देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम आदमी की जेब पर बड़ा हमला किया है। आज, 19 मई से पेट्रोल और डीजल औसतन 90-90 पैसे प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। बीते पांच दिनों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को तेल कंपनियों ने एक झटके में 3-3 रुपए प्रति लीटर तक दाम बढ़ाए थे। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में ईंधन और महंगा हो सकता है। अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि वाहन चालकों को महंगे पेट्रोल-डीजल की आदत डालनी होगी। वैश्विक बाजार के संकेत बता रहे हैं कि आने वाले महीनों में पेट्रोल की कीमत ₹100 प्रति लीटर के पार पहुंच सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान-अमेरिका टकराव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना दिया है। कुछ महीने पहले तक जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। इसका असर सीधे भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदते हैं। भारत में तेल की कीमतें भले रोजाना तय होती हों, लेकिन लंबे समय तक राजनीतिक कारणों से इन्हें स्थिर रखा गया था। अब कंपनियां धीरे-धीरे उस दबाव की भरपाई कर रही हैं। ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है।
ट्रकों और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ेगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत बढ़ेगी क्योंकि किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा डीजल खर्च करना पड़ेगा। इसका असर अनाज और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दिखाई देगा। सार्वजनिक परिवहन भी इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं रहेगा। बस, ऑटो और स्कूल वाहनों का किराया बढ़ सकता है। यानी आने वाले समय में आम आदमी के घर का बजट फिर बिगड़ने वाला है। पहले से महंगाई झेल रही जनता के लिए यह नई चिंता बनकर सामने आई है।
दरअसल, तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई थीं, लेकिन घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए गए। इससे कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का घाटा हो रहा था। ऐसे में कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होतीं। उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदा जाता है। इसके बाद रिफाइनरी में उसे प्रोसेस कर पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है।
फिर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है। उसके बाद डीलर कमीशन जुड़ता है और अंत में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट वसूलती हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन की कीमतें अलग होती हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में पहले ही पेट्रोल-डीजल के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ चुके थे। भारत में अब तक सरकार यह कहकर राहत देती रही कि वैश्विक संकट का बोझ जनता पर नहीं डाला जाएगा। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।
अब सस्ता पेट्रोल बीते दिनों की बात? बाजार के संकेत दे रहे बड़े खतरे की चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा चला और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आने वाले समय में हर कुछ हफ्तों में छोटे-छोटे अंतराल पर कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यानी अब वह दौर लौट सकता है जब पेट्रोल हर महीने नए रिकॉर्ड बनाता था। कई शहरों में पेट्रोल पहले ही ₹95 प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुका है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात नहीं सुधरे तो जल्द ही देश के कई हिस्सों में पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर के पार जा सकता है। सरकार के सामने भी चुनौती कम नहीं है।
एक तरफ तेल कंपनियों का घाटा कम करना जरूरी है तो दूसरी तरफ महंगाई को नियंत्रित रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है। क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ते ही उसका असर हर चीज पर दिखाई देता है। परिवहन महंगा होता है, उत्पादन लागत बढ़ती है और अंततः आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ जाता है। मार्च 2024 के बाद से देश में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर राहत दी थी। लेकिन अब वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।
तेल बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी रह सकता है। ऐसे में साफ है कि आने वाला समय वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। महंगे पेट्रोल-डीजल का असर अब केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रसोई से लेकर बाजार और सफर तक हर जगह इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

















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