प्याज के दाम में उछाल के बीच केंद्र सरकार का बड़ा कदम, नासिक से चलेंगी कांदा एक्सप्रेस

देशभर में रसोई का बजट एक बार फिर दबाव में आता दिखाई दे रहा है। चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच अब प्याज के दामों में भी तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर पहुंच गई हैं। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में हस्तक्षेप करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार अब अपने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर उन इलाकों में भेजेगी, जहां कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके लिए सोमवार से नासिक से देश के प्रमुख शहरों के लिए विशेष ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेनें चलाने की योजना है। इन ट्रेनों के जरिए प्याज की बड़ी खेप दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों तक पहुंचाई जाएगी। प्याज की कीमतों में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार को देशभर में इसकी औसत खुदरा कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यह कीमत पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 45 प्रतिशत अधिक है, जबकि पिछले महीने की तुलना में करीब 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि जिन राज्यों और शहरों में कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं, वहां बफर स्टॉक उतारने से आपूर्ति बढ़ेगी और बाजार में कीमतों पर दबाव कम होगा।

केंद्र सरकार की नजर खासतौर पर उन शहरों पर है, जहां प्याज की कीमत आम उपभोक्ता की पहुंच से तेजी से बाहर जा रही है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। पिछले साल इसी अवधि में दिल्ली में प्याज करीब 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। यानी एक साल में राजधानी में प्याज की कीमत में लगभग 30 रुपये प्रति किलो का अंतर आया है। दक्षिण भारत में भी प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। चेन्नई में प्याज का खुदरा भाव 58 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह करीब 33 रुपये प्रति किलो था। यानी चेन्नई में भी एक साल के भीतर प्याज की कीमत में बड़ा उछाल आया है। केरल और असम के कुछ हिस्सों से भी प्याज के महंगे होने की जानकारी सामने आ रही है। यही वजह है कि सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने और ऊंची कीमतों वाले बाजारों में प्याज पहुंचाने का फैसला किया है।

सरकार के इस कदम में नासिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। नासिक देश के प्रमुख प्याज उत्पादन और व्यापार केंद्रों में शामिल है। यहां से देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी मात्रा में प्याज भेजा जाता है। अब इसी क्षेत्र से विशेष ट्रेन के जरिए प्याज को तेजी से उन बाजारों तक पहुंचाया जाएगा, जहां कीमतें ज्यादा हैं। सड़क मार्ग की तुलना में रेल परिवहन के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज एक साथ भेजना आसान होगा और समय भी कम लग सकता है।

चीनी के दाम भी बढ़े, सरकार ने प्याज पर बढ़ाया फोकस

प्याज के साथ-साथ चीनी की बढ़ती कीमतों ने भी उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाई है। शनिवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 62.5 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि एक महीने पहले इसका औसत भाव लगभग 46 रुपये प्रति किलो था। यानी केवल एक महीने में चीनी की कीमत में करीब 16 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में स्थिति और अधिक महंगी है। दिल्ली में चीनी करीब 65 रुपये प्रति किलो और मुंबई में लगभग 69 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। हालांकि, फिलहाल सरकार का प्रमुख ध्यान प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने पर है। अधिकारियों का कहना है कि बफर स्टॉक से प्याज को बाजार में उतारते समय कीमतों को लेकर सावधानी बरती जाएगी। सरकार इसे कम कीमत पर उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और बाजार में कृत्रिम रूप से कीमत बढ़ाने की किसी कोशिश पर भी रोक लगाई जा सके।

अधिकारियों के मुताबिक बाजार में प्याज की कीमतों में हुई तेजी के पीछे केवल आपूर्ति की स्थिति ही कारण नहीं हो सकती। इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि कुछ कारोबारी कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए जानबूझकर बाजार में ऊंचे भाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हों। ऐसे में सरकार की ओर से बफर स्टॉक जारी करने का उद्देश्य केवल प्याज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति का भरोसा कायम करना भी है। सरकार का आकलन है कि आने वाले महीनों में प्याज की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकारी बफर स्टॉक के अलावा किसानों और बाजार में मौजूद निजी स्टॉक को मिलाकर भी आपूर्ति की स्थिति को संतुलित रखा जा सकता है। सरकार का मानना है कि यदि प्याज की उपलब्धता बढ़ती है तो कीमतों पर बना दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विशेष रेल सेवा का सहारा लिया है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी नासिक से दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाई गई थी। उस समय भी सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और प्रमुख बाजारों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए बफर स्टॉक का इस्तेमाल किया था। इस बार भी सरकार ने उन इलाकों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, जहां प्याज की कीमत राष्ट्रीय औसत से अधिक है। नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी तक प्याज भेजे जाने से इन बाजारों में उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। विशेष ट्रेनों के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचने से थोक बाजार में भी आपूर्ति बढ़ सकती है, जिसका असर आगे चलकर खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।

सरकार की कोशिश है कि प्याज की कीमतों में अचानक आई तेजी का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर न पड़े। प्याज भारतीय घरों में रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है और इसकी कीमत बढ़ने का असर घरेलू बजट के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और छोटे खाद्य कारोबारों पर भी पड़ता है। ऐसे में सरकार की ओर से बफर स्टॉक बाजार में उतारने और विशेष रेल सेवा के जरिए प्याज भेजने का फैसला कीमतों पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की नजर प्याज की कीमतों और बाजार में उपलब्धता पर बनी रहेगी। यदि कुछ इलाकों में कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं तो वहां अतिरिक्त स्टॉक भेजने का फैसला भी लिया जा सकता है। फिलहाल नासिक से चलने वाली कांदा एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी है। सरकार को उम्मीद है कि बाजार में अतिरिक्त प्याज पहुंचने के बाद कीमतों में नरमी आएगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

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