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प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी से भड़की बीजेपी, खड़गे के खिलाफ शिकायत, राहुल गांधी से भी माफी की मांग

पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए उनके बयान ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा विरोध जताया है। मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पटना में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने और सार्वजनिक माफी की मांग तक पहुंच गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटना समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान का बचाव किया है। पार्टी का कहना है कि खड़गे की टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। कांग्रेस के मुताबिक, उनका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैचारिक आधार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर था। इस सफाई के बावजूद भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। अब यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ सार्वजनिक बयानबाजी की मर्यादा को लेकर भी चर्चा में है। 

खड़गे के बयान के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता कृष्णा कुमार सिंह ने पटना के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत को बाद में गांधी मैदान थाने में स्थानांतरित किया गया। शिकायतकर्ता ने खड़गे से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद विवाद ने राजनीतिक मंच से आगे बढ़कर पुलिस तक का रास्ता तय कर लिया है। हालांकि, शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं या पुलिस ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचकर कार्रवाई की है। मामले में आगे की प्रक्रिया पुलिस की जांच और शिकायत में लगाए गए आरोपों के परीक्षण पर निर्भर करेगी। फिलहाल, भाजपा की ओर से बयान को लेकर विरोध और जवाबदेही की मांग जारी है। 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ राहुल गांधी से भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। पार्टी ने इसे राजनीतिक असहमति की सीमाओं से आगे की टिप्पणी बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की कोशिश की है। भाजपा के लिए यह मुद्दा कांग्रेस की राजनीतिक भाषा और उसके शीर्ष नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाने का अवसर बन गया है। पार्टी नेताओं का जोर इस बात पर है कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपने शब्दों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस का पक्ष है कि बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझने के बजाय विवाद पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

बीजेपी का प्रदर्शन, कांग्रेस ने दी वैचारिक संदर्भ की दलील 

बयान के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन और विरोध मार्च निकाले हैं। इन प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग उठाई गई। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर राजनीतिक माहौल को खराब कर रहा है। वहीं, कांग्रेस ने खड़गे के बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि उनका आशय प्रधानमंत्री के वैचारिक पिता से था और इस संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख किया जा रहा था। पार्टी का दावा है कि बयान के वास्तविक आशय को छोड़कर उसके एक हिस्से को विवाद का आधार बनाया गया है। 

कांग्रेस की इस दलील के बावजूद भाजपा पीछे हटने को तैयार नहीं है और उसने सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई है। इस विवाद ने एक बार फिर देश की राजनीति में नेताओं की बयानबाजी को लेकर बहस तेज कर दी है। चुनावी माहौल हो या सामान्य राजनीतिक गतिविधियां, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी टिप्पणियां अक्सर राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बनती रही हैं। लेकिन जब किसी बयान को लेकर शिकायत दर्ज हो जाए और विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाएं, तो उसका राजनीतिक असर और व्यापक हो जाता है। 

फिलहाल, खड़गे के बयान पर भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं। भाजपा इसे प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे वैचारिक संदर्भ में कही गई बात मान रही है। पटना में शिकायत के बाद पुलिस की अगली कार्रवाई और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर आगे आने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक दोनों दलों के बीच टकराव का एक और कारण बन सकता है।

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