हिमाचल प्रदेश में मानसून की रफ्तार अब धीमी पड़ने लगी है। बीती रात प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई, लेकिन सोमवार सुबह मौसम ने करवट बदल ली और शिमला समेत राज्य के अधिकांश इलाकों में धूप खिल गई। मौसम विभाग के अनुसार अगले छह दिनों तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है। 24 से 29 अगस्त के बीच अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने और धूप खिलने के आसार हैं। इस दौरान कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन व्यापक बारिश की संभावना कम है। बीती रात प्रदेश के कुछ इलाकों में बादलों ने जमकर पानी बरसाया। बिलासपुर जिले के नयना देवी में सबसे ज्यादा 66.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा धर्मशाला में 36.2 मिलीमीटर और कांगड़ा में 26.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इन इलाकों में बारिश के कारण रात के समय मौसम सुहावना रहा, लेकिन सुबह होते-होते मौसम साफ होने लगा। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता कम रहने से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश का दौर थम सकता है।
हालांकि पहाड़ी राज्य होने के कारण स्थानीय मौसम में बदलाव जारी रहेगा और कुछ स्थानों पर बादल बनने के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। फिलहाल अगले पांच दिनों के लिए प्रदेश के किसी भी जिले में मौसम संबंधी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। बारिश की गतिविधियां कम होने का सीधा असर तापमान पर भी देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अधिकांश शहरों के अधिकतम तापमान में करीब दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। लगातार धूप निकलने से दिन के समय गर्मी का एहसास बढ़ेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में भी उमस बढ़ सकती है, जबकि मैदानी और निचले इलाकों में दोपहर के समय गर्मी ज्यादा महसूस होने की संभावना है।
प्रदेश में औसत अधिकतम तापमान पहले ही सामान्य से 0.2 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है। ऐसे में तापमान में दो से तीन डिग्री की संभावित बढ़ोतरी लोगों को उमस और गर्मी का अधिक अहसास करा सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां बारिश के बाद वातावरण में नमी बनी हुई है, वहां धूप निकलने के साथ उमस बढ़ने की संभावना है।
मौसम विभाग की ओर से फिलहाल किसी बड़े मौसम तंत्र के सक्रिय होने की चेतावनी नहीं दी गई है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम का मिजाज अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद है। सुबह और शाम के समय मौसम सामान्य रह सकता है, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी बढ़ सकती है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी यह मौसम बारिश के मुकाबले अधिक अनुकूल रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले इलाकों में स्थानीय स्तर पर अचानक मौसम बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हिमाचल प्रदेश में अब तक सामान्य से आठ फीसदी कम हुई बारिश
इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। एक जून से 23 अगस्त तक प्रदेश में सामान्य तौर पर 564.7 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल इसी अवधि में 522 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इस तरह राज्य में अब तक सामान्य से करीब आठ फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि प्रदेश के सभी जिलों में मानसून का असर एक जैसा नहीं रहा है। कहीं बारिश ने सामान्य आंकड़े को पीछे छोड़ा है तो कहीं बारिश की कमी काफी ज्यादा रही है।
बारिश की कमी वाले जिलों में लाहौल-स्पीति सबसे आगे है। यहां अब तक सामान्य से करीब 55 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके बाद हमीरपुर में भी बारिश सामान्य से 34 फीसदी कम दर्ज की गई है। इन जिलों में मानसून के दौरान अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं बरसा है। बारिश की कमी का असर स्थानीय जलस्रोतों, कृषि गतिविधियों और आने वाले समय में पानी की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दूसरी ओर प्रदेश के कुछ जिलों में मानसून सामान्य से ज्यादा सक्रिय रहा है। कुल्लू इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां सामान्य के मुकाबले करीब 23 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। इससे साफ है कि पूरे हिमाचल में मानसून का वितरण समान नहीं रहा। एक ही समय में कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी रही तो कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। प्रदेश में मानसून की यह असमान स्थिति हिमाचल के भौगोलिक स्वरूप से भी जुड़ी है। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों, घाटियों और मैदानी इलाकों में बादलों की सक्रियता अलग-अलग रहने के कारण बारिश के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। यही वजह है कि राज्य के औसत आंकड़े से किसी एक जिले की वास्तविक स्थिति का पूरी तरह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
आने वाले दिनों में बारिश कम रहने से राज्य का कुल वर्षा घाटा और बढ़ सकता है, हालांकि कुछ स्थानों पर होने वाली हल्की बारिश इसमें आंशिक राहत दे सकती है। मौसम विभाग ने 24 से 29 अगस्त के बीच व्यापक बारिश की संभावना कम जताई है। ऐसे में फिलहाल प्रदेश के लोगों को धूप और बढ़ते तापमान के लिए तैयार रहना होगा। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बावजूद मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की गारंटी नहीं है। हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में स्थानीय बादल बनने के कारण कुछ स्थानों पर अचानक हल्की बारिश हो सकती है। इसलिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को मौसम में होने वाले स्थानीय बदलावों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि अगले पांच दिनों के लिए किसी भी जिले में मौसम विभाग ने कोई चेतावनी जारी नहीं की है। इसका मतलब है कि राज्य में भारी बारिश जैसी स्थिति को लेकर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं बताया गया है।
आने वाले दिनों में धूप बढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी और बारिश की गतिविधियां सीमित रहेंगी। हिमाचल में मानसून फिलहाल कमजोर चरण में पहुंच गया है। बीती रात कुछ इलाकों में अच्छी बारिश के बाद सोमवार को मौसम साफ रहा और अगले कई दिनों तक भी इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। तापमान में दो से तीन डिग्री की बढ़ोतरी के कारण उमस बढ़ेगी, जबकि प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य से करीब आठ फीसदी कम है। जिलों के आंकड़े बताते हैं कि मानसून का असर कहीं ज्यादा तो कहीं काफी कम रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अगस्त के अंतिम दिनों में मानसून फिर सक्रिय होता है या प्रदेश में बारिश की कमी का आंकड़ा और बढ़ता है।

















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