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हिमाचल में कांग्रेस ने किया विरोध प्रदर्शन, राहुल की हिरासत और SIR को लेकर चुनाव आयोग घेरा

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध की आंच अब हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गई है। कांग्रेस ने गुरुवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सोलन, ऊना समेत कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय दमन की कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस के इस प्रदर्शन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। 

कांग्रेस नेताओं का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूचियों से जुड़े सवाल उठाना विपक्ष का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में विपक्षी नेताओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया गया। हिमाचल कांग्रेस के जिला मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। कई जगह कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब देश में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तब चुनाव आयोग को विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देना चाहिए। सोलन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंका। 

ऊना में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर आम मतदाताओं के बीच भी कई तरह की चिंताएं हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया में किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं होना चाहिए। ऊना में प्रदर्शन के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस अपने विरोध को आगे भी जारी रखेगी। अग्निहोत्री ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है और इसको लेकर उठने वाले सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। 

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। पार्टी ने इस पूरे मामले को कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और राजनीतिक दलों को भी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने भाजपा पर राहुल गांधी की छवि खराब करने के लिए लंबे समय से अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राहुल गांधी को ‘पप्पू’ साबित करने और उन्हें बदनाम करने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन आज की राजनीति में राहुल गांधी की भूमिका ने यह साबित कर दिया है कि वह ‘पप्पू’ नहीं बल्कि ‘पप्पा’ हैं। 

पाटिल के इस बयान के बाद प्रदर्शन स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दिल्ली में हुई कार्रवाई को केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक मामला चुनावी व्यवस्था, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है। यही वजह है कि पार्टी ने हिमाचल के अलग-अलग जिलों में एक साथ प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग से लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं, लेकिन इनका संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नामों की जांच और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की गलती सीधे नागरिक के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।

SIR और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस का आक्रोश

हिमाचल कांग्रेस के प्रदर्शन का एक बड़ा मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी रहा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका को दूर करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने मांग की कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जांचने तथा आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को भी प्रदर्शन के केंद्र में रखा। 

पार्टी नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को दबाने के बजाय उनका जवाब दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष और जनता के बीच जो सवाल हैं, उन पर स्पष्टता जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। दिल्ली में राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर पार्टी ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोध को रोकने का आरोप लगाया। जिला मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शनों में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपने सवाल आगे भी उठाती रहेगी। नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में सुधार और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। 

ऊना में मुकेश अग्निहोत्री के एफआईआर वाले बयान ने प्रदर्शन को और राजनीतिक धार दे दी। वहीं रजनी पाटिल के राहुल गांधी को लेकर दिए बयान ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया। प्रदेश कांग्रेस ने संकेत दिया कि दिल्ली की कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर पार्टी आगे भी आंदोलन को विस्तार दे सकती है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास कायम रहना जरूरी है। इसके लिए मतदाता सूची तैयार करने से लेकर चुनाव कराने तक हर स्तर पर पारदर्शिता होनी चाहिए। 

पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि विपक्ष किसी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो उसे जवाब मिलना चाहिए, न कि प्रदर्शन करने पर हिरासत या पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़े। इस तरह हिमाचल में कांग्रेस का गुरुवार का प्रदर्शन दिल्ली की घटना के विरोध से आगे बढ़कर चुनाव आयोग, SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर केंद्रित राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। जिला मुख्यालयों पर हुए विरोध प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस ने साफ संदेश दिया कि वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर अपना अभियान जारी रखने की बात कही।

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