राजधानी दिल्ली में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में मंगलवार, 29 सितंबर को एक अहम परियोजना शुरू होने जा रही है। लंबे इंतजार के बाद बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यातायात को आसान बनाने के साथ ही सिग्नल पर लगने वाले समय और जाम की समस्या को कम करने में मदद करेगा। परियोजना के शुरू होने के बाद व्यस्त समय में इस मार्ग पर यात्रा का समय करीब 20 से 25 मिनट तक कम होने का अनुमान है।
बारापुला फेज-3 को दिल्ली की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। इसके जरिए मयूर विहार फेज-1, सराय काले खां और आगे दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को अपेक्षाकृत सीधी और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। सराय काले खां पर यह मौजूदा बारापुला मार्ग से जुड़ेगा, जिससे पूर्वी दिल्ली से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले वाहन चालकों को कई सिग्नल वाले रास्तों से गुजरने की जरूरत कम होगी। इससे यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना का एक अहम पहलू इसका पर्यावरणीय असर भी है। जाम और वाहनों के बार-बार रुकने से होने वाले ईंधन की खपत तथा प्रदूषण को कम करने के लिहाज से कॉरिडोर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, जाम में कमी आने से रोजाना करीब दो टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हो सकता है। यह मात्रा करीब 30 हजार पेड़ों द्वारा कार्बन सोखे जाने के बराबर बताई गई है। हालांकि वास्तविक पर्यावरणीय लाभ यातायात के पैटर्न और कॉरिडोर के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा। बारापुला फेज-3 की परियोजना को वर्ष 2014 में मंजूरी मिली थी और इसका निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ था। शुरुआत में इसे करीब 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीन, निर्माण और अन्य तकनीकी अड़चनों के चलते परियोजना में लगातार देरी होती रही। निर्धारित समयसीमा के मुकाबले इसका काम करीब नौ साल की देरी से पूरा हुआ। इसी देरी के कारण परियोजना की लागत भी बढ़ गई। करीब 1200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजना पर आखिरकार 1635.03 करोड़ रुपये खर्च हुए।
लंबे समय तक निर्माणाधीन रहने के कारण यह परियोजना दिल्ली के सड़क बुनियादी ढांचे की उन योजनाओं में शामिल रही, जिनकी समयसीमा कई बार आगे बढ़ी। अब इसके तैयार होने के बाद पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली की कनेक्टिविटी को नया रास्ता मिलेगा। खासकर मयूर विहार, पटपड़गंज और आसपास के इलाकों से सराय काले खां की ओर आने-जाने वाले वाहन चालकों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। आगे मौजूदा बारापुला मार्ग के जरिये दक्षिण दिल्ली के प्रमुख हिस्सों तक पहुंच भी आसान होगी।
परियोजना के मुख्य हिस्से की लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर है। इसके अलावा रैंप और लूप को शामिल करने पर इसकी लंबाई करीब 4.9 किलोमीटर तक पहुंचती है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को कॉरिडोर पर चढ़ने और उतरने में सुविधा हो। कॉरिडोर पर वाहनों के लिए छह लेन बनाई गई हैं, जिनमें दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन हैं। इसके साथ साइकिल चलाने वालों और पैदल यात्रियों के लिए भी अलग सुविधाएं विकसित की गई हैं।
सिग्नल फ्री कनेक्टिविटी से बदलेगा पूर्वी-दक्षिणी दिल्ली का सफर
बारापुला फेज-3 शुरू होने के बाद मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इसके आगे मौजूदा बारापुला मार्ग के जरिए दक्षिण दिल्ली की ओर जाने का रास्ता मिलेगा। इस पूरी कनेक्टिविटी से पूर्वी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के बीच आवागमन करने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। कई रिपोर्टों में मयूर विहार से एम्स तक के सफर के समय में भी उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान जताया गया है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय यातायात की स्थिति और वाहन की गति पर निर्भर करेगा। करीब 10 किलोमीटर के सिग्नल-फ्री संपर्क मार्ग के रूप में बारापुला नेटवर्क के विस्तार से दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बांटने में मदद मिल सकती है। परियोजना का उद्देश्य केवल एक नया एलिवेटेड मार्ग उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पूर्वी दिल्ली को दक्षिणी दिल्ली से बेहतर तरीके से जोड़ना भी है। इससे नोएडा और पूर्वी दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन चालकों को सराय काले खां के रास्ते दक्षिण दिल्ली जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
कॉरिडोर में पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए अलग सुविधाएं बनाए जाने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क पर वाहनों के साथ गैर-मोटर चालित यातायात के लिए अलग व्यवस्था होने से सड़क सुरक्षा और आवागमन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। इस तरह परियोजना को केवल वाहन चालकों की सुविधा तक सीमित नहीं रखा गया है।
परियोजना की शुरुआत के साथ दिल्ली के सड़क ढांचे में एक महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ जाएगी। लंबे समय से निर्माणाधीन इस कॉरिडोर के खुलने के बाद इसका वास्तविक प्रभाव यातायात के दबाव, यात्रा समय और आसपास की सड़कों पर वाहनों की संख्या में बदलाव के रूप में सामने आएगा। फिलहाल सरकार और लोक निर्माण विभाग को उम्मीद है कि इससे पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच रोजाना आने-जाने वाले लोगों को जाम से राहत मिलेगी और यात्रा अधिक सुगम होगी।


















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