सावन के पहले सोमवार को शिवभक्ति अपने चरम पर पहुंच गई। हरिद्वार और उत्तराखंड के विभिन्न तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के बीच दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, मोदीनगर, मेरठ और मुजफ्फरनगर के प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। दूधेश्वरनाथ मंदिर समेत क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, वहीं कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा और सुचारु आवागमन बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा किए गए डायवर्जन और कट बंद होने से आम लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ा।
गाजियाबाद में सुबह से ही मेरठ रोड, जीटी रोड, दिल्ली-मेरठ मार्ग और राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दफ्तर, स्कूल और अन्य कार्यों के लिए निकले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मेरठ तिराहे पर सबसे अधिक दबाव देखा गया, जहां वाहन रेंगते नजर आए। पुलिस ने मेरठ रोड के अधिकांश कट बंद कर दिए हैं, जिससे स्थानीय यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
मेरठ रोड पर दिल्ली की ओर जाने वाली लेन का बड़ा हिस्सा कांवड़ियों के लिए सुरक्षित कर दिया गया है। इसके चलते सामान्य वाहनों के लिए सड़क लगभग एकल मार्ग में तब्दील हो गई है। यातायात पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण दबाव कम नहीं हो रहा। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ने की संभावना है।मोदीनगर में भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं रही। सोमवार सुबह से दिल्ली-मेरठ मार्ग के एक हिस्से को कांवड़ियों के लिए आरक्षित कर दिया गया। सामान्य वाहनों को दूसरी लेन से निकाला जा रहा है, जिसके कारण कई स्थानों पर आमने-सामने यातायात चलने से जाम की स्थिति पैदा हो रही है। राज चौपला क्षेत्र में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला, जहां वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार व्यवस्था सुधारने में जुटे रहे।
मेरठ में भी कांवड़ यात्रा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिया। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े कई मार्गों पर वाहनों की गति धीमी रही। शहर में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है, जबकि कई मार्गों पर डायवर्जन लागू हैं। पुलिस का कहना है कि कांवड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर, जो हरिद्वार से लौटने वाले कांवड़ियों का प्रमुख पड़ाव माना जाता है, वहां भी लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-34 और कांवड़ पटरी मार्ग पर कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई स्थानों पर डाक कांवड़ दलों के गुजरने के दौरान यातायात कुछ समय के लिए रोका गया, जिससे लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने यात्रियों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। दिल्ली में भी कांवड़ यात्रा का असर दिखाई देने लगा है। दिल्ली पुलिस ने कई मार्गों पर विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है। उत्तर और पूर्वी दिल्ली की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित की गई है। दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-मेरठ मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि कांवड़ियों और आम यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अगले सप्ताह और बढ़ेगी भीड़, 11 अगस्त तक जारी रहेगी कांवड़ यात्रा
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि अभी कांवड़ यात्रा का दबाव शुरुआती चरण में है। जैसे-जैसे सावन शिवरात्रि नजदीक आएगी, कांवड़ियों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। विशेष रूप से डाक कांवड़ दलों के आने के बाद दिल्ली-एनसीआर, मेरठ, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के मार्गों पर यातायात दबाव और अधिक बढ़ने की संभावना है। पुलिस ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने तथा यात्रा से पहले यातायात सलाह जरूर देखने की सलाह दी है। गाजियाबाद पुलिस पहले ही भारी वाहनों पर प्रतिबंध लागू कर चुकी है और आगामी दिनों में हल्के वाहनों के लिए भी अतिरिक्त डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं। डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन के अनुसार बुधवार से हल्के वाहनों का डायवर्जन और सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि कांवड़ियों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा सके।
रोडवेज बसों के रूट में भी बदलाव किया गया है। कई बसों को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपने रूट की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। इस वर्ष कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हुई है और इसका समापन 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन होगा। इसी दिन कांवड़िए अपने-अपने शिवालयों में गंगाजल अर्पित करेंगे। प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम चार-पांच दिनों में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलेगी, क्योंकि डाक कांवड़ और अन्य दल बड़ी संख्या में अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगे।
फिलहाल पहले सावन सोमवार पर शिवभक्ति का उत्साह सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। एक ओर मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हैं तो दूसरी ओर कांवड़ मार्गों पर लाखों शिवभक्त “बोल बम” के जयघोष के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि इस आस्था के महासागर के बीच आम यात्रियों को जाम और डायवर्जन की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ यातायात व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण होने की संभावना है।
















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