सोने को आम तौर पर आर्थिक और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव बढ़ने या आर्थिक परिस्थितियों में अस्थिरता आने पर सोने की मांग बढ़ सकती है। दूसरी ओर, ब्याज दरों और डॉलर में मजबूती जैसे कारक सोने की कीमत पर दबाव डाल सकते हैं।
ब्याज दरों से लेकर वैश्विक तनाव तक, इन वजहों से बदल रहे सोने-चांदी के भाव
सोने-चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना बताई जा रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बाजार के लिए अहम कारकों में शामिल है। ब्याज दरों में बदलाव का असर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड पर पड़ता है और इसका प्रभाव सोने की मांग तथा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
बाजार में यह धारणा भी रहती है कि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो ऐसे निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित हो सकती है, जिनसे नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती। सोना इनमें प्रमुख है। इसके उलट, जब आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक जोखिम वाले विकल्पों से पैसा निकालकर सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में सोने को समर्थन मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय तनाव भी सोने के लिए महत्वपूर्ण कारक है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। यदि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका असर कितना और कितने समय तक रहेगा, यह अन्य आर्थिक संकेतकों पर भी निर्भर करेगा।
चांदी के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है। चांदी का इस्तेमाल निवेश के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य उद्योगों में इसकी मांग रहती है। इसलिए चांदी की कीमत पर वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों का भी असर पड़ता है। सितंबर में अब तक आई गिरावट ने सोने और चांदी दोनों को पहले के उच्च स्तरों से नीचे ला दिया है। 31 अगस्त से 28 सितंबर के बीच सोने में करीब 8 हजार रुपये और चांदी में करीब 14 हजार रुपये की कमी दर्ज हुई है। हालांकि, रोजाना के भाव में स्थानीय मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमत, रुपये और डॉलर की स्थिति तथा बाजार में खरीद-बिक्री के रुझान के कारण बदलाव हो सकता है।
निवेशकों के लिए मौजूदा समय में सबसे अहम बात यह है कि केवल एक दिन की तेजी या गिरावट को देखकर फैसला न लिया जाए। सोने-चांदी की कीमतें कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती हैं। बाजार में बड़ी गिरावट आने पर कुछ निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर बन सकता है, लेकिन कीमतों में आगे और उतार-चढ़ाव की संभावना को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की नीतियों, अमेरिकी डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बाजार की नजर रहेगी। इन्हीं संकेतों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों की दिशा बदल सकती है। ऐसे में फिलहाल की गिरावट के बावजूद बाजार में पूरी तरह स्थिरता आने के संकेत नहीं हैं और दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।


















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