हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। प्रदेश की सुक्खू सरकार और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को घेरने के लिए भाजपा ने शुक्रवार को धर्मशाला में शक्ति प्रदर्शन किया। कांगड़ा जिले के कचहरी मैदान से भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकालकर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला। इस पदयात्रा में कांगड़ा जिले के सभी 14 विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका तक कई मुद्दों पर सवाल उठाए। पदयात्रा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक असफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और पूर्व मंत्री विपिन सिंह परमार ने प्रमुख रूप से कांग्रेस को निशाने पर लिया। दोनों नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाली कांग्रेस को पहले अपने राजनीतिक व्यवहार और कार्यप्रणाली पर आत्ममंथन करना चाहिए। भाजपा ने इस पदयात्रा के माध्यम से प्रदेश की जनता के बीच कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में मौजूदा सरकार के कामकाज और कांग्रेस की राजनीति को लेकर जनता के सामने सवाल उठाना जरूरी है। धर्मशाला में निकली इस पदयात्रा को भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा और कांग्रेस की कथित अराजक राजनीति के विरोध का अभियान बताया।
कांगड़ा जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी को पार्टी ने संगठनात्मक एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में पेश किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव परिणाम जनता का फैसला होते हैं और राजनीतिक दलों को उसे स्वीकार करते हुए अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए। चुनाव में हार मिलने पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है। सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने अपने संबोधन में कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है तो वह अपनी गलतियों की समीक्षा करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और ईवीएम को दोष देने लगती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव परिणामों को स्वीकार करना और जनता के फैसले का सम्मान करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन कांग्रेस हार के बाद आत्ममंथन करने के बजाय अलग-अलग संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह रवैया लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उसके दृष्टिकोण को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव में सफलता और असफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी पार्टी को जीत मिलती है तो किसी को हार का सामना करना पड़ता है, लेकिन हार के लिए संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराना राजनीतिक परिपक्वता नहीं है। भाजपा सांसद ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी को अपनी राजनीतिक रणनीति और संगठन की कमजोरियों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के फैसले को स्वीकार करने के बजाय चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतंत्र में विश्वास को कमजोर करने वाला है। भाजपा की इस पदयात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य कांग्रेस के इसी राजनीतिक रवैये को जनता के बीच मुद्दा बनाना रहा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, जबकि उसे अपनी नीतियों और राजनीतिक फैसलों की समीक्षा करनी चाहिए।
कांग्रेस सरकार और केंद्रीय नेतृत्व पर भाजपा ने साधा निशाना
पदयात्रा में पूर्व मंत्री विपिन सिंह परमार ने भी कांग्रेस और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच कई सवाल हैं। भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों और फैसलों को लेकर असंतोष जताते हुए कहा कि कांग्रेस को जनता से किए गए वादों और उनके क्रियान्वयन पर जवाब देना चाहिए। परमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में लोकतांत्रिक मूल्यों की बात तो की जाती है, लेकिन व्यवहार में उसका रवैया अलग दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने सरकार को जिम्मेदारी सौंपी है और सरकार का दायित्व है कि वह जनहित के मुद्दों पर काम करे।
भाजपा नेताओं ने इस दौरान कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक असफलताओं की जिम्मेदारी लेने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को विवादों में घसीटने का प्रयास करती है। भाजपा ने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति से जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। धर्मशाला के कचहरी मैदान से निकली पदयात्रा में कांगड़ा जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को भाजपा ने अपने संगठन की सक्रियता का प्रमाण बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि कार्यकर्ता प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर कांग्रेस सरकार की नीतियों और उसके कामकाज से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने रखेंगे। पदयात्रा के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह प्रदेश में विपक्ष की भूमिका को लेकर सक्रिय है और सरकार के फैसलों पर लगातार सवाल उठाती रहेगी।
कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा ने एक मंच पर जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जुटाकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच पहुंचने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का आह्वान किया। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कांगड़ा जिले में इस तरह के आयोजन के जरिए भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपने अभियान को धार देने का प्रयास किया है। पदयात्रा के माध्यम से पार्टी ने प्रदेश सरकार के कामकाज और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति को एक साथ निशाने पर लिया। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी आने वाले समय में भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरती रहेगी। धर्मशाला में आयोजित इस पदयात्रा ने हिमाचल की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


















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