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उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश से बिगड़े हालात, 86 सड़कें बंद, आदि कैलाश मार्ग भी ठप, 136 पर्वतारोही फंसे

उत्तराखंड में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने एक बार फिर पहाड़ों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी के साथ लगातार हो रहे भूस्खलन से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। राज्य में आदि कैलाश मार्ग समेत 86 सड़कें बंद हैं। इनमें चमोली की 21, नैनीताल की 18 और पिथौरागढ़ की 15 सड़कें शामिल हैं। कई मार्गों पर मलबा और बोल्डर आने से आवाजाही बाधित है और सड़क खोलने का काम लगातार जारी है। सबसे गंभीर स्थिति उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बनी हुई है, जहां बर्फबारी के बीच 136 पर्वतारोही, ट्रैकर और उनके सपोर्ट स्टाफ फंसे हुए हैं। प्रशासन और बचाव दल इन लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम तेजी से बदलने और बर्फबारी के कारण राहत एवं बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उधर, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भी मौसम की मार देखने को मिली। चिरबासा के पास भूस्खलन के कारण रास्ते में फंसे करीब 1500 श्रद्धालुओं को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाला। श्रद्धालुओं को मलबे से भरे खतरनाक रास्ते से निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया गया। लगातार पत्थर गिरने के कारण इस हिस्से में आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई थी। ऐसे में बचाव दलों ने यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

उत्तराखंड में पहाड़ों पर बिगड़े मौसम का असर सिर्फ यातायात पर ही नहीं, बल्कि चारधाम और अन्य धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ा है। पिथौरागढ़ में आदि कैलाश मार्ग का बाधित होना खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इलाका लगातार बढ़ती तीर्थ और पर्यटन गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे पहले भी सितंबर में पिथौरागढ़ में भूस्खलन और तेज जलधारा के कारण आदि कैलाश यात्रा प्रभावित हुई थी। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। राज्य के चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल जैसे इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब होने पर बर्फबारी भी हो सकती है। 

पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत के कई राज्यों में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। 

हिमाचल प्रदेश में बारिश-बर्फबारी से बढ़ी ठंड

हिमाचल प्रदेश में ताजा बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद तापमान में तेजी से गिरावट आई है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.9 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है। सबसे ज्यादा असर किन्नौर के कल्पा में दिखाई दिया, जहां अधिकतम तापमान सामान्य से 12.1 डिग्री सेल्सियस कम होकर 8.2 डिग्री दर्ज किया गया। कल्पा का न्यूनतम तापमान भी 3.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हिमाचल के रोहतांग, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और स्पीति घाटी की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है। कई इलाकों में बारिश के कारण ठंड का असर बढ़ गया है। मौसम विभाग ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम बदलने पर बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। 

दिल्ली-एनसीआर से यूपी-बिहार तक बदला मौसम का मिजाज

दिल्ली-एनसीआर में भी सोमवार को मौसम बदला हुआ नजर आया। राजधानी और आसपास के इलाकों में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी बादल छाए रहने तथा कुछ जगहों पर बारिश होने का अनुमान है। तापमान में गिरावट से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। उत्तर प्रदेश में भी बारिश का दौर तेज है। कई जिलों में भारी बारिश के कारण जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

बिहार और झारखंड में भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के कई हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। मौसम में यह बदलाव बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम और सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों से जुड़ा बताया जा रहा है। फिलहाल पहाड़ी राज्यों में सबसे बड़ी चुनौती भूस्खलन और बर्फबारी के कारण बंद सड़कों को खोलने की है। उत्तराखंड में राहत एवं बचाव दल संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं। केदारनाथ मार्ग पर फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि उत्तरकाशी में फंसे पर्वतारोहियों और ट्रैकरों को निकालने का अभियान जारी है। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम साफ होने तक ऊंचाई वाले और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को रवाना होने से पहले संबंधित मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने को कहा जा रहा है।

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