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दिल्ली हाई कोर्ट को मिले सात नए न्यायाधीश, पांच ने हिंदी और दो ने अंग्रेजी में ली शपथ, अब राजधानी में न्यायिक व्यवस्था होगी मजबूत 

दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को न्यायिक व्यवस्था को मजबूती देते हुए सात नवनियुक्त न्यायाधीशों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। हाई कोर्ट परिसर में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सभी सातों नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। खास बात यह रही कि सात में से पांच न्यायाधीशों ने हिंदी में शपथ लेकर अपनी जिम्मेदारी संभाली, जबकि दो न्यायाधीशों ने अंग्रेजी में शपथ ली। नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। शपथ लेने वाले न्यायाधीशों में जसंजय शर्मा, भरत पराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज ने हिंदी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। वहीं, निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना ने अंग्रेजी में शपथ ली। समारोह में हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के अलावा वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी, रजिस्ट्री के अधिकारी, अधिवक्ता और नवनियुक्त न्यायाधीशों के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे।

सातों न्यायाधीश दिल्ली की जिला न्यायपालिका में लंबे समय तक अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके पास न्यायिक कार्यों का व्यापक अनुभव है। जिला न्यायपालिका में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद अब उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे हाई कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है। नवनियुक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद आगे बढ़ी। कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए आठ न्यायिक अधिकारियों के नाम केंद्र सरकार को भेजे थे। 

इनमें से सात नामों को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद संबंधित न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। इन नियुक्तियों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या अब 50 हो गई है। हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 है। इसमें 45 स्थायी न्यायाधीश और 15 अतिरिक्त न्यायाधीशों के पद शामिल हैं। इस लिहाज से देखें तो अब हाई कोर्ट में स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 83 प्रतिशत पदों पर न्यायाधीश कार्यरत हैं। हालांकि, स्वीकृत क्षमता के मुकाबले अभी भी 10 पद खाली हैं।

जिला न्यायपालिका के अनुभव के साथ संभालेंगे हाई कोर्ट की जिम्मेदारी

सातों नए न्यायाधीशों के अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति को दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवनियुक्त न्यायाधीशों में अरुण भारद्वाज शपथ लेने से पहले दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत थे। रजिस्ट्रार जनरल के तौर पर उन्होंने हाई कोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों को संभाला। अब न्यायाधीश के रूप में उनकी भूमिका अलग होगी और वे मामलों की सुनवाई तथा न्यायिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। अन्य नवनियुक्त न्यायाधीशों ने भी दिल्ली जिला न्यायपालिका में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उन्होंने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और विशेष न्यायाधीश सहित अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। जिला अदालतों में लंबे समय तक न्यायिक कार्य करने के कारण उन्हें मुकदमों की सुनवाई, साक्ष्यों के परीक्षण, आपराधिक और दीवानी मामलों की प्रक्रिया तथा न्यायिक प्रशासन का प्रत्यक्ष अनुभव रहा है। अब यही अनुभव हाई कोर्ट के स्तर पर उनके काम में उपयोगी साबित होगा।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पांच न्यायाधीशों का हिंदी में शपथ लेना भी उल्लेखनीय रहा। न्यायिक पद की शपथ किसी भी न्यायाधीश के लिए संवैधानिक और महत्वपूर्ण औपचारिक प्रक्रिया होती है। शपथ के साथ न्यायाधीश संविधान के प्रति निष्ठा रखते हुए अपने पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लेते हैं। समारोह में मौजूद न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने नए न्यायाधीशों का स्वागत किया। दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 होने के बावजूद लंबे समय से सभी पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। सात नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 50 तक पहुंची है। इससे न्यायालय के सामने मौजूद मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक क्षमता में इजाफा हुआ है। हालांकि, अभी स्वीकृत संख्या के अनुसार 10 पदों पर नियुक्तियां होना बाकी हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट देश के प्रमुख उच्च न्यायालयों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में संवैधानिक, आपराधिक, दीवानी, वाणिज्यिक और प्रशासनिक मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ना न्यायिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। नए न्यायाधीशों के आने से अलग-अलग पीठों में मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा आठ न्यायिक अधिकारियों के नाम भेजे जाने के बाद सात नामों को मंजूरी मिलना नियुक्ति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण रहा। एक नाम को मंजूरी नहीं मिलने के बाद सात न्यायिक अधिकारियों ने सोमवार को शपथ ली। अब ये सभी दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस तरह सोमवार का शपथ ग्रहण समारोह दिल्ली हाई कोर्ट के लिए केवल सात नए न्यायाधीशों के पदभार ग्रहण करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे अदालत की मौजूदा न्यायिक क्षमता भी मजबूत हुई। जिला न्यायपालिका में काम कर चुके अनुभवी अधिकारियों के हाई कोर्ट में आने से न्यायिक व्यवस्था को अतिरिक्त अनुभव मिला है। सातों न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के साथ हाई कोर्ट में कुल 50 न्यायाधीश कार्यरत हो गए हैं, जबकि 60 न्यायाधीशों की स्वीकृत क्षमता को पूरा करने के लिए अभी 10 पदों पर नियुक्तियां होना बाकी हैं।

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